तेलंगाना में 2.33 प्रतिशत घटा अपराध, महिलाओं के खिलाफ क्राइम में इजाफा : डीजीपी
हैदराबाद, राज्य में वर्ष 2025 के दौरान जहाँ एक ओर आपराधिक मामलों में 2.33 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, वहीं महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले 3.16 प्रतिशत बढ़े, विश्वासघात के मामलों में भी 23.11 प्रतिशत और एनडीपीएस अधिनियम के मामलों ने 30 प्रतिशत की तेजी आयी। इस वर्ष सबसे बड़ी सफलता साइबर अपराध के मामलों की रफ़्तार को रोकने और नक्सली समस्या से निपटने में प्राप्त हुई। देश भर में जहां साइबर अपराध के मामलों में 41 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई वहीं राज्य में साइबर अपराध के मामलों में इस वर्ष 3 प्रतिशत की गिरावट आई है।
इस गिरावट का श्रेय तेलंगाना पुलिस द्वारा साइबर अपराध के खिलाफ जोर-शोर से चलाए जा रहे जागरूकता अभियान को जाता है। इस वर्ष तेलंगाना पुलिस विभाग में पुलिसकर्मियों की आत्महत्या करने की घटनाएं बढ़ी है। इस कारण पुलिस विभाग में चिंता की लहर दौड़ गयी। इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए विशेष तौर पर एक कार्य प्रणाली को अमल में लाया जा रहा है।
राज्य के पुलिस महानिदेशक बी. शिवधर रेड्डी ने तेलंगाना पुलिस मुख्यालय में वार्षिक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बताया कि इस वर्ष राज्य में 2,28, 695 आपराधिक मामले दर्ज किये गये, जबकि पिछले वर्ष 2,34,158 मामले दर्ज किये गये और यह आंकड़े अपराध दर में 2.33 प्रतिशत गिरावट को दर्शाते हैं।
हत्या, बलात्कार और डकैती मामलों में गिरावट, कुछ अपराध बढ़े
पुलिस महानिदेशक ने आपराधिक मामलों के आंकड़े गिनाते हुए कहा कि इस वर्ष 8.76 प्रतिशत की गिरावट के साथ हत्या के 781 मामले (पिछले वर्ष 856 मामले), 13.45 प्रतिशत की कमी के साथ बलात्कार के 2,549 मामले (पिछले वर्ष 2.945 मामले), 15.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ लूटपाट के लिए हत्या के 70 मामले (पिछले वर्ष 83 मामले), 24.14 प्रतिशत की वृद्धि के साथ डकैती के 72 मामले (पिछले वर्ष 58 मामले), 27.17 प्रतिशत की कमी के साथ बड़ी चोरी के 512 मामले (पिछले वर्ष 703 मामले), 0.54 प्रतिशत की वृद्धि के साथ चोरी के 5,755 मामले (पिछले वर्ष 5,724 मामले), 9.14 प्रतिशत कमी के साथ सामान्य चोरी के 17,700 मामले (पिछले वर्ष 19,480 मामले) दर्ज किये गये।

0.90 प्रतिशत कमी के साथ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के 220 मामले (पिछले वर्ष 222 मामले), 42.59 प्रतिशत की गिरावट के साथ लूटपाट के 186 मामले (पिछले वर्ष 324 मामले), 24.92 प्रतिशत की कमी के साथ अपहरण व जबरन बंधक बनाए रखने के 1,145 मामले (पिछले वर्ष 1,525 मामले), 1.87 प्रतिशत की कमी के साथ मारपीट के 21,620 मामले (पिछले वर्ष 22,031 मामले), 15.54 प्रतिशत की कमी के साथ थोखाधड़ी के 28,394 मामले (पिछले वर्ष 33,618 मामले) दर्ज किये गये।
23.11 प्रतिशत की वृद्धि के साथ विश्वासघात के 863 मामले (पिछले वर्ष 701 मामले), शतप्रतिशत वृद्धि के साथ फर्जी नोट प्रचलन के 26 मामले (पिछले वर्ष 13 मामले), 7.3 प्रतिशत की वद्धि के साथ अन्य आईपीसी संबंधी 87,125 मामले (पिछले वर्ष 81,194 मामले) और 30 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ एनडीपीएस अधिनियम संबंधी 2,542 मामले (पिछले वर्ष 1,950 मामले) दर्ज किये गये। उन्होंने बताया कि चोरी के 17,700 मामलों में 39 प्रतिशत 6,930 मामले वाहन चोरी के शामिल है।
पारिवारिक, वित्तीय और सामाजिक कारणों से अपराध के विविध कारण
पुलिस महानिदेशक ने बताया कि हत्या के 781 मामलों में 212 हत्या की घटनाएँ पारिवारिक समस्या, 68 घटनाएँ भू संपत्ति संबंधी विवाद, 40 घटनाएँ वित्तीय लेनदेन के कारण हुई है। इसके अलावा 112 हत्याएं मामूली विवाद, 100 काम जनित ईर्ष्या से हुई और 249 हत्याएं अन्य विभिन्न कारणों के चलते की गयी। उन्होंने बताया कि बलात्कार के मामलों में भी 13.44 प्रतिशत की गिरावट देखी गयी और पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष बलात्कार के 2,549 मामले दर्ज किये गये, जो पिछले वर्ष की तुलना में 396 कम है।
बलात्कार के 2,523 मामलों में आरोपी जान पहचान के हैं और 26 मामलों में अंजान लोग हैं। कुल मिलाकर 98.9 प्रतिशत जान पहचान के लोगों ने महिलाओं/युवतियों को बलात्कार का शिकार बनाया। उन्होंने बताया कि 2,076 बलात्कार के मामलों में आरोपी पारिवारिक सदस्य, दोस्त, प्रेमी और सहपाठी शामिल हैं। 230 मामलों में पड़ोसी आरोपी निकले और 217 मामलों में घरेलू नौकर, कार चालक आदि आरोपी पाए गये। कुछ मामले सह जीवन से संबंधित रहे हैं।
शी टीम की सक्रियता से बढ़ी रिपोर्टिंग, शिकायतें खुलकर सामने आईं
बलात्कार के मामलों में आरोपियों को सजा दिलाने की दर इस वर्ष 11.18 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वर्ष यह दर 8.81 प्रतिशत थी। पुलिस महानिदेशक शिवधर रेड्डी ने कहा कि इस वर्ष महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में मात्र 3.16 प्रतिशत की वृद्धि देखी गयी है। इस वर्ष महिलाओं के खिलाफ अपराध के 20,551 मामले दर्ज किये गये, जबकि पिछले वर्ष 19,922 मामले दर्ज किये गये थे।
आंकड़े गिनाते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष दहेज के लिए हत्या के 22 मामले (पिछले वर्ष 22 मामले), दहेज के लिए मौत के 127 मामले (पिछले वर्ष 126 मामले), आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के 342 मामले (पिछले वर्ष 379 मामले), दहेज प्रताड़ना के 8,793 मामले (पिछले वर्ष 8,973 मामले), महिला हत्या के 248 मामले (पिछले वर्ष 241 मामले), डीपी एक्ट के 6 मामले (पिछले वर्ष 6 मामले), बलात्कार के 2,549 मामले (पिछले वर्ष 2,945 मामले) दर्ज किये गये।
बीएनएस की धारा 69 के तहत छल से शारीरिक संबंध बनाने के 843 मामले, अपहरण के 1,003 मामले (पिछले वर्ष 1,122 मामले), 9.02 प्रतिशत की वृद्धि के साथ लैंगिक प्रताड़ना के 6,476 मामले (पिछले वर्ष 5,940 मामले), बहु विवाह के 142 मामले (पिछले वर्ष 168 मामले) दर्ज किये गये। उन्होंने बताया कि शी टीम द्वारा जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के कारण पीड़ित महिलाएं शिकायत करने के लिए खुलकर सामने आ रही हैं। इस कारण इस वर्ष महिलाओं के खिलाफ आपराधिक मामलों में वृद्धि देखने को मिल रही है।
सड़क हादसे बढ़े, लेकिन मरने वालों की संख्या घटी
पुलिस महानिदेशक ने आगे बताया कि इस वर्ष तेलंगाना में सड़क हादसों की घटनाओं में 5.68 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, लेकिन सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या में गिरावट संतोष का विषय है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष सड़क हादसों से 24,826 मामले दर्ज किये गये, जिनमें 6,499 लोग मारे गये और 14,768 लोग घायल हुए। पिछले वर्ष 23,491 सड़क हादसों में 7,056 लोग मौत का शिकार हुए थे और 21,664 लोग घायल हुए थे।
इस प्रकार इस वर्ष सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या 557 घटी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों को सड़क हादसा होने पर घायलों को किस प्रकार से प्राथमिक उपचार कर उनकी जान बचाई जाए और किस प्रकार से उन्हें शीघ्र नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जाए, पुलिस की ओर से प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों पर पुलिस की गश्त बढ़ाने के कारण भी हादसों में घायलों की जान बचाने में सफलता हासिल हुई है। हाईवे पेट्रोलिंग व्यवस्था को भी अमल में लाने के कारण घायलों की जान बचाने में अच्छी सफलता प्राप्त हुई है।
अपराधियों को जेल की सजा सुनाने में 3.09 प्रतिशत की वृद्धि
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि इस वर्ष विभिन्न आपराधिक मामलों में अपराधियों को जेल की सजा सुनाने में भी 3.09 प्रतिशत की सफलता प्राप्त की गयी है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मिर्यालगुड़ा पुलिस थाना नलगोंडा से संबंधित सरपंच की हत्या, सूर्यापेट में हत्या, नलगोंडा में नाबालिगा के साथ बलात्कार व हत्या के मामले और विकाराबाद में हत्या के मामले में 4 आरोपियों को मौत की सज़ा सुनाई गयी।
पुलिस महानिदेशक ने बताया कि 216 आपराधिक मामलों में 216 अपराधियों को आजीवन कारावास की सज़ा, पाँच मामलों में 6 आरोपियों को 20 वर्ष कारावास की सजा सुनाई गयी। इसके अलावा महिलाओं के खिलाफ अपराध के 67 मामलों में 77 आरोपियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गयी। उन्होंने बताया कि पॉक्सो अधिनियम संबंधी 141 मामलों में 154 आरोपियों को आजीवन कारावास की सज़ा और तीन मामलों में तीन आरोपियों को मौत की सज़ा सुनाई गई। बच्चों के खिलाफ अन्य 40 आपराधिक मामलों में 48 आरोपियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गयी।
इसी प्रकार एससी/एसटी प्रताड़ना निरोधक अधिनियम के तहत 9 मामलों में 9 आरोपियों को 20 वर्ष कारावास, एक मामले में आरोपी को 51 वर्ष कारावास, 14 मामलों के एक आरोपी को 35 वर्ष कारावास, एक मामले में एक आरोपी को 26 वर्ष कारावास, 1 मामले में 1 आरोपी को 26 वर्ष कारावास, 11 मामलों में 11 आरोपियों को 25 वर्ष कारावास और 2 मामलों में 5 आरोपियों को 25 वर्ष कारावास की सजा सुनाई गयी। इसके अलावा इसी प्रकार के 28 पुराने मामलों में 5 आरोपियों को 25 वर्ष कारावास की सज़ा सुनाई गयी।
साइबर अपराध में कमी
पुलिस महानिदेशक ने बताया कि इस वर्ष साइबर अपराध की घटनाओं में कुछ हद तक अंकुश लगाने में तेलंगाना पुलिस विशेष कर साइबर अपराध पुलिस को सफलता प्राप्त हुई है। एक ओर जहाँ देश भर में साइबर अपराध की घटनाओं में 42 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गयी, वहीं तेलंगाना में साइबर अपराध का ग्राफ 3 प्रतिशत तक गिरा है। उन्होंने कहा कि देश भर में साइबर अपराध की घटनाओं को नियंत्रित करने में तेलंगाना पुलिस अव्वल बनी हुई है, इसके साथ ही मामलों को सुलझाने में भी तेलंगाना पुलिस को अच्छी खासी सफलता प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष साइबर अपराध के 83,431 मामले दर्ज किये गये, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 85,766 रही है।
साइबर अपराध के मामलों में वित्तीय नुकसान में भी 21 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह दर 6 प्रतिशत की रही है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष साइबर अपराध की घटनाओं में 1378. 34 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि पिछले वर्ष 1753.11 करोड़ रुपये साइबर अपराध की भेंट चढ़ गये थे। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि इस वर्ष एनडीपीएस के मामलों में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
ड्रग्स तस्करी पर कड़ा शिकंजा: एनडीपीएस मामलों में तेज़ बढ़ोतरी
इसका मुख्य कारण तेलंगाना पुलिस विशेष कर ईगल फोर्स द्वारा ड्रग्स व गांजा तस्करी के मामलों में अन्य राज्यों के आरोपियों को बड़े पैमाने पर गिरफ्तार करना रहा है। इस वर्ष एडीपीएस के तहत कुल 2,542 मामले दर्ज किये गये, जबकि पिछले वर्ष 2,169 मामले और वर्ष 2023 के दौरान 1,464 मामले दर्ज किये गये थे।
इस वर्ष एनडीपीएस के तहत दर्ज मामलों में 8,322 आरोपियों को गिरफ्तार कर 172.93 करोड़ रुपये के मादक पदार्थ जब्त किये गये, जिनमें से 46.95 करोड़ के मादक पदार्थ तेलंगाना एंटी नारकोटिक्स ब्यूरो द्वारा जब्त किया गया। ब्यूरो ने गोवा, महाराष्ट्र पुलिस और दिल्ली व एनसीबी रांची के सहयोग से ड्रग्स तस्करी के अंतरराज्यीय मामलों को निपटाने में सफलता हासिल की है। पिछले वर्ष इस प्रकार के मामलों में 6.719 आरोपियों को गिरफ्तार कर 139.69 करोड़ रुपये के मादक पदार्थ और वर्ष 2023 के दौरान 4,288 आरोपियों को गिरफ्तार कर 94.39 करोड़ रुपये के मादक पदार्थ जब्त किये गये थे।
पुलिसकर्मियों की आत्महत्या की घटनाओं पर चिंता
तेलंगाना पुलिस महानिदेशक बी. शिवधर रेड्डी ने बताया कि पुलिस विभाग में पुलिसकर्मियों की बढ़ती आत्महत्या की घटनाएँ निसंदेह चिंता का विषय है, चाहे आत्महत्या का कारण पारिवारिक, व्यक्तिगत या आर्थिक तंगी ही क्यों ना हो। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में कार्यरत पुलिसकर्मियों पर काम का बोझ तो रहता ही है और कई बार उन्हें असामान्य परिस्थितियों में भी कार्य करना पड़ता है। इसके साथ ही यदि उनके साथ कोई पारिवारिक या व्यक्तिगत समस्या जुड़ जाती है तब वे मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं।
इस प्रकार की परिस्थितियों में कुछ पुलिसकर्मियों ने आत्मघाती कदम उठाया है। इस समस्या को सुलझाने के लिए तेलंगाना पुलिस विभाग अपने स्तर पर कार्य कर रहा है। वार्षिक संवाददाता सम्मेलन के दौरान शिवधर रेड्डी के साथ उपस्थित अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक महेश मुरलीधर भागवत और चारू सिन्हा ने कहा कि इस समस्या को सुलझाने के लिए 25 मैपिंग पैरामीटर के साथ एक कार्यक्रम तैयार किया गया है।
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750 थाना प्रभारियों को परामर्श और तनाव प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण
इस पैरामीटर में 25 सवाल तैयार किये गये हैं। इस सवालों के आधार पर तनाव के शिकार पुलिसकर्मियों से परामर्श करने के लिए सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को आवश्यक निर्देश दिये गये हैं। इसी प्रकार तेलंगाना के सभी 750 पुलिस इंस्पेक्टरों (थाना प्रभारियों) को तेलंगाना पुलिस मुख्यालय बुलाकर उन्हें भी आवश्यक दिशा-निर्देश व तनाव के शिकार पुलिसकर्मियों से परामर्श करने का प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने बताया कि आवश्यकता पड़ने पर मानसिक तनाव के शिकार पुलिसकर्मियों को अवकाश देकर उन्हें परामर्श व उपचार के लिए मनोचिकित्सक के पास भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि 25 सवालों के जरिए उनसे परामर्श कर इस बात की जानकारी हासिल की जाएगी कि क्या मानसिक तनाव के शिकार पुलिसकर्मी में पहले से ही आत्महत्या की प्रवृत्ति है।
यदि है तो इस प्रकार के पुलिसकर्मियों को मनोचिकित्सक के पास भेजकर परामर्श कर उन्हें चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन गेम की लत के चलते कुछ पुलिसकर्मियों विशेषकर कुछ पुलिस कांस्टेबल व होमगार्ड ने आत्महत्या कर ली थी। कुछ मामलों में आर्थिक तंगी के कारण महिला पुलिस कांस्टेबल समेत कुछ पुलिस कांस्टेबलों ने खुदकुशी कर ली थी। इन घटनाओं को तेलंगाना पुलिस गंभीरता से लेते हुए कार्य कर रही है।
नक्सलियों का लगभग सफाया
पुलिस महानिदेशक शिवधर रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना में नक्सलियों का लगभग सफाया हो गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में तेलंगाना में जन्म लेने वाले केवल 53 नक्सली ही मौजूद हैं और इनमें से अधिकांश नक्सली अन्य राज्यों में सक्रिय है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष कुल 509 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनमें 2 सेंट्रल समिति सदस्य, 11 स्टेस समिति सदस्य, 3 डिवीजन समिति सदस्य, 17 डीवीसीएम सदस्य, 57 एसीएम सदस्य, शामिल हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 24 तेलंगाना, 1 आंध्र प्रदेश और 483 छत्तीसगढ़ से संबंधित हैं। उन्होंने बताया कि नक्सली सिद्धांत का अस्तित्व न रहने, आपस में समन्वय के अभाव, खराब स्वास्थ्य और तेलंगाना सरकार द्वारा दिये जा रहे पुनर्वास योजना से प्रभावित हो कर नक्सली आत्मसमर्पण कर जीवन की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने शेष बचे हुए नक्सलियों से भी आत्मसमर्पण कर जीवन की मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की। (मनीष सिंह)
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