क्रिसमस का उपहार
क्रिसमस के दिन करीब थे। सभी अपने रिश्तेदारों के लिए अच्छे कपड़े और उपहार खरीद रहे थे। इन दिनों मैरी बहुत उदास थी। उसके मन में भी अच्छे कपड़े पहन कर शहर घूमने की इच्छा थी परंतु यह सब होता कैसे? मैरी के पिता गुजर गए थे। सिर्फ उसकी मां थीं, जो सिलाई-कढ़ाई करके घर का खर्च बड़ी मुश्किल से चलाती थीं। मैरी की मां बहुत दिनें से बीमार थीं। काफी रूपए उनके इलाज में खर्च हो चुके थे। अब उनके पास थोड़े रूपए बचे थे। मैरी उन रूपयों से कुछ अगरबत्तियां खरीद लाई, फिर वह यह सोच अगरबत्तियां बेचने घर से निकली कि शायद इन्हीं से कुछ रूपए बच जाएं।
सड़क पर खूब चहल-पहल थी। खिलौने और गिफ्ट की दुकानों पर बहुत भीड़ थी। गिफ्ट की दुकानों पर बच्चों की लंबी कतार थी। सभी बच्चे गिफ्ट खरीदने को आतुर थे। मैरी सड़क के किनारे खड़ी होकर अगरबत्तियां बेचने लगी परंतु उसकी नजर गिफ्ट की एक दुकान पर थी। दुकान के बाहर कांच की अलमारी में सजे उपहार उसे इतनी दूर से भी अच्छी तरह दिखाई पड़ रहे थे। उससे रहा नहीं गया। वह दुकान की ओर चल पड़ी।
अब वह अलमारी में सजे रंग-बिरंगे गिफ्टों को देख रही थी। उसे सांता क्लॉज वाला गिफ्ट बहुत पसंद आया। वह उसे अपनी बीमार मां को उपहार में देना चाहती थी। उसे दुकान में प्रवेश करने से डर लग रहा था क्योंकि उसकी कमीज फटी हुई थी और उसके पैरों में टूटी चप्पलें थीं, फिर भी वह हिम्मत कर भीतर चली गई। दुकानदार बहुत व्यस्त थे। रंगीन नरम कपड़े पहने हुए बच्चे उनसे उपहार खरीद रहे थे। दुकानदार अपने नौकरों से कह रहे थे, उस हीरे वाले उपहार को ढूंढ़ो।
मैरी ने खुद उठाया हीरे वाला उपहार और दुकानदार के पास पहुंची
वह हमारे लिए बहुत जरूरी है वरना हमें बहुत घाटा होगा। यह सुनते ही कुछ नौकर इधर-उधर हीरे वाले उपहार को ढूंढ़ने लगे।
मैरी को देखते ही दुकानदार ने पूछा, हां, बताओ तुम्हें क्या चाहिए? सांता क्लॉज। मैरी धीरे से बोली। अच्छा, तो वह सांता क्लॉज….। कहते हुए दुकानदार सांता क्लॉज वाला डिब्बे लेकर आया। यह लीजिए आपका उपहार। कीमत सिर्फ दो सौ रूपए। दुकानदार ने उसे डिब्बा देते हुए कहा।
दो सौ रूपए। मैरी चौंकी क्योंकि उसके पास तो सिर्फ पचास ही रूपए थे। दुकानदार समझ गए कि इस लड़की के पास पूरे पैसे नहीं हैं। उन्होंने रूखे स्वर में कहा, जब खरीदने की औकात नहीं थी तो यहां हमारा समय बरबाद करने क्यें आ गई हो? अब जाओ यहां से। मैरी की आंखों से आंसू निकल आए। सिर झुकाए वह वहां से बाहर निकल आई। तभी उसे एक हीरे जैसी छोटी-सी चीज जमीन पर पड़ी दिखाई दी। उसे याद आया कि दुकानदार अपने नौकरों से हीरे वाला उपहार ढूंढ़ने को कह रहे थे। उसने हीरे वाला उपहार उठा लिया। उसे लेकर वह दुकानदार के पास गई।
मैरी को मिला क्रिसमस का खास उपहार
हां……हां…… यही तो वह कीमती उपहार है जो खो गया था। दुकानदार ने उसे देखते ही कहा, तुमने मुझे बरबाद होने से बचा लिया। यह लो तुम्हारा इनाम। इतना कह कर दुकानदार ने कुछ रूपए मैरी को देने चाहे। यह तो मेरा फर्ज था। मैं मेहनत से धन कमाना चाहती हूं। इस तरह नहीं। कह कर मैरी जाने को हुई। दुकानदार सोचने लगा कि मैंने इसे बुरा-भला कहा, फिर भी इसने ईमानदारी दिखाई। गरीब है मगर पैसे लेने से इंकार कर रही है। उन्होंने उसे रूकने को कहा।
फिर मैरी के पास जा कर बोले, मुझे माफ कर दो बेटी, मैंने तुम्हारी गरीबी का मजाक उड़ाया। तुम यह इनाम न लेना चाहो न लो कोई बात नहीं। मुझे तुम जैसी एक ईमानदार सहायक की जरूरत है। क्या तुम कल से इस दुकान में नौकरी करोगी? मैरी की आंखें भर आईं। सिर हिला कर वह चलने को हुई तो दुकानदार ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, तुम अपना उपहार भूल गई। यह लो सांता क्लॉज और एक हजार रूपए मिठाई खाने और कपड़े खरीदने के लिए। वह कुछ बोल पाती, इससे पहले ही दुकानदार बोले, यह इनाम नहीं है। यह तो मेरी ओर से तुम्हें क्रिसमस का उपहार है जैसे एक पिता अपनी प्यारी बेटी को देता है। मैरी की आंखों से आंसू गिर पड़े। दुकानदार की आंखें भी नम थीं।
-नरेन्द्र देवांगन
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