मूसी परियोजना से चिंतित हैं पर्यावरण विशेषज्ञ
हैदराबाद, मूसी कायाकल्प परियोजना पर सरकार किसी भी प्रकार के विरोध की परवाह किये बिना आगे बढ़ने की नीति पर चलने की तैयारी में है और अब विपक्षी पार्टियों के अलावा शहर के कुछ पर्यावरणविद् भी इस परियोजना पर चिंता जता रहे हैं। उनकी मांग है कि सरकार किसी भी प्रकार की योजना शुरू करने से पहले पर्यावरणीय चिंताओं पर अपनी नीति स्पष्ट करे।
तेलंगाना और देशभर के पर्यावरणविदों, कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों ने प्रस्तावित परियोजना पर सरकार की जल्दबाज़ी और गरीब श्रमिक वर्ग को हटाने के तौर तरीकों पर चिंता जतायी है। विशेषज्ञों ने परियोजना के कार्यान्वयन की जल्दबाजी की प्रकृति और नदी के किनारे रहने वाले गरीब श्रमिक वर्ग की आबादी को प्रभावित करने वाले संबंधित विध्वंस अभियानों की आलोचना की। नेशनल एलायंस ऑफ पीपुल्स मूवमेंट्स (एनएपीएम) व नेशनल फोरम ऑफ अर्बन स्ट्रगल्स (एसएचआरएएम) द्वारा जारी किए गए संयुक्त बयान में परियोजना की तत्काल और व्यापक समीक्षा की मांग की गई है।
आग्रह किया गया है कि इसे पर्यावरणीय पुनरुद्धार के लिए एक परामर्शी, जन-केंद्रित और पारिस्थितिक रूप से उचित पहल में बदला जाना चाहिए। इस बात पर जोर दिया गया है कि मूसी नदी कायाकल्प परियोजना विस्थापन, भूमि हड़पने या निजीकरण की परियोजना नहीं होनी चाहिए। उनका तर्क है कि यह विस्तृत परियोजना रिपोर्ट या पुनर्वास और पुनर्स्थापन नीति के बिना आगे नहीं बढ़ना चाहिए।
निर्वासित निवासियों के लिए सम्मानजनक आवास की मांग
मेधा पाटकर, सौम्य दत्ता, डॉ. के. बाबू राव, ललिता रामदास, प्रफुल्ल सामंतरा, जसवीन जैरथ उल्लेखनीय कार्यकर्ताओं द्वारा एक संयुक्त खुले बयान पर हस्ताक्षर किए गए हैं। उनका कहना है कि औद्योगिक और म्यूनिसिपल प्रदूषण को समाप्त करके नदी के पारिस्थितिक मुक्त प्रवाह को सुनिश्चित करना स्वागत योग्य है, लेकिन शहरी लोगों को विस्थापित कर परियोजना के बहाने कोई और उद्देश्य साधने का विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मूसी नदी क्षेत्र के सभी निर्वासित निवासियों के लिए सम्मानजनक आवास, आजीविका, शिक्षा और लोकतांत्रिक भागीदारी के अधिकारों को पारदर्शिता के साथ बरकरार रखा जाना चाहिए।
इसमें उन लोगों के लिए पूर्ण पुनर्वास सुनिश्चित करना शामिल होना चाहिए, जिन्हें मनमाने ढंग से विध्वंस के दौरान अन्यायपूर्ण तरीके से बेदखल कर दिया गया था। हस्ताक्षरकर्ताओं ने रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के बारे में अपनी चिंताओं को व्यक्त लिखा है कि तेलंगाना में सामाजिक रूप से न्यायसंगत और समावेशी शासन का वादा करते हुए सत्ता में आने वाली सरकार को किसी भी परियोजना पर अमल करते हुए अपनी नीति के बारे में भी सोचना चाहिए। पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि मूसी नदी कायाकल्प परियोजना को आम लोगों और नदी की आबादी को कम से कम नुकसान पहुंचाए बिना अमल में लाना चाहिए और अनावश्यक बेदखली और भूमि अधिग्रहण से बचना चाहिए। वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए परियोजना का उपयोग नहीं होना चाहिए। ऐसा होने पर स्वैच्छिक संगठन कड़ा विरोध करेंगे।
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