बद्रुका कॉलेज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आरंभ

हैदराबाद, बद्रुका कॉलेज ऑ़फ कॉमर्स एंड आर्ट्स द्वारा सस्टेनेबिलिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में व्यावसायिक रणनीतियाँ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आरंभ हुआ। उद्घाटन सत्र की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। तत्पश्चात सभी का स्वागत किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. श्रीराम वेंकटेश, विशिष्ट अतिथि प्रो. आई. आनंद पवार, मुख्य वक्ता प्रो. चेतन श्रीवास्तव, एसजीजीबीईएस के सदस्य, संकाय सदस्य और छात्र अवसर पर उपस्थित थे।

प्राचार्य डॉ. बी. मोहन कुमार ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल वैकल्पिक विकल्प नहीं रह गए, बल्कि भविष्य के व्यावसायिक मॉडलों को आकार देने के लिए आवश्यक उपकरण बन गए हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि छात्रों के लिए ऐसे कौशल विकसित करना ज़रूरी है, जिनमें प्रौद्योगिकी, नैतिकता और ज़िम्मेदारी का सही मेल हो।

महानिदेशक प्रो. अभिराम कृष्ण ने शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि यह सेमिनार कॉलेज के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य छात्रों को वैश्विक चुनौतियों, तकनीकी व्यवधानों और सतत विकास की पद्धतियों को समझने के लिए तैयार करना है।

मुख्य अतिथि प्रो. श्रीराम वेंकटेश ने दुनिया भर में हो रही तीव्र तकनीकी प्रगति के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि व्यवसायों को अपनी उत्पादकता, निर्णय लेने की क्षमता और दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता को बेहतर बनाने के लिए एआई संचालित प्रणालियों के अनुरूप खुद को ढालना होगा। उन्होंने छात्रों को प्रोत्साहित किया कि वह एआई को किसी खतरे के रूप में न देखें, बल्कि एक ऐसे उपकरण के रूप में देखें, जो मानवीय क्षमताओं को और अधिक निखारता है।

डिजिटल रणनीति और पर्यावरण संतुलन पर जोर

विशिष्ट अतिथि प्रो. आई. आनंद पवार ने आधुनिक डिजिटल रणनीतियों और पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन, ई-कचरा और लिथियम बैटरी से होने वाले प्रदूषण जैसे मुद्दों पर उद्योगों और शोधकर्ताओं को तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

मुख्य वक्ता प्रो. चेतन श्रीवास्तव ने बताया कि किस प्रकार एआई विभिन्न उद्योगों को नया स्वरूप प्रदान कर रहा है। उन्होंने समझाया कि एआई, प्राकृतिक बुद्धिमत्ता और मानवीय बुद्धिमत्ता को एक-दूसरे का पूरक बनकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि किसी सार्थक उद्देश्य से युक्त प्रौद्योगिकी ही एक बेहतर भविष्य का निर्माण करती है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वह सतत जीवनशैली की आदतों तथा ज़िम्मेदार नवाचार को अपनाएँ।

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इस दौरान स्मारिका का विमोचन किया गया, जिसमें प्राप्त कुल 260 शोध-सारांशों में से 203 को शामिल किया गया। सेमिनार में शैक्षणिक जगत से देश भर के विभिन्न कॉलेजों से 200 प्रतिनिधियों ने विपणन और वित्त के क्षेत्र में शोध-पत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का आयोजन और समर्थन कॉलेज के वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा किया गया। अवसर पर सचिव श्रीकिशन बद्रुका, उप-प्राचार्य डॉ. पी. वेंकटैया, मितेश कडाकिया, संयोजक डॉ. डी. श्रीराम, सह-संयोजक एन. लक्ष्मी व अन्य उपस्थित थे।

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