चुनाव सुधार के लिए चले अभियान : किशन रेड्डी

हैदराबाद, केंद्रीय कोयला, खान मंत्री व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी ने एक देश-एक चुनाव को अभियान के तौर पर लेने का सभी से आह्वान किया और कहा कि देश में हमेशा कहीं न कहीं चुनाव होने के कारण विकास में कई बाधाएं उत्पन्न होती हैं। इसलिए इस विषय पर जनता को जागरूक करने देशभर में चर्चाओं की आवश्यकता है।

एक देश – एक चुनाव को लेकर जनसमर्थन जुटाने के उद्देश्य से देशभर में भाजपा के चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के अंतर्गत तेलंगाना भाजपा के तत्वावधान में नगर के होटल कात्रिया टावर्स में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने कहा कि देश में कोई भी परिवर्तन, सुधार या संशोधन लाना हो तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार से ही संभव है।

एक देश-एक चुनाव: विकास और राजनीतिक सुधार के लिए जरूरी

किशन रेड्डी ने मोदी सरकार द्वारा त्रिपल तलाक रद्द किए जाने, कश्मीर से धारा 370 हटाने, सीएए कानून लाने जैसे फैसलों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि देश में हर तीन – चार महीने में किसी न किसी राज्य में चुनाव होते हैं जिसके चलते केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी निभाने में परेशानी होती है क्योंकि जहां चुनाव हों, वहां जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि असम में चुनाव थे वहां की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी, फिर जम्मू कश्मीर के चुनाव, महाराष्ट्र, दिल्ली। अब कैसे केंद्रीय मंत्री काम कर पाएंगे।

प्रगति कार्य देखेंगे या चुनाव में ही फंसे रहेंगे। उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र बार- बार होने वाले चुनाव के चलते फंसा रहता है। टीचरों को चुनाव में ड्यूटी दी जाती है। चुनाव से 3 महीने पहले ट्रेनिंग के लिए भेज दिया जाता है ऐसे में वे कक्षा में विद्यार्थियों को क्या पढ़ा पाएंगे। किशन रेड्डी ने आगे कहा कि देश में परिवर्तन की जरूरत है और वन नेशन- वन एलेक्शन से परिवर्तन होगा।

एक देश-एक चुनाव से राजनीति और विकास में बदलाव

इसके लिए सभी को साथ देना होगा। उन्होंने कहा कि 5 साल में एक बार चुनाव होंगे तो केंद्रीय मंत्रीयों सहित प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक आदि सभी शिक्षा, विकास व कल्याणकारी कार्यों पर ध्यान दे पाएंगे।भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल ने एक देश – एक चुनाव को देशहित में बताया और कहा कि 5 साल में यदि चुनाव होगा तो राजनीति कम और विकास अधिक होगा। एक बार हो रहे चुनाव में विकास चुनावी एजेंडा बनेगा। परफार्मेंस के आधार पर चुनाव होगा।

एक देश-एक चुनाव: विकास और राजनीतिक सुधार के लिए जरूरी

प्रधानमंत्री तो कहते हैं 5 साल में एक बार चुनाव होने से नए लोगों को राजनीति में अवसर मिलेगा, बल्कि परिवारवाद की राजनीति समाप्त होने की संभावना होगी। उन्होंने कहा कि देश में मतदाताओं का पोलिंग प्रतिशत केवल 60 प्रतिशत रह गया है। 40 प्रतिशत मतदाता तो वोट डालते ही नहीं हैं। भारत के लोकतंत्र में इन 40 प्रतिशत की भागीदारी है ही नहीं, क्योंकि बार- बार चुनाव में वोट डालकर ऊब चुके मतदाता निराश हैं। उन्होंने कहा कि यदि 5 साल में एक बार चुनाव होंगे तो यह निराशा संभवत समाप्त हो जाएगी।

किशन रेड्डी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय कहा करते थे कि सिद्धांत विहीन मतदान से सिद्धांत विहीन राजनीति का जन्म होता है और जब जातिवाद पर वोट डाले जाएंगे तो उससे पैदा होने वाला सिस्टम भी जातिवादी ही होगा। उन्होंने कहा कि पैसा लेकर वोट डाला जाएगा तो उससे पैदा होने वाला नेता भी भ्रष्ट ही होगा। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्तिगत हितों के लिए वोट दिया गया तो चुना गया नेता भी व्यक्तिगत हितों की ही सोचेगा।

एक देश-एक चुनाव से समाज और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

किशन रेड्डी ने कहा कि आप वोट कैसे दे रहे हैं आपका वोट देने का पैटर्न क्या है, इस पर सोंचना होगा। उन्होंने कहा कि मतदाता को बुद्धिमान होना पड़ेगा। सुनील बंसल ने बताया कि बार – बार चुनाव होना पर्यावरण के लिए चुनौती बन चुका है क्योंकि चुनाव में 60 हजार करोड़ टन कागज का उपयोग होता है वहीं बड़ी मात्रा में प्लास्टिक भी इस्तेमाल होता है। यदि 5 सालों में एक बार चुनाव होंगे तो इनकी बचत होगी और हम पर्यावरण को भी बचा पाएंगे। उन्होंने कहा कि एक देश- एक चुनाव से राजनीति पक्का बदल जाएगी।

वर्तमान जो व्यवस्था है वह भी बदल जाएगी। उन्होंने कहा कि बार – बार चुनाव से देश की राजनीति पर प्रभाव पड़ रहा है और उस राजनीति का प्रभाव समाज पर पड़ने लगा है। हमारा समाज जातियों में बंटता हुआ दिखाई देने लगा है। वर्तमान समय राजनीतिक वैमन्स्यता सामाजिक वैमनस्यता में परिवर्तित होने लगी है। इस राजनीति से समाज के भीतर वैमन्स्यता का भाव आ चुका है।

बार- बार चुनाव के कारण समाज के बीच दूरियां बढ चुकी हैं। यदि 5 साल में एक बार चुनाव होंगे तो सामाजिक वैमनस्यता को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि अर्थशास्त्रा कहते हैं कि अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जाए तो एक बार चुनाव से 1.5 प्रतिशत जीडीपी में वृद्धि होगी। अवसर पर एक देश- एक चुनाव के राष्ट्रीय समन्वयक अनिल के. एंटोनी, राज्य विधान परिषद के पूर्व सदस्य व एक चुनाव प्रदेश समन्वयक एन. रामचंदर राव के अलावा भारी संख्या में बुद्धिजीवी, प्रबुद्ध उपस्थित थे।

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