निःशुल्क रोजगार योग्यता प्रशिक्षण प्रदान करेगा ईथेम्स

हैदराबाद, ईथेम्स बिजनेस स्कूल के चेयरमैन कालीप्रसाद गडिराजू ने बताया कि कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सहयोग से ग़रीब और ज़रूरतमंद स्नातकों को निशुल्क रोजगार योग्यता प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके लिए चयन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और 10 जून तक 200 उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।

मुफ्त प्रशिक्षण के लिए गरीबी रेखा के नीचे और कॉमर्स स्नातक अनिवार्य

आज यहाँ मिलाप के साथ बातचीत में कालीप्रसाद ने कहा कि हर साल देश में एक करोड़ स्नातक संस्थानों से बाहर निकलते हैं।

इसके बावजूद विभिन्न कंपनियाँ नौकरी के लिए सही उम्मीदवार पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। 1 करोड में 15 लाख स्नातक इंजीनियरिंग और मेडिकल स्ट्रीम से होते हैं। केवल 15 लाख उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ते हैं हैं।

इनमें से कुछ विदेशों का रुख करते हैं और लगभग 10 लाख एमएनसी या बड़ी कंपनियों में रोजगार पाते हैं। शेष 60 लाख या तो कम वेतन वाली नौकरियाँ करने पर मजबूर होते हैं या फिर बेकार रहते हैं।

इस स्थिति में कौशल सिखाकर अंतर को पाटने के उद्देश्य से छोटे पैमाने पर ही सही उनकी संस्था ने ग़रीब और ज़रूरतमंद विद्यार्थियों को रोजगार योग्य प्रशिक्षण प्रदान करने की पहल शुरू की है। उन्होंने बताया कि इससे पहले 200 विद्यार्थियों को अस्पताल प्रबंधन में प्रशिक्षण प्रदान किया गया था, लेकिन अस्पताल क्षेत्र में स्नातकों योग्य वेतन की संस्कृति के अभाव के चलते उन्हों दूसरे क्षेत्रों में प्रशिक्षण की योजना बनाई है और पहले बैच में प्रवेश शुरू किया गया है।

कालीप्रसाद गडिराजू ने बताया भारत में कौशल संकट की सच्चाई

कालीप्रसाद ने कहा कि वित्तीय अपराधों की रोकथाम के लिए कुछ कंपनियों को विशेषज्ञों की आश्यकता है। इस उद्देश्य से 200 लोगों को अल्पकालिक कौशल कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसमें किसी तरह की फीस नहीं ली जा रही है, लेकिन प्रवेश की शर्तों में गरीबी रेखा के नीचे और संपर्क कौशल सहित कॉमर्स का स्नातक होना अनिवार्य है। उन्होंने बताया इस बैच के बाद अगले महीनों में उन विद्यार्थियों के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं।

कालीप्रसाद ने कहा कि भारत में कौशल संकट गहरा रहा है। 35 वर्ष से कम आयु के 65 प्रतिशत से अधिक भारतीय हैं, लेकिन लेकिन युवाओं में प्रासंगिक कौशल की कमी है।

इसलिए निराशा, अल्परोजगार और उत्पादकता में कमी राष्ट्रीय प्रगति को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि नये युग में रोजगार योग्यता ही नई साक्षरता है। कार्यस्थल में सार्थक योगदान करने की क्षमता आज पढ़ने और लिखने जितनी ही मौलिक है। स्नातक बुनियादी योग्यता, तर्क या अंग्रेजी परीक्षण पास करने में असमर्थ हैं।

कंपनियों को नए कर्मचारियों को फिर से प्रशिक्षित करने के लिए 3-6 महीने खर्च करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में जो माता-पिता वर्षों और बच्चों पर लाखों रुपये का निवेश करते हैं, उनका मोहभंग हो जाता है। इसलिए रोजगार योग्य कौशल प्रशिक्षण की ओर अधिक ध्यान देने की ज़रूरत है।

उन्हों बताया कि जर्मनी और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने कक्षा सिद्धांत को व्यावहारिक प्रशिक्षुता के साथ जोड़ते हुए दोहरी शिक्षा मॉडल को सफलतापूर्वक लागू किया है। वियतनाम ने, जो अब एक उभरता हुआ तकनीकी केंद्र है, शिक्षा को सीधे उद्योग की मांग के साथ जोड़ दिया है। भारत में इन मॉडलों को तत्काल अपनाने की आवश्यकता है।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button