महिलाओं पर भेदभाव खत्म हो, पुरुषों की सोच बदले : राधारानी

हैदराबाद, तकनीकी दृष्टि से भारत तेजी से विकास कर रहा है, लेकिन महिलाओं के प्रति भेदभाव अब भी कम नहीं हुआ है, जो अत्यंत दुखद है। यह बात तेलंगाना हाईकोर्ट की पूर्व न्यायमूर्ति और तेलंगाना कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन की अध्यक्ष जी. राधारानी ने कही।

जब बच्चे के जन्म में स्त्री और पुरुष दोनों की समान भागीदारी होती है, तो फिर बच्चों की देखभाल और पालन-पोषण की जिम्मेदारी केवल महिलाओं पर ही क्यों छोड़ दी जाती है। इस तरह की व्यवस्था में महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व कैसे मिलेगा, यह एक बड़ा प्रश्न है।

दहेज प्रथा और मेंटेनेंस विवाद पर राधारानी की चिंता

राधारानी ने कहा कि कुछ संस्थान यह दावा करते हैं कि घर के कामकाज के लिए वे लंबी छुट्टियां देने को तैयार हैं, लेकिन वही सुविधा पुरुषों को क्यों नहीं दी जाती। क्या बच्चों की देखभाल केवल महिलाओं की जिम्मेदारी है? क्या पुरुषों की कोई जिम्मेदारी नहीं है? उन्होंने यह सवाल भी उठाया।

पीपुल्स एजुकेशन ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेते हुए राधारानी ने कहा कि पुरुषों की सोच में बदलाव आना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आजकल 30 वर्ष की आयु के बाद भी कई लड़कियां विवाह करने से डर रही हैं। इस डर को दूर करने के लिए पुरुषों को भरोसा देना होगा। उन्होंने कहा कि दहेज प्रथा आज भी समाज में व्यापक रूप से मौजूद है। लाखों रुपये दहेज देने के बाद भी तलाक के समय महिलाओं को गुजारे भत्ते के लिए संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कुछ पुरुष गुजारा भत्ता देने से बचने के लिए अपनी नौकरी तक छोड़ देते हैं, जबकि कुछ लोग अपनी संपत्ति माता-पिता या भाइयों के नाम पर स्थानांतरित कर देते हैं।

राधारानी ने यह भी कहा कि यदि नौकरी करने वाली महिलाएं तलाक लेती हैं, तो कुछ पति उनसे ही गुजारा भत्ता देने की मांग करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं को समान अधिकार, समान विरासत और समान न्याय अभी भी पूरी तरह नहीं मिल रहा है।

समाज में वास्तविक समानता की शुरुआत होगी

समाज में मौजूद कई समस्याओं पर खुली चर्चा की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि महिलाओं को कमतर समझने वाली मानसिकता में बदलाव लाना जरूरी है। राधारानी ने कहा कि महिला दिवस केवल महिलाओं द्वारा ही नहीं मनाया जाना चाहिए, बल्कि ऐसे कार्यक्रमों का नेतृत्व पुरुषों को करना चाहिए, तभी समाज में वास्तविक समानता की शुरुआत होगी।

इस कार्यक्रम में पीपुल्स एजुकेशन ट्रस्ट के चेयरमैन डॉ. सी.एच. बालकृष्ण, परिवहन विभाग के पूर्व आयुक्त सी.एल.एन. गांधी, तेलंगाना गद्दर फिल्म अवॉर्ड्स ज्यूरी कमेटी के सदस्य और वरिष्ठ पत्रकार मसादे लक्ष्मी नारायण, ट्राइकार मैनेजर पी. उमरानी, लेखिका दासोजु ललिता, बी द चेंज फाउंडेशन की संस्थापक लावण्या गुडेल्ली, डीबीएफ के सचिव शंकर, वेमुल जयंत, ट्रेड यूनियन नेता गोल्लापल्ली दयानंद राव सहित कई लोग उपस्थित थे।

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