केसीआर शासन में कुचले गए प्रजातांत्रिक मूल्य : कविता

हैदराबाद, तेलंगाना जागृति की संस्थापक व पूर्व विधान परिषद सदस्य के. कविता ने पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव सरकार पर तेलंगाना आंदोलनकारियों को अपमानित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केसीआर के सत्ता में आने के बाद प्रजातांत्रिक मूल्य कुचले गए, धरना चौक हटा दिया गया, प्रश्न करने वालों पर केस दर्ज कर गिरफ्तार करने के बाद पीटा गया। इसी अहंकार व असहनशीलता ने केसीआर को सत्ता से हटा दिया।

बागलिंगमपल्ली स्थित आरटीसी कल्याण मंडपम् में तेलंगाना जागृति की तेलंगाना उद्यमाकारूला आत्मगौरव सभा (तेलंगाना आंदोलनकारियों की आत्मसम्मान सभा) को संबोधित करते हुए कविता ने कहा कि तेलंगाना की भावना को सीढी बनाकर केसीआर सत्ता में आए थे। पहली बार केसीआर को जनता ने 63 विधायकों के साथ सत्ता सौंपी थी। केसीआर के सत्ता में आने के बाद आंदोलनकारियों ने समझा था कंधे पर हाथ रखा जाएगा, पहचान दी जाएगी, न्याय मिलेगा, लेकिन उसके उलट दृष्य दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि जिनके खिलाफ आंदोलन किए गए, वही एकीकृत आंध्र प्रदेशवादी केसीआर के इर्द-गिर्द व मंत्रीमंडल में दिखाई दिए।

केबीआर पार्क का नाम कासू ब्रह्मानंद रेड्डी पर होने से नाराज़गी

हमारे अपनों ने ही आंदोलनकारियों को कीड़े-मकौड़ों के रूप में देखा और अपनों से ही मिले घाव का अधिक दर्द है। उन्होंने कहा कि केसीआर के शासन में बेरोजगारों को न्याय नहीं मिला। तेलंगाना आंदोलन के दौरान वर्ष 1969 में 369 विद्यार्थियों की बलि लेने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कासू ब्रह्मानंद रेड्डी के नाम से केबीआर पार्क आज भी नगर में मौजूद है, यह देखकर दुःख होता है। पूर्व नागरिक प्रशासन मंत्री के. तारक रामाराव से कई बार इस पार्क को प्रोफेसर जयशंकर का नाम देने की माँग की गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का बहाना बनाकर टाल दिया गया।

टैंकबंड पर जयशंकर की प्रतिमा स्थापित नहीं की गई। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि तेलंगाना से जिनका दूर तक कोई संबंध तक नहीं रहा, ऐसे कइयों के अंतिम क्रिया कर्म केसीआर शासन में आधिकारिक तौर पर किए गए, लेकिन तेलंगाना के प्रोफेसर केशवराव जाधव का अंतिम क्रिया कर्म आधिकारिक तौर पर नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि केसीआर के शासन में तेलंगाना के छोटे-मोटे कॉन्ट्रैक्टरों को कुछ नहीं मिला, लेकिन मेगा कृष्णा रेड्डी जैसे बड़े कॉन्ट्रैक्टरों को कुबेर बना दिया गया।

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पूर्व केसीआर शासन में आंदोलनकारियों के साथ अन्याय का दावा

कविता ने कहा कि पूर्व केसीआर शासन में अन्याय के चलते तेलंगाना आंदोलनकारी बाहर रहकर और वह (कविता) पार्टी के भीतर रहकर दुःखी रहीं। पार्टी के भीतर रहकर जी हुजूर कहती, तो शायद बीआरएस में बनी रही होती, लेकिन क्या हुजूर करके प्रश्न किया, इसलिए पार्टी से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि तेलंगाना आंदोलनकारियों के साथ घोर अन्याय हुआ है। तेलंगाना हासिल करने के बाद कई कटु अनुभव मिले।

इसलिए तेलंगाना जागृति ने नई राजनीतिक पार्टी का गठन करने का निर्णय लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी यह पार्टी केवल राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि आंदोलनकारियों का एजेंडा लेकर तेलंगाना के अमर शहीदों की आकांक्षाओं को पूरा करने और तेलंगाना के अस्तित्व की रक्षा के लिए एक राजनीतिक शक्ति बनेगी। कविता ने कहा कि हैदराबाद में स्थापित कंपनियों में उत्तर भारत से आने वालों को नौकरियां दी जा रही हैं, लेकिन तेलंगाना वासियों को रोजगार नहीं मिल रहा।

मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी सरकार से निजी कंपनियों में तेलंगाना वासियों को नौकरियों में 20 प्रतिशत लोकल रिजर्वेशन देने की उन्होंने माँग की। उन्होंने कहा कि तेलंगाना आंदोलनकारियों से कांग्रेस ने जो वादे किए थे, उन्हें 26 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र में पूरा करने की घोषणा करें। उन्होंने कहा कि सरकार ने तेलंगाना आंदोलनकारियों को प्रतिमाह 25 हजार रुपये पेंशन देने का वादा किया था, उसे निभाते हुए विधानसभा के बजट सत्र में स्पष्ट घोषणा करें।

बजट सत्र में घोषणाओं के लिए मुख्यमंत्री पर दबाव

कविता ने वादे के अनुसार तेलंगाना आंदोलनकारियों को 250 गज भूमि देने, तेलंगाना संक्षेम बोर्ड का गठन करने की बजट सत्र में घोषणा करने की मुख्यमंत्री से माँग की। उन्होंने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को आंदोलन द्रोही बताते हुए कहा कि केसीआर ने तेलंगाना आंदोलनकारियों की उपेक्षा की और सत्ता से बाहर हो गए।

यदि रेवंत रेड्डी सरकार भी ऐसा ही करेगी, तो तेलंगाना मौन नहीं रहेगा। केसीआर की तरह अंजाम होगा। उन्होंने एमएलसी प्रोफेसर कोदंडराम को चेतावनी देते हुए कहा कि तेलंगाना आंदोलनकारियों पर बंदूक लेकर निकलने वाले तेलंगाना द्रोही रेवंत रेड्डी पर जनता ने इसलिए भरोसा किया था, क्योंकि प्रोफेसर कोदंडराम और आईएएस अकुनूरी मुरली साथ खड़े थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सत्ता में आए ढाई साल हो चुके हैं, समस्याएँ बढ़ती जा रही हैं। गुरुकुल पाठशालाओं में मौतें हो रही हैं, फिर भी कोदंडराम व आकुनूरी मुरली मौन हैं।

वह अपना मौन तोड़ें और न्याय दिलाएँ। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान वीरेंदर व सीताराम के तैयार एक ऐप को लांच करते हुए कहा कि इसमें तेलंगाना आंदोलनकारियों का डेटा रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐप में स्थित डेटा के आधार पर तेलंगाना आंदोलनकारियों के परिजनों के पति-पत्नी को मिलाकर 6 सदस्यों को स्वास्थ्य बीमा तेलंगाना जागृति की ओर से दिया जाएगा, ताकि राज्य सरकार को शर्म आए, जो आंदोलनकारियों को स्वास्थ्य बीमा तक नहीं दे पा रही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने तेलंगाना के साथ जो भी वादे किए हैं, उन्हें निभाए वरना तेलंगाना जागृति व्यापक आंदोलन करेगी। अवसर पर रूप सिंह, महासचिव नवीन आचारी व अन्य उपस्थित थे।

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