ईवी नीति-2026 : दोपहिया पर ₹30,000 तक सब्सिडी

नयी दिल्ली, दिल्ली में ईवी को लेकर नयी नीति की अधिसूचना जारी होने की तारीख से पहले वर्ष में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने वालों को 30,000 रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है। दिल्ली सरकार द्वारा शनिवार को जारी ईवी नीति-2026 के मसौदे के अनुसार, इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा के लिए पहले वर्ष में 50,000 रुपये से शुरू होने वाला निश्चित प्रोत्साहन प्रस्तावित है, जबकि दोपहिया वाहन खरीदारों को अधिकतम 30,000 रुपये तक का लाभ मिल सकता है।

नीति के अनुसार पात्र दोपहिया खरीदारों को पहले वर्ष में 10,000 रुपये प्रति किलोवाट-घंटा (अधिकतम 30,000 रुपये), दूसरे वर्ष में 6,600 रुपये प्रति किलोवाट-घंटा (अधिकतम 20,000 रुपये) और तीसरे वर्ष में 3,300 रुपये प्रति किलोवाट-घंटा (अधिकतम 10,000 रुपये) की सब्सिडी दी जाएगी। इसके लिए वाहन का (एक्स-फैक्टरी) मूल्य 2.25 लाख रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए।

इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा को बढ़ावा देने के लिए पहले, दूसरे और तीसरे वर्ष में क्रमशः 50,000 रुपये, 40,000 रुपये और 30,000 रुपये के प्रोत्साहन का प्रस्ताव है। यह लाभ नए पंजीकरण के साथ-साथ दिल्ली परमिट वाले पुराने सीएनजी ऑटो के प्रतिस्थापन पर भी लागू होगा।मालवाहक श्रेणी में इलेक्ट्रिक चार-पहिया ई-ट्रक (एन1) के लिए पहले वर्ष में एक लाख रुपये तक, दूसरे वर्ष में 75,000 रुपये और तीसरे वर्ष में 50,000 रुपये तक प्रोत्साहन का प्रस्ताव है।

ईवी चार्जिंग पर जोर, सब्सिडी को बढ़ावा

मसौदे के अनुसार, प्रोत्साहन राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से व्यक्तियों और कंपनी को दी जाएगी, बशर्ते वे दिल्ली के निवासी हों और वाहन राष्ट्रीय राजधानी में पंजीकृत हो। पात्र खरीदारों को सब्सिडी के लिए परिवहन विभाग, दिल्ली सरकार द्वारा अधिसूचित तंत्र के तहत आवेदन करना होगा।

मसौदे के अनुसार, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) और दिल्ली छावनी बोर्ड समेत विभागों, स्वायत्त निकायों और नागरिक एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नयी अवसंरचना परियोजनाएं ईवी-चार्जिंग के लिए तैयार हों और चार्जिंग अवसंरचना स्थापित करने के लिए पर्याप्त विद्युत क्षमता उपलब्ध हो।

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नीति में नागरिक और भूमि-स्वामी एजेंसियों पर यह जिम्मेदारी भी डाली गई है कि वे सार्वजनिक चार्जिंग और ‘बैटरी-स्वैपिंग’ स्टेशन स्थापित करने के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान करें और उनकी योजना व क्रियान्वयन में सहयोग दें। इसके अलावा, मसौदा नीति चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग अवसंरचना के विकास के लिए एक व्यापक ढांचा प्रस्तुत करती है, जिसमें दिल्ली ट्रांस्को लिमिटड को योजना और समन्वय के लिए नोडल एजेंसी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। (भाषा)

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