हर परिस्थिति को प्रभु का प्रसाद मानें : ललितप्रभजी
हैदराबाद, चिंता, तनाव और अवसाद भरी सौ साल की जिंदगी जीने की बजाय आनंद भरी दस साल की जिंदगी जीना अति उत्तम है। रोज-रोज न तो मिठाइयाँ खाई जा सकती हैं और न ही खिलाई जा सकती हैं, पर जीवन को तो हमेशा के लिए अवश्य मीठा बनाया जा सकता है। यह तो व्यक्ति पर निर्भर है कि वह खटास भरी जिंदगी जिए या मिठास भरी। अगर हम बुरे वक्त को याद करते रहेंगे, तो दुःखी हो जाएँगे और वक्त का सदुपयोग करना शुरू कर देंगे, तो सुखी हो जाएँगे।
भगवान रोज धरती पर से एक लाख लोगों को ऊपर उठाते हैं, पर उसमें हमारा नंबर नहीं लगता। वह सबको भूखा उठाता है, पर किसी को भूखा सुलाता नहीं है। हमें हमारे भाग्य से ज्यादा देता है, इसलिए सुबह उठकर उससे शिकायत या याचना करने की बजाय साधुवाद और धन्यवाद दें।
उक्त उद्गार सिकंदराबाद स्थित बांठिया गार्डन में सुरेंदर, अनिल, सुनील बांठिया परिवार, कांतिलाल, उमेश कुमार, सुमित कुमार बागरेचा परिवार और केवलचंद, अमित कुमार, सुमित कुमार मुणोत परिवार द्वारा आयोजित प्रवचन के दौरान जीवन की खुशहाली का राज विषय पर राष्ट्र संत ललितप्रभजी म.सा. ने व्यक्त किये।
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जीवन का प्रसाद: सरल स्वभाव और सकारात्मक सोच
समिति के अध्यक्ष प्रदीप सुराणा एवं महामंत्री अशोक कुमार नाहर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, संतश्री ने कहा कि जीवन परमात्मा की ओर से मिला हुआ बेशकीमती उपहार है। इसे विषाद नहीं, प्रसाद बनाएँ। पूनम का चाँद उगने वाले आसमान में अमावस की कालिमा आ जाती है, अर्थात विषम परिस्थितियाँ सबके जीवन में आती हैं। इसलिए व्यक्ति हर परिस्थिति को प्रभु का प्रसाद माने और बदहाल बनकर जीने की बजाय खुशहाल बनकर जिए।
संतश्री ने कहा कि स्वभाव को थोड़ा सरल बनाने की कोशिश करें। सरल स्वभाव वाले को पड़ोसन भी पसंद करती है और कड़वे स्वभाव वाले को घरवाली भी पसंद नहीं करती। अगर आप गुस्सैल हैं, तो घर वाले आपके घर से बाहर जाने पर खुश होंगे और आप शांत हैं, तो घर वाले आपके आने पर खुश होंगे। सोचो आप घर वालों को किस तरह खुश रखना चाहते हैं।
संतप्रवर ने कहा कि व्यक्ति काला या गोरा, इसमें न तो उसकी कोई खामी है और न ही कोई खासियत। क्योंकि रंग खुद से नहीं, माँ-बाप से प्राप्त होता है। व्यक्ति रंग को तो बदल नहीं सकता, पर जीवन जीने के ढंग को बदलकर अवश्य महान बन सकता है। गोरे लोग दिन में दस बार आइना जरूर देखें और प्रेरणा लें कि जैसा मेरा रंग है, मैं काम भी उतने ही सुंदर करूँगा। और काले लोग दिन में बीस बार आइना देखें और सोचें कि भगवान ने चेहरा सुंदर नहीं दिया तो क्या हुआ, मैं काम बहुत सुंदर करूँगा और दुनिया में महान बनूँगा।
संतप्रवर का संदेश : सरलता और संतोष में सुख
संतप्रवर ने कहा कि बूढ़े लोग घर में इसलिए दुःखी रहते हैं कि वे बेवजह की सिरपच्चियाँ मोल लेते रहते हैं। अगर बड़े बुजुर्ग टोका-टोकी करना बंद कर दें, तो दुनिया में ऐसा कोई भी बेटा-बहू नहीं है, जो माँ-बाप से अलग घर बसाकर रहना चाहे।
संतश्री ने कहा कि हम सोमवार को जन्में, मंगल को स्कूल गए, बुध को बड़े हुए, गुरु को शादी हुई, शुक्र को बच्चे हुए, शनि को बीमार पड़े और रवि को राम-राम सत् हो गए। हमारी इतनी तो छोटी-सी जिंदगी है, फिर हम क्यों व्यर्थ की माथाफोड़ियों में हाथ डालते रहते हैं।
संतप्रवर ने कहा कि इच्छाएँ कम और इच्छाशक्ति बढ़ाने की कोशिश कीजिए। उन्होंने युवाओं से कहा कि आपको जिंदगी में जो पसंद है, उसे हासिल कीजिए और बुजुर्ग लोग जो हासिल है, उसे पसंद करना शुरू कर दें, तो ज्यादा ठीक रहेगा। आपके पास मकान है, बैंक बैलेंस है, गाड़ी है, पत्नी है, फिर भी आप दुःखी हैं और मेरे पास कुछ भी नहीं है, फिर भी मैं सुखी हूँ।
सुख का राज इतना सा है कि अगर हमारे पास केवल झोपड़ी है तो भी खुश रहें, क्योंकि कईयों के पास तो छत भी नहीं है और कभी पाँवों में जूते भी न रहे। संतप्रवर ने कहा कि सदा मुस्कुराते हुए जिएँ। जो मुस्कुराता है, समझना वो जिंदा है, अन्यथा जिंदा आदमी भी मुर्दे से कम नहीं है।
हर परिस्थिति का आनंद लेने की कला सीखें
डॉ. मुनि शांतिप्रियसागरजी म.सा. ने कहा कि अगर हमारा फैसला है कि हर हाल में खुश रहूँगा, तो दुनिया की कोई ताकत हमें नाखुश नहीं कर सकती। आनंद हमारा स्वभाव है, इसलिए खाने को मिल जाए तो खाने का आनंद लें और न मिले तो उपवास का आनंद लें। चलें तो यात्रा का आनंद लें और बैठें तो आनंद की यात्रा करें। शादी हो जाए तो संसार का आनंद लें और न हो तो शील का आनंद लें। व्यक्ति को हर परिस्थिति का आनंद लेने की कला सीख लेनी चाहिए।
जो अपने आपको किसी भी हालत में प्रभावित होने नहीं देता, वह सदा खुश रहता है। म.सा. ने कहा कि जीवन में कब क्या हो जाए, इसका कोई अता-पता नहीं है। जब लक्ष्मी की अवतार सीता को भी अपने बच्चों को जन्म लेने के लिए किसी ऋषि के आश्रम में शरण लेनी पड़ी, तो हमारी क्या बिसात है।
अवसर पर सुरेंद्र बांठिया, अनिल बांठिया, सुनील बांठिया, कांतिलाल बागरेचा, उमेश कुमार बागरेचा, सुमित कुमार बागरेचा, केवलचंद मुणोत, अमित कुमार मुणोत, सुमित कुमार मुणोत, लोक कल्याणकारी चातुर्मास समिति के अध्यक्ष मोतीलाल भलगट, वाइस चेयरमैन उमेश बागरेचा, अध्यक्ष प्रदीप सुराणा, कार्याध्यक्ष अमित मुणोत, प्रधान संयोजक नवरतनमल गुंदेचा, कोषाध्यक्ष मानकचंद्र पोकरणा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विमलचंद मुथा, उपाध्यक्ष कुशल कांकरिया, योगेश गांधी, महावीर चोपड़ा, निर्मल कोठारी, मंत्री प्रवीण सुराणा, चंद्रप्रकाश लोढ़ा, सह मंत्री रोमिल गोलेच्छा, महावीर भलगट, नरसिंहदास तोषनीवाल व अन्य उपस्थित थे।
राष्ट्र संत ललितप्रभजी और चंद्रप्रभजी का विशेष प्रवचन और सत्संग गुरुवार, 2 अक्तूबर को सुबह 9 से 11 बजे तक बांठिया गार्डन, ताड़बंद, सिकंदराबाद में होगा।
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