सिनेमा हॉल मालिकों को मिली सुप्रीम राहत

नयी दिल्ली, उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को तेलंगाना उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें राज्य सरकार को फिल्म की रिलीज तिथि से कम से कम 90 दिन पहले टिकटों की कीमतों में किसी भी प्रकार की वृद्धि की सूचना देने का निर्देश दिया गया था।

न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की खंडपीठ ने फिल्म निर्माता मैत्री मूवी मेकर्स की याचिका पर तेलंगाना सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया।

उच्चतम न्यायालय निर्माता की एक अपील पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें तेलंगाना उच्च न्यायालय की खंडपीठ के एक आदेश को चुनौती दी गई है। तेलंगाना उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एकल-न्यायाधीश पीठ के अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।

तेलंगाना सिनेमा विनियमन अधिनियम 1955

एकल न्यायाधीश पीठ ने 20 जनवरी को राज्य सरकार को तेलंगाना सिनेमा विनियमन अधिनियम 1955 की धारा सात ए के तहत फिल्म की रिलीज तिथि से 90 दिन पहले टिकटों की कीमतों में वृद्धि पर कोई भी निर्णय लोगों के सामने रखने का निर्देश दिया था। यह विवाद गृह विभाग द्वारा आठ जनवरी को जारी एक कार्यालयी परिपत्र से उत्पन्न हुआ, जिसमें चिरंजीवी अभिनीत फिल्म ‘माना शंकरा वर प्रसाद गारू’ की कीमत में वृद्धि की अनुमति दी गई थी। यह फिल्म 12 जनवरी को रिलीज होने वाली थी।

इस कार्यालयी परिपत्र को अधिवक्ता दाचेपल्ली चंद्र बाबू ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उन्होंने तर्क दिया था कि फिल्म टिकटों की कीमतों में इस तरह की अचानक वृद्धि जनता को तेलंगाना सिनेमा विनियमन अधिनियम 1955 की धारा सात ए के तहत समीक्षा या अभ्यावेदन दर्ज करने के उनके अधिकार से वंचित करती है।

उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश ने निर्देश दिया था कि यदि सरकार भविष्य में किसी भी फिल्म के टिकट की कीमत में वृद्धि की अनुमति देने का प्रस्ताव करती है, तो फिल्म की रिलीज से कम से कम 90 दिन पहले इस निर्णय को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। (भाषा)

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