विधान परिषद में उठी आम एवं मिर्ची बोर्ड के गठन की माँग
हैदराबाद, विधान परिषद में बजट पर हुई चर्चा में हल्दी बोर्ड की तर्ज पर आम और मिर्ची बोर्ड के गठन करने की बात पर जोर दिया गया। आज यहाँ विधान परिषद में बजट पर चर्चा के दौरान विधान परिषद में विपक्षी दल के नेता मधुसूदन चारी ने कहा कि जिस प्रकार तेलंगाना में केसीआर ने प्रगति की है, वह थम सी गई है।
वर्तमान बजट में शिक्षा को पूर्ण रूप से नकारा गया। शिक्षा के बजट को बढ़ाने की आवश्यकता है। बीआरएस के शासन में स्कूलों पर विशेष ध्यान देते हुए बच्चों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा के लिए गुरुकुल का निर्माण किया गया। उनके लिए अच्छे भोजन की व्यवस्था भी की गयी, लेकिन वर्तमान में कांग्रेस की सरकार की नीतियों की चलते गुरुकुल की स्थिति खराब है।
शिक्षा और ऋण पर कांग्रेस और बीआरएस के आरोप-प्रत्यारोप
बच्चे प्रवेश भी नहीं ले रहे। उन्होंने कहा कि चुनाव से पूर्व कांग्रेस ने जनता से 13 वादे किये थे, उनको पूरा नहीं किया गया। कन्या विवाह के लिए चलाई गई महालक्ष्मी योजना सही तौर पर कार्य नहीं कर रही। लोगों में इसको लेकर परेशानी का माहौल है। सरकार बजट में प्रमुख रूप से शिक्षा, किसानों की फसल बीमा, रैतु भरोसा आदि को ईमानदारी से लागू करे।
कांग्रेस के एमएलसी जीवन रेड्डी ने कहा कि वर्तमान में राज्य पर 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का ऋण है। इसके ब्याज चुकाने में काफी पैसा जा रहा है। यह ऋण प्रमुख रूप से बीआरएस के शासन में आया। उन्होंने कालेश्वरम प्रॉजेक्ट के नाम पर राज्य को ऋण के बोझ के तले दबा दिया। उन्होने कहा कि कांग्रेस सरकार ने चुनाव से पूर्व जो भी वादे किये थे, उनमें से दो को छोड़कर सभी कार्याचरण में हैं।
इनमें 6 गारंटी को पूरा किया गया है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हल्दी बोर्ड का गठन किया गया, उसी तर्ज पर आम बोर्ड और मिर्ची बोर्ड का गठन किया जाए, ताकि इससे जुड़े किसानों को लाभ हो सके और उनकी मेहनत का सही फल मिले। उन्होंने कहा कि गत सरकार ने कालेश्वरम परियोजना में भारी पैसा खर्च कर राज्य पर भारी ऋण का बोझ डाल दिया।
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शिक्षा और राज्य बजट पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
इस परियोजना के चलते राज्य की अन्य सिंचाई परियोजना को लागू नहीं किया जा सका। कांग्रेस सरकार जो सिंचाई परियोजनाएँ लंबित हैं, उन्हें पूर्ण करेगी। राज्य सरकार शिक्षा पर ध्यान दे रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के इंटिग्रेटेड स्कूलों को चला रही है। इसके अलावा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और स्किल यूनिवर्सिटी को स्थापित कर रही है। राज्य का बजट सभी वर्ग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
यह प्रगतिशील बजट है, जो राज्य को विकास को ओर ले जाएगा। भाजपा के एमएलसी मलका कौमरय्या ने कहा कि शिक्षा मूलभूत आधार है, लेकिन बजट में इसको अनदेखा किया गया है। चाहे बीआरएस हो या कांग्रेस, दोनों ने शिक्षा पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
बीआरएस के समय से ही अध्यापकों, प्राध्यापकों पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसके चलते उनके पीआरएस, ईपीएफ, डीए, अंतरिम राहत आदि का बकाया 20,000 करोड़ रुपये से अधिक है। इसलिए सरकार शिक्षा पर पुनर्विचार कर बजट को बढ़ाने तथा स्कूलों की हालत सुधारने पर ध्यान दे। सरकारी स्कूलों की मूलभूत सुविधा के चलते माता-पिता बच्चों को निजी स्कूलों में भेज रहे हैं।
गत बजट पर शिक्षा पर 7.2 प्रतिशत आवंटन किया गया, इस बार 7.51 प्रतिशत किया गया। इससे साफ पता चलता है कि सरकार शिक्षा को लेकर कितनी गंभीर है। एमएलसी प्रो. कोदंडराम ने शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों के लिए ईमानदारी से कार्य करते हुए सभी के साथ उचित न्याय करने का आग्रह किया। कांग्रेस के पी.महेश कुमार गौड़ ने प्रस्तुत बजट को सभी वर्गों के लिए उचित बताते हुए राज्य में ऋण के अधिक बोझ के लिए बीआरएस पार्टी को कारण बताया।
मुख्यमंत्री को झूठ बोलने का मिलेगा गिनीज रिकॉर्ड : के.कविता
विधान परिषद में बजट पर चर्चा करते हुए बीआरएस एमएलसी के. कविता ने कहा कि सिर्फ केसीआर को दोषी ठहराने के लिए मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी झूठ बोल रहे हैं कि राज्य की वित्तीय स्थिति अच्छी नहीं है। मुख्यमंत्री को झूठ बोलने का गिनीज रिकॉर्ड मिलेगा। अगर मुख्यमंत्री और मंत्री झूठ बोलना बंद नहीं करेंगे, तो हम सदन में विशेषाधिकार नोटिस जारी करेंगे।
420 वादे करके, गांधी परिवार को लाकर, हस्ताक्षर करके और गारंटी देकर कांग्रेस नेताओं ने लोगों को धोखा दिया और वोट हासिल किए। इसके बावजूद कांग्रेस पार्टी को बीआरएस पार्टी से सिर्फ एक फीसदी ज्यादा वोट मिले। लोगों ने बीआरएस पार्टी को नहीं नकारा। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सचिवालय के चक्कर लगा रहे हैं।
कांग्रेस पर भ्रष्टाचार और झूठ फैलाने का आरोप: कविता
वह प्रजावाणी कार्यक्रम में केवल एक बार कहकर आये थे कि प्रजावाणी सुनेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी लोगों से मिलना नहीं चाहते, जबकि उनका कहना है कि वह रोजाना लोगों से मिलते हैं। कविता ने कहा कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पुलिस कमांड कंट्रोल रूम में बैठकर प्रशासन चला रहे हैं। यह बजट कांग्रेस पार्टी के ब्रांड भ्रष्टाचार का प्रमाण है। भ्रष्टाचार कांग्रेस के डीएनए का हिस्सा है।
कांग्रेस सरकार ने किसी भी क्षेत्र को प्राथमिकता नहीं दी। सरकार के पास कोई विजन नहीं है। प्रशासन केवल केसीआर को अपमानित करने के लिए काम कर रहा है। तेलंगाना आंदोलन के दौरान केसीआर को लाखों श्राप मिले, लेकिन वो आशीर्वाद में बदल गए। केसीआर के कार्यकाल में कांग्रेस पार्टी लगातार कर्ज को लेकर दुष्प्रचार करती रही। बजट से पता चला कि कांग्रेस पार्टी का अभियान झूठा है।
बीआरएस के 10 वर्षों के दौरान एफआरबीएम सीमा के अधीन उधार केवल सिर्फ 3 लाख करोड़ रुपये था। संबंधित निगमों द्वारा लिए गए ऋणों के लिए बीआरएस सरकार द्वारा दी गई गारंटी की राशि केवल 1 लाख 21 हजार करोड़ रुपये है। इसका मतलब बीआरएस के दौरान कुल कर्ज मात्र 4 लाख 22 हजार करोड़ है। सरकार ने बजट दस्तावेजों में इन आँकड़ों का जिक्र किया है और कांग्रेस पार्टी कर्ज को लेकर बार-बार झूठ क्यों बोलती है?
केसीआर परिवार ने तेलंगाना को बदनाम किया : सीताक्का
पंचायत राज मंत्री सीताक्का ने कहा कि केसीआर परिवार ने तेलंगाना को बदनाम किया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या आप ही नहीं हैं, जिन्होंने दिल्ली में अपने व्यवहार से तेलंगाना की गरिमा से समझौता किया? सीताक्का ने कांग्रेस पार्टी की बलिदान की विरासत पर जोर देते हुए कहा कि बीआरएस ने एक दशक तक सत्ता संभाली, लेकिन लोगों की न्यायपूर्ण सेवा करने में विफल रहे।
मंत्री ने विशिष्ट शिकायतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शुरुआती पाँच वर्षों में महिला आयोग में कोई महिला मंत्री या प्रतिनिधि नहीं थीं। महिलाओं द्वारा बनाए गए 1,800 करोड़ रुपये के अभय हस्तम फंड को आवंटित नहीं किया गया और न ही कोई ब्याज दिया गया। इसके अलावा, महिला समूहों को दिए जाने वाले 3,700 करोड़ रुपये भी नहीं चुकाए गए।
कई मुद्दे उठे, जो बीआरएस प्रशासन के दौरान जनता पर किए गए अन्याय को दर्शाते हैं। सीताक्का ने टिप्पणी की कि यदि बीआरएस सरकार प्रभावी ढंग से काम कर रही होती, तो विधानसभा चुनावों में लोगों के पास पार्टी को खारिज करने का कोई कारण नहीं होता। उन्होंने बीआरएस नेताओं से अपने दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करने और सकारात्मक और रचनात्मक सिफारिशें पेश करने का आग्रह किया।
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