मल्काजगिरी में फर्जी कॉल सेंटर से साइबर ठगी का खुलासा
हैदराबाद, मल्काजगिरी की साइबर अपराध पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश कर पूँजी निवेश की आड़ में साइबर ठगी को अंजाम देने वाले 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
यहाँ संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मल्काजगिरी पुलिस उपायुक्त (साइबर अपराध) एस.वी. नागलक्ष्मी और एसीपी एस.जी. शिवशंकर ने कॉल सेंटर का पर्दाफाश करने का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि नागोल निवासी एक 35 वर्षीय व्यापारी की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन करने के बाद साइबर ठगी का पर्दाफाश किया। इस मामले में पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर के जरिए पूँजी निवेश की आड़ में साइबर ठगी को अंजाम देने वाले 9 आरोपियों में से 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों में अंबेडकर कोनासीमा ज़िला, आंध्र-प्रदेश निवासी डिग्री छात्र कडाली रेवंत कुमार (20), नरसापुर निवासी कार चालक केता विद्याचरण (23), एएसआर नगर, भीमावरम निवासी निजीकर्मी कोलानटी शिववर्मा (25), रामन्नापालेम ग्राम, पश्चिम गोदावरी ज़िला निवासी कार चालक मैला बत्तुला पवन (28), उंगी ग्राम, पश्चिम गोदावरी ज़िला निवासी कैब चालक मुदूनूरि शिवा (28), लिंगन्नाबोयना चर्ला ग्राम नरसापुरम पश्चिम गोदावरी ज़िला निवासी रैपिडो ड्राइवर कडाली चंद्रशेखर (21), भीमावरम निवासी कॉलेज छात्र मुदुनूरि कार्तिकेय वर्मा और द्वारका तिरुमला ग्राम, पश्चिम गोदावरी ज़िला निवासी रैपिडो ड्राइवर एन. शिवा (22) शामिल है।
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8 आरोपियों के पास से 45 फोन और लैपटॉप सहित सामान जब्त
आरोपियों के पास से 45 सेलफोन, एक लैपटॉप, तीन रूटर, दो टैब, 22 चेक बुक, 40 एटीएम कार्ड, 20 सिमकार्ड, 5 आधार कार्ड, दो मतदाता पहचान-पत्र और दो पैन कार्ड जब्त किए। उन्होंने बताया कि आरोपी फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर व्हॉट्सऐप में बार्क लेस के नाम से एक ग्रुप प्रारंभ किया और इस ग्रुप में अपने आपको निवेशक बताते हुए निवेश के लिए एक फर्जी ट्रेनिंग प्लेटफार्म उपलब्ध करवाया।
वे व्हॉट्सऐप ग्रुप के जरिए मैसेज भेजकर पूँजी निवेश करने पर भारी मुनाफा देने का लालच देकर ठगी कर रहे थे। इनके लालच में फँसकर शिकायतकर्ता ने विभिन्न किश्तों में 36,35,010 रुपये का निवेश किया और उसके निवेश पर 7 करोड़ रुपये का मुनाफा बताया गया, लेकिन शिकायतकर्ता को केवल 5 हजार रुपये ही प्राप्त हुए। साइबर अपराध पुलिस ने शिकायत के आधार पर बीएनएस की धारा 316(2), 318(4), 319(2), 338 और आईटी एक्ट की धारा 66(सी व डी) के तहत मामले दर्ज किए। तकनीकी रूप से छानबीन करने के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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