चैती छठ भगवान सूर्य और छठी मैया को समर्पित पर्व
चैती छठ पर्व तिथियाँ
- 22 मार्च, रविवार को नहाय खाय
- 23 मार्च, सोमवार को चैती छठ खरना
- 24 मार्च, मंगलवार को चैती छठ पर्व
- 25 मार्च, बुधवार को चैती छठ परना
चैती छठ का पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होता है और इसका समापन सप्तमी तिथि को होता है। विशेष रूप से यह त्योहार झारखंड, बिहार और उत्तरप्रदेश में मनाया जाता है। इसमें छठी मैया व सूर्य भगवान की पूजा की जाती है। यह पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है। इस व्रत को सुहागिन महिलाएं पूरे श्रद्धा-भाव से करती हैं।
छठ पर्व के पहले दिन नहाय-खाय होता है। इस दिन व्रती द्वारा पवित्र नदी व तालाब में स्नान किया जाता है। सफाई और शुद्धता का ध्यान रखते हुए, कद्दू की सब्जी, चावल और चने की दाल बनाई जाती है। इस दिन व्रती इसी सात्विक भोजन को ग्रहण करती हैं। मान्यता है कि इससे तन-मन शुद्ध होता है। छठ पूजा के दूसरे दिन खरना होता है।
इस दिन शाम को सूर्य भगवान की पूजा करने का विधान है। इस दिन शुद्धता के साथ गुड़ की खीर, फल आदि का सेवन करने का विधान है, जिसके पश्चात व्रती का कठिन निर्जला व्रत शुरू होता है। चैती छठ का पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन शाम को व्रती अपने परिवार के साथ पवित्र नदी या तालाब के किनारे सूर्यदेव को अर्घ्य देते हैं।
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भोग में फल, ठेकुआ, पूरी आदि का विशेष महत्व होता है। 36 घंटे तक चलने वाला निर्जला व्रत परना के दिन समाप्त होता है। इस दिन व्रती महिलाएं पवित्र नदी या तालाब के किनारे उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देती हैं। सूर्यदेव और छठी मैया का पूजन करने के बाद व्रत का पारण करने का विधान है। मान्यता है कि यह मनोकामना पूरी होने का पर्व होता है।
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