केजीबीवी के लिए बेड सप्लाई समझौते का अदालत ने किया समर्थन
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने राज्यभर के केजीबीवी को बंकर बेड सप्लाई करने के लिए सरकार और निजी कंपनियों के बीच हुए समझौते को सही ठहराया है। अदालत ने समझौते को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए फैसला सुनाया है। तेलंगाना स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज स्टील एंड वूडन फर्नीचर मैन्युफैक्चरर्स असोसिएशन और अन्य ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है, जिसमें राज्य सरकार और मफतलाल इंडस्ट्रीज, ट्रूफ्रा टेंडरप्राइजेस और अन्य के बीच केजीबीवी को 45,360 बंकर बेड, गद्दे और तकिए सप्लाई करने के समझौते को चुनौती दी गई है।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस सुरेपल्ली नंदा ने सुनवाई की और हाल ही में इस पर फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि निविदा नियमों के अनुसार, सप्लाई 29 मई, 2025 से 120 दिनों के भीतर पूरी होनी थी, ऐसा न करने पर ठेका रद्द करना होगा और नयी निविदा मंगानी होगी। इसके उलटे, उन्होंने समय सीमा को और 120 दिन बढ़ा दिया और 29 नवंबर को एक पूरक समझौता किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला बिल्डर्स के पक्ष में लिया गया था।
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सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता तेरा रजनीकांत रेड्डी ने कहा कि निविदा में हिस्सा लिए बिना याचिकाकर्ताओं से पूछताछ नहीं की जा सकती है। दलील सुनने के बाद, न्यायाधीश ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि टेंडर के अलॉटमेंट और एग्रीमेंट को लागू करने में गलत इरादे का कोई सबूत नहीं है।
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