पालमूरू रंगारेड्डी परियोजना पर सीएम रेवंत रेड्डी का सख्त रुख
हैदराबाद, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार से पालमुरू रंगारेड्डी लिफ्ट परियोजना के लिए पहले चरण में 45 टीएमसी और दूसरे चरण में और 45 टीएमसी कृष्णा जल के इस्तेमाल की अनुमति किसी भी हाल में मिलनी ही चाहिए। अगर अनुमति नहीं मिलती है, तो हम इस परियोजना को श्रीशैलम से नहीं बल्कि पुरानी योजना के अनुसार जुराला से ही निर्मित करेंगे और प्रतिदिन दो टीएमसी के हिसाब से 70 टीएमसी पानी लिफ्ट करेंगे। उन्होंने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि पानी लिफ्ट करने से रोकने का दम किसमें है हम भी देखेंगे।
जगन मोहन रेड्डी, चंद्रबाबू बू नायडू या नरेंद्र मोदी इनमें से कौन आयेगा। उन्होंने कहा कि राजनीति अलग है और राज्य के हित अलग हैं। राज्य के हितों की रक्षा के लिए सभी दलों को मिलकर एक साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि केसीआर को आमंत्रित करने पर भी वे सदन में नहीं आए। रेवंत ने आज विधानसभा में कृष्णा जल-परियोजनाओं पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कृष्णा नदी जल मुद्दे को लेकर राज्य के विभाजन के बाद से पानी लिफ्ट करने से रोकने का दम किसमें है हम भी देखेंगे। जगन मोहन रेड्डी, चंद्रबाबू नायुडू या नरेंद्र मोदी इनमें से कौन आयेगा। राजनीति अलग है और राज्य के हित अलग हैं। राज्य के हितों की रक्षा के लिए सभी दलों को मिलकर एक साथ आगे बढ़ना चाहिए।
राज्य के विकास, निधियाँ व विकास के मामले में हम सभी एक
हम राज्य की जनता व किसानों के हितों रक्षा के लिए लड़ेंगे, मरेंगे, लेकिन किसी के आगे सिर नहीं झुकायेंगे , पिछले बीआरएस सरकार द्वारा उठाये गये कदमों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने दोनों तेलुगु राज्यों के बीच कृष्णा-गोदावरी जल आवंटन को लेकर जारी विवादों, एपी सरकार द्वारा अवैध रूप से निर्मित किये जा रहे परियोजनाओं को रोकने के लिए कांग्रेस सरकार आक्रामक मुद्रा में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा उठाये गये कदमों आदि को लेकर लगभग दो घंटे तक बात की। उन्होंने कहा कि हमारे मंत्री व सदस्यों के बीच मुद्दों पर मतभेद होने पर भी राज्य के विकास, निधियाँ व विकास के मामले में हम सभी एक हैं। हम राज्य की जनता व किसानों के हितों रक्षा के लिए लड़ेंगे, मरेंगे, लेकिन किसी के आगे सिर नहीं झुकायेंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य का विकास और किसानों के कल्याण के लिए वे पूरी कटिबद्धता से काम कर रहे हैं।
इस संबंध में अगर उनकी ईमानदारी पर कोई शक करेंगा, तो हम उसका चमड़ी उधेड़ देंगे और जुबान खींच लेंगे। रेवंत ने भगवान की शपथ लेते हुए आश्वासन दिया कि जब तक वे कुर्सी पर बैठे हैं, तेलंगाना की जनता के साथ कोई अन्याय नहीं होने देंगे। उन्होंने पालामूरू रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई परियोजना की जानकारी देते हुए कहा कि इस परियोजना की अनुमति संयुक्त आंध्र प्रदेश में तेलंगाना कांग्रेस व बीजेपी नेताओं ने काफी प्रयास करने के बाद हासिल की।
किसके कपड़े कौन उतारेगा या किसकी चमड़ी कौन उधेड़ेगा
तत्कालीन पालमूरू के सांसद रहे केसीआर ने इस परियोजना के लिए कोई प्रयास नहीं किया। जुराला जलाशय से प्रतिदिन दो टीएमसी पानी लिफ्ट करने के लिए तत्कालीन राज्य सरकार ने अनुमति दी थी। अलग राज्य होने के बाद सत्तासीन हुए केसीआर ने इसे जुराला से श्रीशैलम को स्थानांतरित किया। उन्होंने कहा कि जुराला के पास निर्माण किया जाता, तो पंपो के लिए 5 15 हजार करोड़ का खर्च आता था, लेकिन श्रीशैलम को स्थानांतरित करने से अनुमानित व्यय 10 हजार करोड़ तक बढ़ गया। संयुक्त। आंध्र प्रदेश में तत्कालीन सरकार ने तेलंगाना क्षेत्र में कृष्णा बेसिन में कल्वाकुर्ती, नेट्टेमपाडु, पालमूरू रंगारेड्डी, दिंडी, मक्तल नारायणपेट, कोडंगल, कोइलसागर आदि परियोजनाएं शुरू कीं। राज्य के विभाजन के बाद सत्तासीन हुई केसीआर सरकार ने इन परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के बजाय बीच में छोड़ दिया।
संयुक्त आंध्र प्रदेश में तेलंगाना के लिए कृष्णा नदी जल में 490 टीएमसी आवंटित किया गया था। लेकिन अलग राज्य होने के बाद केसीआर व हरीश राव ने तेलंगाना को 299 टीएमसी और आंध्र प्रदेश को 512 टीएमसी देने संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर कर राज्य के साथ घोर अन्याय किया। उन्हेंनि आलोचना करते हुए कहा कि केसीआर को कृष्णा जल मुद्दे पर जनसभाओं में नहीं बल्कि असेंबली में चर्चा करने आमंत्रित किया गया था लेकिन वे नहीं आये। उन्होंने आरोप लगाया कि केसीआर ने अपने दस वर्षों की शासन काल के दौरान पड़ोसी आंध्र-प्रदेश को कृष्णा नदी जल अवैध रूप में ले जाने में पूरा सहयोग दे कर राज्य के साथ अन्याय किया। उन्होंने कहा कि 40 साल का राजनीतिक अनुभव रखने का दावा करने वाले मुख्य विपक्षी नेता केसीआर पिछले दो सालों से सदन में नहीं आ रहे हैं।
हमने बार-बार आने का आग्रह भी किया फिर भी वे आने से कतरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी द्वारा हमेशा कपड़े उतारने और चमड़ी उधेड़ने की धमकियाँ दी जाती रही है। यदि केसीआर सदन में आ कर चर्चा में भाग लेते, तो जनता को पता चल जाता किसके कपड़े कौन उतारेगा या किसकी चमड़ी कौन उधेड़ेगा।
सिंचाई परियोजनाएँ सभी सरकारों के लिए एटीम बन गयी
इससे पूर्व चर्चा में भाग लेते हुए बीजेपी सदस्य पायल शंकर ने कहा कि सरकार एक ओर राज्य के आर्थिक संकट से गुजरने की बात कह रही है, वहीं दूसरी ओर सभी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने का वादा भी कर रही है। सरकार को यह बताना चाहिए कि निधियां कहां से लायेंगे। उन्होंने कहा कि पालामूरू रंगारेड्डी परियोजना के लिए कुराला से पानी का लिफ्ट करना बेहतर होगा, क्योंकि वहां से पानी ग्रैविटी से ले जा सकते हैं, लेकिन पिछली सरकार ने इसे श्रीशैलम स्थानांतरित कर पालामूरू की जनता के साथ अन्याय किया।
मजलिस नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने कहा कि सिंचाई परियोजनाएँ सभी सरकारों के लिए एटीम बन गयी हैं। सिंचाई परियोजनाओं से जनता को नहीं बल्कि ठेकेदारों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने आगे सवाल किया कि सिंचाई परियोजनाओं को लेकर सत्ता पक्ष और मुख्य विपक्ष एक दूसरे के खिलाफ आरोप प्रत्यारोप लगाने से राज्य के लिए क्या लाभ होगा। उन्होंने कहा कि राज्य के हितों के लिए भी पक्षों को एक साथ मिल कर काम करना चाहिए।
चर्चा का सीएम द्वारा जवाब दिये जाने के बाद विधानसभा ने केंद्र सरकार से सिंचाई व पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए पालमूरु रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई परियोजना को 90 टीएमसी पानी के साथ सभी अनुमतियां देने की अपील करते हुए प्रस्ताव पारित किया। साथ ही दोनों तेलुगु राज्यों के बीच अंतरराज्यीय जल विवादों का परिष्कार करते हुए आंध्र प्रदेश की प्रस्तावित पोलावरर्म बंकाचेर्ला लिंक परियोजना, पोलावरम नल्लमल सागर लिंक परियोजना या और भी किसी रूप में यदि गोदावरी जल ले जाने के लिए किसी प्रकार की अनुमतियाँ नहीं देने के लिए भी कहा गया है। प्रस्ताव पारित करने के बाद सदन की कार्यवाही आगामी सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गयी।
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