बरगुलिया से करें होलिका-दहन

बरगुलिया को कई नामों से जाना जाता है, जैसे- बर्बुले, भरभोलिए आदि। ये गाय के गोबर से बने ऐसे उपले होते हैं, जिनके बीच में छेद किया जाता है। इस छेद में रस्सी डालकर माला बनाई जाती है। एक माला में सात भरभोलिए होते हैं। होलिका-दहन के समय यह माला अग्नि में अर्पित की जाती है। भारतीय जन-मानस व संस्कृति में गाय के गोबर का अपना विशेष महत्व है। होली पर भी इसका महत्व देखने को मिलता है।
वहीं इन दिनों प्रसाद के रूप में शक्कर से निर्मित माजम के हार व कंगन बाजारों में खूब बिकते है। इन रंग-बिरंगे माजमों को देखकर राहगीरों के पग रुक जाते हैं। ये साल भर में होली के समय ही दिखते और बिकते हैं। चौराहों और मुहल्लों में कई स्थानों पर होलिका-दहन किया जाता है। मेरा सुझाव है कि होली-दहन एक ही स्थान पर किया जाए, जो पर्यावरण के पक्ष में ज्यादा उपयोगी होगा।
अत: बिना पत्तियों के वृक्षों को बेजान समझकर होलिका-दहन के लिए मत काटें। गोबर के कंडे ही होलिका-दहन में डालने का संकल्प लें। इनके स्थान पर प्लास्टिक के टायर, कचरा आदि मत जलाएँ। ये चीजें पर्यावरण को दूषित करती हैं जिससे विभिन्न प्रकार के रोग लोगों को जकड़ लेते हैं। इसलिए होलिका दहन व होली हुड़दंग में अपनी परंपराओं को अपनाएं और सुरक्षित रहें।
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-संजय वर्मा
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