भू-संबंधी मामलों पर निर्णय का अधिकार सिविल कोर्ट को : तेलंगाना हाईकोर्ट

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि भू-संबंधी विवादों पर फैसला लेने का अधिकार सिविल कोर्ट के पास है और राजस्व अधिकारी इन मामलों का फैसला नहीं कर सकते हैं। अदालत ने कहा कि गच्ची बावली में विवादित भूमि पर संरक्षित किराएदारों का अधिकार है। अदालत ने इस मामले के संबंध में वर्ष 2013 के दौरान आरडीओ द्वारा जारी आदेश का समर्थन किया, वहीं 2016 में उप-ज़िलाधीश द्वारा जारी आदेश को रद्द करते हुए 40 याचिकाओं पर सुनवाई पूर्ण की।

आरडीओ ने 2013 के दौरान आदेश जारी करते हुए बताया कि याचिकाकर्ताओं के पूर्वज कानून के तहत संरक्षित किराएदार थे और आंध्र-प्रदेश (तेलंगाना क्षेत्र) किराएदारी और कृषि भूमि अधिनियम के तहत स्वामित्व प्रमाण-पत्र के हकदार थे। यह कहा गया कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि किराएदारी के अधिकार कानूनी रूप से अधिनियम की धारा 19 के तहत किसी और को हस्तांतरित किए गए थे।

भूमि विवाद में काश्तकारों को मालिकाना हक मिलने का रास्ता साफ

काश्तकारों ने उप-ज़िलाधीश द्वारा वर्ष 2016 के दौरान जारी आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। इसके संदर्भ में दायर याचिकाओं पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस सी.वी. भास्कर रेड्डी ने सुनवाई की। लम्बी दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश 156 पन्नों का एक नया फैसला सुनाया कि काश्तकारों का जमीन पर अधिकार है। उन्होंने कहा कि उप-ज़िलाधीश द्वारा अवकाश पर रहते हुए लम्बे आदेश जारी करना जल्दबाजी में लिया गया फैसला था और इससे संदेह उत्पन्न होता है। न्यायाधीश ने कहा कि उप-ज़िलाधीश ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया और कानूनी मामलों में हस्तक्षेप किया।

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न्यायाधीश ने कहा कि आरडीओ काश्तकारी अधिनियम के तहत सक्षम प्राधिकारी है और उन्होंने याचिकाकर्ताओं के मालिकाना हक निर्धारण करने में सही ढंग से कार्य किया। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि केवल सिविल अदालतें ही निजी पक्षों के बिक्री विलेखों (सेल डीडी) से संबंधित मुद्दों पर निर्णय दे सकती है और यह अधिकार राजस्व अधिकारियों को नहीं है। इस फैसले के साथ दायर याचिकाओं को अनुमति देते हुए सुनवाई पूर्ण करने की घोषणा की।

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