भक्ति, शक्ति एवं सुख प्रदान करती है बाबा श्याम की दिव्य कथा : पवन गुरु

हैदराबाद, बाबा श्याम की पावन दिव्य कथा भक्ति, शक्ति एवं सुख प्रदान करने वाली है। इस कथा को जीवन में आत्मसात करके आत्मकल्याण की ओर बढ़ना चाहिए। बाबा की कृपा पाने के लिए निश्चल प्रेम, अटूट विश्वास और स्मरण सबसे महत्वपूर्ण हैं। उक्त उद्गार श्री चिन्ना अनंतगिरी शिवालयम् में श्री खाटू श्याम परिवार, अत्तापुर द्वारा आयोजित श्री श्याम बाबा की दिव्य कथा के द्वितीय दिवस श्री श्याम कथा भूषण पवन गुरुजी ने व्यक्त किये।

कथा प्रसंग को विस्तार देते उन्होंने कहा कि जीवन में बाबा श्याम की असीम कृपा प्राप्ति के लिए क्षमा तथा कृतज्ञता को धारण करना चाहिए। जीवन में नित्यप्रति परमात्मा के समक्ष अपने सभी जन्मों के पाप कर्मों के लिए क्षमायाचना करनी चाहिए। साथ ही हर प्राप्त के लिए परमपिता परमेश्वर का आभार व्यक्त करना चाहिए। यह एक नियम है, जो जीवन के समस्त पापों का नाश करते हुए श्याम बाबा का कृपा पात्र बनाता है। आभार और क्षमायाचना यह दोनों जीवन का उद्धार करने वाले हैं।

खाटू श्याम जन्मोत्सव पर भक्ति, छप्पन भोग और भव्य आरती

इनके माध्यम से नकारात्मक ऊर्जा का क्षय हो जाता है और हमारा मन तथा आत्मा पवित्र हो उठते हैं। पवन गुरु ने कथा का सरस श्रवण कराते हुए भीमपुत्र घटोत्कच का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जिसके साथ त्रिलोकीनाथ होते हैं, वह कभी हार नहीं सकता है। नवधा भक्ति में सबसे सरल तथा सर्वश्रेष्ठ भक्ति को स्मरण बताया गया है। प्राचीन समय में साधु-संत तथा ऋषि-मुनि पहाड़ों आदि स्थानों पर जाकर स्मरण मात्र से भगवत प्राप्ति करते थे। अगर हमारे मन में कोई ऐसी जिज्ञासा हो, जिसका समाधान न मिल रहा हो तो दोनों नेत्र बंद करके बाबा श्याम का ध्यान करना चाहिए। हमें बाबा श्याम के स्वरूप को आंखों में बसा लेना चाहिए।

बाबा श्याम के जन्म की कथा का श्रवण कराते हुए पवन गुरु ने कहा कि वे महाभारत काल के वीर बर्बरीक का कलयुगी अवतार हैं, जिन्हें श्री कृष्ण ने अपने नाम से पूजे जाने का वरदान दिया। बाबा श्याम की महिमा का बखान करते हुए पवन गुरुजी ने कहा कि उनकी भक्ति से जीवन की सभी उलझनें सुलझ जाती हैं और जीवन आनंदमय हो उठता है। आज की कथा का विशेष आकर्षण श्री खाटू श्याम जन्मोत्सव, छप्पन भोग तथा आरती का आयोजन रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर सरस कथा का आनंद लिया।

अवसर पर सुरेश मोदी, श्रीगोपाल सारड़ा, रमेश कुमार लद्दड़, लक्ष्मीकांत व्यास, रोहित इन्नाणी, रामदेव राठी, रामप्रकाश दरक, श्याम अग्रवाल, चन्द्रप्रकाश बंग, नरसिंग सारड़ा, गोपाल जाजू, विनोद सारड़ा, दिनेश खंडेलवाल, महेश कुमार शर्मा, महेश अग्रवाल, मनमोहन काबरा, श्रीकांत पाराशर, गिरिराज करवा, वेणुगोपाल करवा, विनोद इन्नाणी, सुनील काबरा, श्रीकांत मित्तल, पवन व्यास, रवि पचीसिया, जुगल किशोर कलंत्री, विशाल जोशी, त्रिंबकराव जाधव, विजय कुमार व्यास, ललित अग्रवाल, पन्नालाल शर्मा, रमेश हेडा, नरेश कुमार डोबा, राजेंद्र बहिवाल, प्रह्लाद सारड़ा व अन्य ने योगदान दिया।

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