दल बदलू विधायकों के मामले पर सत्ता पक्ष व विपक्ष में नोक झोंक
हैदराबाद, विधानसभा में दल बदलू विधायकों के मामले पर सत्ता पक्ष और विफक्ष के बीच जमकर नोक झोंक हुई। विधानसभा में विधाई मामलों के मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने मामले को सदन के ध्यान में लाते हुए कहा कि सदन के कुछ सदस्य इसका बार-बार उल्लेख कर रहे हैं, जबकि सदन में मामले पर चर्चा करने की आवश्यकता नहीं है। यह मामला सदन कि परिधि में नहीं आता।
यह जानते हुए भी कुछ सदस्य इसका उल्लेख कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष एक ट्रिब्यूनल प्राधिकरण है और ट्रिब्यूनल ने मामले पर अपना फैसला सुना दिया है, इस कारण इसे सदन में प्रस्तावित करना अनुचित है। ट्रिब्यूनल ने अपना फैसला सहज न्याय सूत्रों व निर्धारित नियमों के अनुसार लिया, इसलिए मामले पर चर्चा करने की आवश्यकता नहीं है। यदि कोई इस फैसले से संतुष्ट नहीं है, तो न्याय पाने के लिए अन्य रास्ते हैं, लेकिन इस प्रकार सदन में मामले पर चर्चा नहीं की जा सकती।
इस पर भारास के पूर्व मंत्री के. तारक रामाराव ने कहा कि इसी सदन में बीसी आरक्षण को लेकर उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय द्वारा दिये गये फैसले पर चर्चा की गयी, तब इस दल बदलने वाले विधायकों के मामले पर दिये गये फैसले पर चर्चा क्यों नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि इसके पूर्व स्वयं मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और कांग्रेस सांसद व लोकसभा में विपक्षी नेता राहुल गांधी ने कहा था कि विधायक पार्टी बदलने के साथ अयोग्य साबित हो जाते हैं, लेकिन यहाँ उनके बयान के विपरीत फैसला सुनाया गया।
इस पर विधानसभा अध्यक्ष गड्डम प्रसाद राव ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि मंत्री द्वारा नाम न लिए जाने के बावजूद उन्होंने केटीआर को अपनी बात रखने का अवसर दिया, उनकी राय के अनुसार मामले पर स्पष्टीकरण देने की आवश्यकता नहीं है।
असंसदीय भाषा को लेकर दोनों पक्षों में टकराव
विधानसभा में असंसदीय भाषा के उपयोग को लेकर दोनों पक्षों के सदस्यों के बीच टकराव की स्थति उत्पन्न हो गयी। राज्यपाल के अभिभाषण के धन्यावाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के सचेतक आदि श्रीनिवास ने कहा कि केटीआर ने कल सदन में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के खिलाफ असंसदीय भाषा का उपयोग कर उनका अपमान किया। उन्होंने केटीआर से शब्द वापस लेने की माँग की। उन्होंने कहा कि केटीआर दस वर्ष मंत्री रह चुके हैं, इसके बावजूद भी वह सदन में असंसदीय भाषा का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने केटीआर से शब्द वापस लेने अथवा सभा अध्यक्ष से रिकॉर्ड की जाँच कर असंसदिय टिप्पणियों को रिकार्ड से हटाने का आग्रह किया।
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इस पर सभा अध्यक्ष की अनुमति से अपनी बात रखते हुए केटीआर ने कहा कि उन्होंने कोई असंसदीय भाषा का प्रयोग नहीं किया, जिस प्रकार मुख्यमंत्री ने बात की, उसी प्रकार से बात की है, उन्होंने कहा कि क्या मैंने मुख्यमंत्री को भड़वा कहा है, बली देवता कहा है, यदि मैंने ऐसा कहा है, तो मुख्यमंत्री की टिप्पणियों के साथ उनकी टिप्पणियाँ रहनी चाहिए। इस दौरान कांग्रेस विधायक टी. राम मोहन ने केटीआर का विरोध करते हुए सीट पर से उठकर वेल में जाने का प्रयास किया, लेकिन अन्य कांग्रेसी विधायकों ने उन्हें रोक लिया।
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