सैन्य प्रशिक्षण के दौरान दिव्यांगता कैडेट के लिए बाधक न बने : कोर्ट

नई दिल्ली, उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह चाहता है कि देश के रक्षा बलों में ऐसे बहादुर कैडेट शामिल हों, जिनकी सैन्य प्रशिक्षण के दौरान चोट या दिव्यांगता उनके लिए किसी भी प्रकार की बाधा नहीं बने। इसके साथ ही न्यायालय ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह ऐसी आपात स्थितियों के लिए उन्हें बीमा कवर प्रदान करने की संभावना तलाशे।

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान दिव्याँग होने के कारण चिकित्सा आधार पर सैन्य संस्थानों से बाहर कर दिए गए कैडेट की परेशानी पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सोमवार को इस मामले में केंद्र और रक्षा बलों से जवाब माँगा। पीठ ने कहा, हम चाहते हैं कि ये बहादुर कैडेट सेना में शामिल हों। हम नहीं चाहते कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तीर्ण होने के बाद प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले इन कैडेट के लिए चोट या दिव्यांगता किसी भी प्रकार की बाधा बने।

एकमुश्त अनुग्रह राशि बढ़ाने की सिफारिश

शीर्ष अदालत ने कहा कि केंद्र को विभिन्न सैन्य संस्थानों में कार प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कैडेट को मृत्यु या विकलांगता की किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए समूह बीमा जैसा बीमा कवर देने की संभावना तलाशनी चाहिए। पीठ ने कहा, अगर आप उन्हें बीमा कवर देते हैं, तो सरकार पर नहीं बल्कि बीमाकर्ता पर वित्तीय बोझ पड़ेगा। हर प्रशिक्षु कैडेट का बीमा होना चाहिए क्योंकि जोखिम बहुत ज्यादा है। बहादुर लोगों को सेना में आना चाहिए।

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अगर उन्हें बेसहारा छोड़ दिया गया, तो वे निराश हो जाएँगे। पीठ ने केंद्र की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से भी कहा कि वे प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान दिव्यांग हुए कैडेट की चिकित्सा जरूरतों को पूरा करने के लिए मौजूदा 40,000 रुपये की एकमुश्त अनुग्रह राशि को बढ़ाने के निर्देश माँगें। शीर्ष अदालत को बताया गया कि सैन्य प्रशिक्षण के दौरान दिव्यांग होने वाले सैनिकों को पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) कवर प्रदान करने से संबंधित एक फाइल मंत्रालय द्वारा स्वीकृत की गई है, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया है।(भाषा)

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