गठबंधन बीआरएस को रास नहीं : केटीआर

हैदराबाद, भारत राष्ट्र समिति (भारास) कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व मंत्री कल्वाकुंट्ला तारक रामाराव ने स्पष्ट किया कि अगले विधानसभा चुनाव में किसी पार्टी के साथ बीआरएस का गठबंधन नहीं रहेगा। भाजपा के साथ तो हरगिज मिलकर काम नहीं किया जाएगा, क्योंकि गठबंधन बीआरएस को रास नहीं आता है।

मंचीरियाल दौरे के दौरान मीडिया से बात करते हुए केटीआर ने कहा कि इस बार बीआरएस को फिर से सत्ता में आना हो तो गोदावरी परिवाहक प्रांतों के विधायकों को बदलने की राय पार्टी में व्यक्त की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार जीतने वाले घोड़ों को ही चुनावी रेस में उतारा जाएगा। जिसके जहाँ से जीतने की संभावना अधिक होगी, उसे वहीं से टिकट दिया जाएगा। उन्होंने पूर्व केसीआर शासन के 10 सालों में पार्टी और जनता के बीच दूरियां बढ़ने के कारण हुए नुकसान की बात मानी और कहा कि गैप दूर करने हर प्रकार के प्रयास किए जाएंगे।

भारास विधायक दल के उपनेता टी. हरीश राव व केटीआर के बीच अंदरूनी तौर पर आधिपत्य की लड़ाई को लेकर हो रहे प्रचारों को खारिज करते हुए केटीआर ने स्पष्ट किया कि बीआरएस में कोई आधिपत्य की लड़ाई नहीं है। सब केसीआर के नेतृत्व में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे केवल कार्यकारी अध्यक्ष हैं। पार्टी प्रमुख केसीआर जो कहेंगे, एक सैनिक की भांति निभाते जाएंगे। उन्होंने कहा कि वे ऑलराउंडर हैं और आयु से अधिक पदों का अनुभव कर चुके हैं। अब कोई अधिक आशा भी नहीं है।

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तेलंगाना आंदोलन से सत्ता और विपक्ष तक का अनुभव

केटीआर ने आगे कहा कि बीआरएस के महासचिव आर.एस. प्रवीण कुमार की पार्टी में जो प्रमुखता है, वहीं प्रमुखता उनकी (केटीआर) है। उन्होंने बीआरएस की पीठ थपथपाते हुए कहा कि बीआरएस ने तीन महत्वपूर्ण भूमिकाएं पूरी सफलता के साथ निभाई हैं। सर्वप्रथम तेलंगाना आंदोलन में सफलता, 10 साल तक सत्तापक्ष व ढाई साल विपक्ष, यह तीनों भूमिकाएं निभाने में पार्टी सफल रही है।

केटीआर ने बीआरएस को संस्थागत तौर पर मजबूत बनाने पर जोर देते हुए कहा कि अगले मई-जून में बीआरएस का सदस्यता अभियान प्रारंभ होगा। प्रशिक्षण कक्षाएं भी आयोजित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि 2027 में जनसमस्याओं को लेकर राज्यभर में पदयात्रा करेंगे। उन्होंने माना कि बीआरएस के नेता के सीधे कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क व्यवस्था की कमी पार्टी में रही है और चुनाव में हार का यह भी प्रमुख कारण रहा है। उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं से सीधे कनेक्ट होने की जरूरत पर बल दिया और कहा कि तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) में कुछ अच्छी परंपराएं हैं, उनसे बीआरएस सीखेगी। उन्होंने पूर्व केसीआर शासन के दौरान पार्टी और प्रजा के बीच दूरियां बढ़ने की बात मानी और कहा कि अब यह गैप दूर करने के पूरे प्रयास किए जाएंगे।

केटीआर ने कहा कि तेलंगाना के करीमनगर, निजामाबाद व आदिलाबाद जैसे जिलों से भारी संख्या में कर्मचारी गल्फ देशों में कार्य कर रहे हैं, परंतु पूर्व बीआरएस सरकार गल्फ नीति नहीं ला पाई थी। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि देश में सारा विकास केवल एक नेता के कारण ही हो रहा है, यह विचार जनता पर थोपना ठीक नहीं है। उन्होंने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय की ओर इशारा करते हुए कहा कि करीमनगर कॉर्पोरेशन जीतने के बाद केंद्र सरकार से करीमनगर के लिए भारी निधियां लाने का दम भर रहे नेता ने वादा अब तक नहीं निभाया है।

कविता के बर्ताव से परिवार दु:खी

तेलंगाना जागृति की संस्थापक व पूर्व विधान परिषद सदस्य कल्वाकुंट्ला कविता की नई राजनीतिक पार्टी के गठन को लेकर भारत राष्ट्र समिति (भारास) कार्यकारी अध्यक्ष व पूर्व मंत्री के. तारक रामाराव ने कहा कि जनता को मद्देनजर रखकर राजनीतिक पार्टी बनाना कोई गलत नहीं है। कोई भी राजनीतिक पार्टी का गठन कर सकता है परंतु जनादर न मिले तो सब सारा व्यर्थ हो जाता है।

केटीआर ने उनकी बहन के. कविता के बर्ताव को लेकर कहा कि जिस प्रकार का बर्ताव उनका रहा है, उससे सारा परिवार मानसिक तौर पर दुःखी हो रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चे अभिभावकों को खुश न रख सकें तो परवाह नहीं परंतु उन्हें रुलाकर आंखों से आंसू न टपकाएं तो बेहतर होता है। उन्होंने कहा कि राजनीति आज है कल नहीं रहेगी, परंतु दूसरों को दुःख पहुँचाना ठीक नहीं है। जेल जाकर लौटने वाले मुख्यमंत्री बनते हैं, इस धारणा को गलत ठहराते हुए केटीआर ने संयुक्त आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्रियों का उदाहरण दिया और कहा कि एपी में कितने मुख्यमंत्री ऐसे हुए, जो जेल जाने के बाद मुख्यमंत्री बने। एक या दो नेताओं के मुख्यमंत्री बनने को उदाहरण के तौर पर नहीं लिया जा सकता है।

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