न्यायालय ने धन शोधन मामले में पत्रकार की जमानत याचिका पर ईडी से मांगा जवाब
नयी दिल्ली, उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कथित वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन मामले में पत्रकार महेश लांगा की जमानत का अनुरोध करने वाली याचिका पर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने जेल में बंद पत्रकार की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से भी कहा कि अगर आवश्यक हो तो ईडी के जवाब पर दो दिन के भीतर प्रत्युत्तर दाखिल करें। शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर के लिए तय की है।
सिब्बल ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा कि पत्रकार लांगा छह मामलों का सामना कर रहे हैं। ईडी के अधिवक्ता ने कहा कि पत्रकार पर जबरन वसूली का आरोप है। उन्होंने इस आधार पर सुनवाई के लिए थोड़ा समय मांगा कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता इस समय मौजूद नहीं हैं। शीर्ष अदालत ने आठ सितंबर को लांगा की जमानत याचिका पर गुजरात सरकार और ईडी से जवाब मांगा था। लांगा की जमानत याचिका पर नोटिस जारी करते हुए पीठ ने पूछा, वह किस तरह का पत्रकार हैं?
पीठ ने सिब्बल से कहा कि पूरे सम्मान के साथ कहना चाहूंगा कि कुछ बहुत ही सच्चे पत्रकार हैं। लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हैं जो स्कूटर पर बैठकर कहते हैं कि हम पत्रकार हैं और वे वास्तव में क्या करते हैं, यह सभी जानते हैं। सिब्बल ने जवाब दिया कि ये सब आरोप हैं। सिब्बल ने कहा कि एक प्राथमिकी में उन्हें अग्रिम ज़मानत मिल जाती है, फिर दूसरी प्राथमिकी दर्ज होती है और फिर से अग्रिम ज़मानत मिल जाती है, लेकिन अब उन पर आयकर चोरी के आरोप में तीसरी प्राथमिकी दर्ज की गई है। उनके ख़िलाफ़ और भी कई आरोप हैं।
गुजरात हाईकोर्ट में खारिज ज़मानत के बाद ईडी की कार्रवाई जारी
सिब्बल ने कहा कि इस मामले की पृष्ठभूमि भी है। गुजरात उच्च न्यायालय ने 31 जुलाई को धन शोधन मामले में लांगा की ज़मानत याचिका इस आधार पर खारिज कर दी थी कि अगर उन्हें ज़मानत पर रिहा किया गया तो अभियोजन पक्ष के मामले पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। ईडी ने 25 फ़रवरी को कहा था कि उसने कथित वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ी धन शोधन जांच के सिलसिले में लांगा को गिरफ़्तार किया है।
लांगा को पहली बार अक्तूबर 2024 में जीएसटी धोखाधड़ी के एक मामले में गिरफ़्तार किया गया था। लांगा के खिलाफ धन शोधन का मामला अहमदाबाद पुलिस द्वारा धोखाधड़ी, आपराधिक गबन, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और कुछ लोगों को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोपों पर दर्ज दो प्राथमिकियों पर आधारित है। (भाषा)
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