कुत्तों की हत्या का मामला सर्वोच्च न्यायालय में सुलझाएँ

हैदराबाद, रंगारेड्डी ज़िले के नंदीगामा मंडल के सिम्बायोसिस यूनिवर्सिटी समेत आस-पास के क्षेत्रों में एक ही दिन में 40 कुत्तों की हत्या के मामले में दायर जनहित याचिका पर तेलंगाना उच्च न्यायालय ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह इस याचिका का निपटारा सर्वोच्च न्यायालय में ही करें, क्योंकि आवारा कुत्तों से संबंधित मामले की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में हो रही है।

न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि वह इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है। न्यायालय ने रजिस्ट्री को आदेश दिया कि वह इस याचिका को सर्वोच्च न्यायालय स्थानांतरित करें, क्योंकि कुत्तों से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई फिलहाल वहीं हो रही है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहियुद्दीन की खण्डपीठ ने बुधवार को हैदराबाद के अधिवक्ता वी. ऋषिहास रेड्डी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की, जिसमें 40 कुत्तों की सामूहिक हत्या की घटना के संबंध में पंचायत कर्मचारी के किलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश देने का आग्रह किया गया।

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मूक प्राणियों की रक्षा को लेकर अदालत से तत्काल आदेश की मांग

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने कहा कि एक ही दिन में 40 कुत्तों को मार डाला गया और आवारा कुत्तों की हत्या अभी भी जारी है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि तत्काल उचित आदेश जारी किए जाएँ और इन मूक प्राणियों की जान बचाई जाए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए खण्डपीठ ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि समाचार-पत्रों और सोशल मीडिया में प्रकाशित समाचार के अलावा कुत्तों की हत्या के उनके पास क्या सबूत है।

खण्डपीठ ने याद दिलाया कि विभिन्न राज्यों के उच्च न्यायालयों में चल रहे कुत्तों से संबंधित सभी मामले सर्वोच्च न्यायालय स्थानांतरित कर दिए गए हैं। खण्डपीठ ने स्पष्ट किया कि चूँकि सर्वोच्च न्यायालय मामले की जाँच कर रहा है, इसीलिए वे कोई आदेश जारी नहीं करेंगे। खण्डपीठ ने सुझाव दिया कि इस मामले का समाधान सर्वोच्च न्यायालय में किया जाए। खण्डपीठ ने उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री को जनहित याचिका को सर्वोच्च न्यायालय स्थानांतरित करने का आदेश दिया।

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