भाजपा की लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की फूलो देवी नेताम राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित

रायपुर, छत्तीसगढ़ से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस नेता फूलो देवी नेताम सोमवार को राज्यसभा के लिए बिना किसी विरोध के चुनी गईं।

विधानसभा अधिकारियों के मुताबिक, नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख आज दोपहर खत्म हो गई और दोनों उम्मीदवार बिना किसी विरोध के चुन लिए गए हैं। बाद में निर्वाचन अधिकारी मनीष शर्मा ने वर्मा और नेताम को चुनाव के प्रमाण पत्र सौंपे। लक्ष्मी वर्मा (59) राज्य के प्रभावशाली कुर्मी समाज से हैं। उन्होंने भाजपा की तरफ से राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाए जाने के बाद राज्य महिला अयोग से इस्तीफा दे दिया था। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की निवासी वर्मा वर्तमान में रायपुर में निवास करती हैं।

1990 में भाजपा से शुरू हुआ लक्ष्मी वर्मा का राजनीतिक सफर

वर्मा ने 1990 में भाजपा की प्राथमिक सदस्य के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। वह 1994 में रायपुर नगर निगम में वार्ड पार्षद चुनी गईं। बाद में उन्होंने 2010 से 2015 तक रायपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष के तौर पर काम किया। भाजपा के वरिष्ठ नेता, वर्मा को एक अनुभवी जमीनी नेता बताते हैं जिन्हें ग्रामीण राजनीति की गहरी समझ है। वह भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष और प्रवक्ता रह चुकी हैं। भाजपा के एक पदाधिकारी ने बताया कि महिला मोर्चा से लेकर पार्टी के पदाधिकारी पद तक वर्मा लगातार सक्रिय रही हैं तथा उन्होंने जिला, मंडल और बूथ स्तर पर काम किया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा के लिए चुने जाने पर बधाई दी और भरोसा जताया कि वह संसद के उच्च सदन में छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाएंगी। साय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि वरिष्ठ भाजपा नेत्री एवं महिला आयोग की पूर्व सदस्य श्रीमती लक्ष्मी वर्मा जी को छत्तीसगढ़ से निर्विरोध राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने पर हार्दिक बधाई एवं सफल कार्यकाल की अनंत शुभकामनाएं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि वह छत्तीसगढ़ की सशक्त आवाज बनकर प्रदेश के हितों से जुड़े मुद्दों को पूरी प्रतिबद्धता और मुखरता के साथ संसद के उच्च सदन में रखेंगी। उनका समृद्ध राजनीतिक अनुभव और नेतृत्व क्षमता विकसित भारत-विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

1998 में पहली बार विधायक बनीं नेताम

इसके अलावा, बस्तर इलाके के कोंडागांव जिले की आदिवासी नेता नेताम (54) लगातार दूसरी बार राज्यसभा के लिए चुनी गई हैं। वह 1998 में अविभाजित मध्यप्रदेश की विधानसभा के लिए पहली बार विधायक चुनी गई थीं। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ बनने के बाद, वह राज्य की पहली विधानसभा की सदस्य बनीं। वर्ष 2016 से, नेताम छत्तीसगढ़ प्रदेश महिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष के तौर पर काम कर रही हैं और पार्टी तथा सार्वजनिक जीवन में कई अहम पदों पर रह चुकी हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने नेताम को बधाई दी है।

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राज्य के पांच राज्यसभा सदस्यों में से दो-कवि तेजपाल सिंह तुलसी और नेताम का छह साल का कार्यकाल नौ अप्रैल को खत्म होने वाला था, जिससे दो खाली सीटों को भरने के लिए चुनाव कराने की जरूरत थी। राज्य के दूसरे राज्यसभा सदस्य कांग्रेस के रंजीत रंजन और राजीव शुक्ला, और भाजपा के देवेंद्र प्रताप सिंह हैं। छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 सीट हैं जिसमें भाजपा के 54 सदस्य हैं, उसके बाद कांग्रेस के 35 और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का एक सदस्य है। सदन में अपनी संख्या के आधार पर भाजपा और कांग्रेस दोनों को एक-एक राज्यसभा सीट मिलने की उम्मीद थी। (भाषा)

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