राजन्ना सिरसिल्ला जिलाधीश को न्यायालय की फटकार
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने राजन्ना सिरसिल्ला जिलाधीश को जमकर फटकार लगाई और कहा कि ज़िलाधीश को कानून और अदालत की परवाह नहीं है। उनकी नजर में अदालत के प्रति आदर नहीं है। वे कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहे हैं। अदालत में मामला विचाराधीन होने के बावजूद भी अधिकारों का दुरुपयोग कर याचिकाकर्ता के खिलाफ पुलिस में झूठा मामला दर्ज करवाया। कानून संबंधी नियमों का अतिक्रमण किया।
यदि वास्तव में याचिकाकर्ता झूठी जानकारी के आधार पर जनहित याचिका दायर करती है, तो इसे अदालत की नजर में लाना चाहिए और अदालत द्वारा दिए गए आदेश को रद्द करवाने का प्रयास करना चाहिए। आगे कहा कि अदालत की अवमानना का मामला विचाराधीन रहने पर भी आईएएस अधिकारी होते हुए इस प्रकार का कार्य न करना अदालत के अपमान के समान है। पुलिस में झूठा मामला दर्ज करवाकर याचिकाकर्ता के व्यक्तिगत अधिकारों और स्वैच्छिक जीवन और प्राथमिक अधिकारों का हनन किया, जो संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदान किए गए हैं। जिनका वे हनन कर रहे हैं। यह सब कुछ जान-बूझकर किया गया है।
जिलाधीश को फटकार और कविता को मुआवजा आदेश
जिलाधीश की यह कार्रवाई क्षमा योग्य नहीं है। इस प्रकार के अधिकारी जिलाधीश के पद पर बने हुए हैं। जिला प्रशासन में वे एक महत्वपूर्ण व्यक्ति है और ऐसे कार्यों से प्रशासन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, यह कहने में कोई संदेह नहीं है। इस प्रकार ज़िलाधीश को फटकार लगाते हुए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस अनिल कुमार जूकंटी ने गत 23 सितंबर को अपना फैसला सुनाया।
राजन्ना सिरसिल्ला जिला, वेमुलवाड़ा मंडल के अनुपुरम ग्राम निवासी वनपट्ला कविता का घर सरकार ने वर्ष 2004 के दौरान अधिग्रहित कर लिया था। निर्वासित किए गए लोगों को दिए जाने वाले मुआवजा संबंधी सूची में नाम न होने के कारण कविता ने उच्च न्यायालय की शरण ली। इसके पूर्व अदालत ने कविता का नाम निर्वासितों की सूची में शामिल कर उसे कानून के तहत आर्थिक मुआवजा जारी करने के आदेश दिए थे।
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कविता के खिलाफ FIR खारिज और ज़िलाधीश को फटकार
इन आदेशों का पालन न होने पर कविता ने अदालत की अवमानना की याचिका दायर की। इस दौरान आर्थिक मुआवजा देने संबंधी एकल सदस्य न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देते हुए सरकार ने अपील याचिका दायर की। इन दोनों याचिकाओं पर अदालत में सुनवाई जारी है। इस दौरान कविता पर अदालत को गुमराह करने के आदेश प्राप्त करने का आरोप लगाते हुए कविता के खिलाफ सिविल और क्रिमिनल कार्रवाई करने के संबंध में ज़िलाधीश ने वेमुलवाड़ा आरडीओ और तहसीलदार को पत्र लिखा। ज़िलाधीश के पत्र के आधार के तहत तहसीलदार की शिकायत पर वेमुलवाड़ा पुलिस ने कविता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
दर्ज एफआईआर को खारिज करने का आग्रह करते हुए दायर याचिका पर जस्टिस अनिल कुमार जूकंटी ने सुनवाई पूर्ण कर अपना फैसला सुनाया और कहा कि एकल सदस्य न्यायाधीश के आदेश का पालन न करते हुए कविता के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करना कानून का दुरुपयोग है। अदालत को बताए बिना याचिकाकर्ता कविता पर आरोप लगाकर मामला दर्ज करना अमान्य है।
अदालत के आदेश के विरुद्ध कार्रवाई करने का अधिकार ज़िलाधीश को नहीं है। वास्तव में देखा जाए, तो ज़िलाधीश के खिलाफ स्वयं संज्ञान के तहत अदालत की अवहेलना के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता के अनुरोध पर ध्यान देते हुए यह कार्रवाई नहीं की गई। न्यायाधीश ने कविता के खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया और कहा कि केस वापस लेने के लिए अन्य आदेश देने की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही न्यायाधीश ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव से कहा कि इसके बाद इस प्रकार की कार्रवाई न करने के लिए ज़िलाधीश को आदेश दें और फटकार लगाएँ।
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