हीरा ग्रुप की निदेशक नौहीरा शेख को पाँच करोड़ रुपये का जुर्माना

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने अधिक मुनाफा देने का आश्वासन देकर आम जनता से करोड़ों रुपये का निवेश वसूलकर धोखाधड़ी करने वाली हीरा ग्रुप ऑफ कंपनी की निदेशक नौहीरा शेख को पाँच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाते हुए अपना फैसला जारी किया।

गौरतलब है कि हीरा ग्रुप की संपत्तियों की नीलामी करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ माह पूर्व प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को आदेश जारी किए थे। इस कारण संपत्ति की नीलामी को रोकने के लिए बार-बार उच्च न्यायालय में याचिकाएँ दायर करने के कारण अदालत ने तीव्र असंतोष जताया। इस प्रकार बार-बार याचिकाएँ दायर कर अदालत का समय बर्बाद करने के कारण पाँच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। अदालत को गुमराह करने के कारण हीरा ग्रुप ऑफ कंपनी की निदेशक नौहीरा शेख के खिलाफ 5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाते हुए उच्च न्यायालय ने आज आदेश जारी किए।

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार ईडी ने हीरा ग्रुप से संबंधित 50 अचल संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। मेटल स्क्रैप ट्रेड कॉर्पोरेशन लिमिटेड वेब पोर्टल के जरिए ऑनलाइन स्तर पर नीलामी के लिए 59 संपत्तियों का चयन किया गया। आगामी 26 दिसंबर को इन संपत्तियों की नीलामी की जाएगी। इस संदर्भ में संपत्तियों के बाजार मूल्य से कम निविदाएँ आमंत्रित करने का हवाला देते हुए हीरा ग्रुप ऑफ कंपनी की निदेशक नौहीरा शेख ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इस याचिका पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस नागेश भीमपाका ने सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किए। न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता के व्यवहार को लेकर तीव्र असंतोष जताया।

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बार-बार याचिकाएँ दायर करने पर हाईकोर्ट की कड़ी आपत्ति

संपत्तियों की नीलामी करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वयं आदेश जारी करने के बावजूद याचिकाकर्ता बार-बार याचिकाएँ दायर कर नीलामी प्रक्रिया रोकने के प्रयास को लेकर न्यायाधीश ने कड़ी आपत्ति जताई। न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ता के उस व्यवहार को अनुचित ठहराया जाता है, जिसमें वह याचिकाएँ दायर कर न केवल नीलामी प्रक्रिया में रोडा डाल रही हैं, बल्कि अदालत को भी गुमराह किया जा रहा है।

अदालत के समय को व्यर्थ करने और गुमराह करने के कारण पाँच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाते हुए जुर्माने से संबंधित धनराशि प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करने का न्यायाधीश ने अपना फैसला सुनाया। जुर्माने की राशि 8 सप्ताह के भीतर जमा करने के आदेश दिए। इसके साथ ही न्यायाधीश ने बाजार मूल्य से कम मूल्य पर संपत्ति की नीलामी करने के याचिकाकर्ता के दावे को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता द्वारा नीलामी प्रक्रिया को पीएमएल अधिनियम के नियम और सहज न्याय सूत्र के विरुद्ध बताए जाने के दावे को भी खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता की इस कार्रवाई को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को गलत ठहराने के प्रयास बताते हुए याचिका खारिज कर दी।

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