फिक्की ने आयोजित किया नेट जीरो फोरम का दूसरा संस्करण

हैदराबाद, फेडरेशन ऑफ इंडियन चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) द्वारा नेट जीरो फोरम के दूसरे संस्करण का आयोजन सोमाजीगुड़ा स्थित द पार्क में किया गया। पाथवेज टू अ क्लाइमेट-रिस्पॉन्सिबल फ्यूचर विषयक सम्मेलन में सरकार, उद्योग जगत तथा वैश्विक विशेषज्ञों ने भारत के नेट-जीरो संकल्प के साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और टिकाऊ भविष्य की नींव रखने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद वेंकटेश जोशी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता अब केवल सपना नहीं, बल्कि हकीकत बन रहा है। साथ ही भारत शून्य उत्सर्जन की दिशा में वैश्विक परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की यात्रा अब केवल एक आकांक्षा नहीं रह गई, बल्कि निर्णायक नीतिगत कार्रवाई और तीव्र विस्तार के माध्यम से इसे साकार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत आज चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक बन चुका है।

गैर-जीवाश्म ऊर्जा का बढ़ता योगदान

देश की विद्युत क्षमता का लगभग पचास से पचपन प्रतिशत हिस्सा सौर, पवन, जल तथा परमाणु ऊर्जा सहित गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त होता है। इस परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भारत का लगभग 150 गीगावाट स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता का आंकड़ा छूना है, जिससे एक प्रमुख स्वच्छ ऊर्जा नेता के रूप में इसकी भूमिका मजबूत हुई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नेट-जीरो की ओर बढ़ते भारत के कदम अगले चार वर्षों में करीब 51 लाख हरित रोजगार सृजित होने की संभावना है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय की उस टिप्पणी का भी हवाला दिया, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बदलाव को केवल नीति नहीं, बल्कि मौलिक आवश्यकता बताया गया।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित ब्रिटिश उप उच्चायुक्त गारेथ विन ओवेन ने जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और सतत विकास को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत वैश्विक साझेदारी तथा सहयोगात्मक कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्वच्छ प्रौद्योगिकियों और ऊर्जा परिवर्तन में सहयोग को गति देने के लिए ब्रिटेन-भारत ग्रीन ग्रिड पहल, हरित ऊर्जा संवाद तथा ब्रिटेन-भारत टास्क फोर्स के कार्यों जैसी प्रमुख द्विपक्षीय पहलों पर प्रकाश डाला।

तेलंगाना सरकार के ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव नवीन मित्तल ने स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के प्रति तेलंगाना की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने और औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन में तेजी लाने हेतु नीतिगत प्राथमिकताओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि देश में सालाना लगभग 150 अरब लीटर पेट्रोल और डीजल की खपत होती है। यह आंकड़ा स्वच्छ विकल्पों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है।

सौर-आधारित ई-वाहनों की लागत पर चर्चा

प्रधान सचिव ने कहा कि सौर ऊर्जा से चलने वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियों की लागत मात्र .60 रुपये प्रति किलोमीटर हो सकती है, जबकि जीवाश्म ईंधन से चलने वाली गाड़ियों की लागत लगभग 10 रुपये प्रति किलोमीटर और पारंपरिक इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत 2 रुपये प्रति किलोमीटर है। उन्होंने उद्योग जगत के सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि फिक्की नेट जीरो फोरम जैसे मंच भारत को कम कार्बन वाली अर्थव्यवस्था में बदलने की प्रक्रिया को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

विश्व बैंक समूह के आईएफसी दक्षिण एशिया के वरिष्ठ जलवायु व्यापार विशेषज्ञ राजेश मिगलानी ने विशेष संबोधन देते हुए सतत समाधानों को व्यापक स्तर पर लागू करने में जलवायु वित्त, निजी क्षेत्र की भागीदारी और अभिनव वित्तपोषण तंत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्व बैंक समूह का हिस्सा इंटरनेशनल फाइनांस कॉर्पोरेशन तेलंगाना में नवीकरणीय ऊर्जा, बुनियादी ढाँचे, विनिर्माण और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्रों में निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाले विकास को लगातार समर्थन दे रहा है।

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फिक्की के डॉ. रामबाबू, डॉ. बी. राघवेंद्र राव, वी.वी. रामा राजू सहित अन्य ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि यह फोरम भारत को नेट जीरो अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने की प्रक्रिया को गति देने के लिए गतिशील मंच के रूप में कार्य करता है, जिसमें उद्योग-नीति समन्वय, स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने और लागू किए जा सकने वाले जलवायु समाधानों पर विशेष बल दिया गया है। अवसर पर नेट जीरो के लिए एआई और डिजिटल उपकरणों पर आयोजित एक विशेष कार्यशाला में कार्बन लेखांकन, उत्सर्जन ट्रैकिंग और भविष्यसूचक विश्लेषण में नवाचारों का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में दो सौ से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

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