सऊदी, कुवैत और कतर की रिफाइनरियों में आग से खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा
नई दिल्ली, ईरान युद्ध का आज 20वाँ दिन है। इजरायली और अमेरिकी हमलों से बौखलाए ईरान ने अब खाड़ी देशों पर कहर बरपाना शुरू कर दिया है। इस जंग में अब खाड़ी देशों के तेल भंडार, रिफाइनरीज और अन्य एनर्जी ठिकाने सीधे ईरान के निशाने पर आ गए हैं। ईरान ने कतर, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रमुख गैस और तेल प्रतिष्ठानों पर प्रचंड हमले किए हैं, जिससे न सिर्फ क्षेत्रीय तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है बल्कि इन देशों की रिफाइनरियां धधक रही हैं।
बड़ी बात ये है कि ईरान ने खाड़ी देशों पर ये हमले तब किए हैं, जब कुछ घंटे पहले ही उसे अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि ‘तुम्हें नरक दिखा देंगे।’ दरअसल, ईरान साउथ पार्स स्थित दुनिया के सबसे बड़े अपने गैस क्षेत्र पर इजरायली हमले और पिछले 18 दिनों में चार दर्जन से ज्यादा बड़े नेताओं की हत्या किए जाने से बौखलाया हुआ है। साउथ पार्स ईरान की लगभग 70 प्रतिशत घरेलू गैस की आपूर्ति करता है।
इसक एक हिस्सा, कतर के साथ साझा करता था लेकिन इजरायली हमले में इसे धुआं-धुआं कर दिया गया। इस हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि यह हमला इजरायल ने किया था और चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने और उकसाने वाली कार्रवाई की, तो अमेरिका इस पूरे गैस क्षेत्र को पूरी तरह से तबाह कर देगा।
कतर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी निर्यातक है
हालाँकि ईरान अमेरिकी चेतावनी से डरने के बजाय और आक्रामक हो गया है। उसने कुवैत की मीना अब्दुल्लाह रिफाइनरी पर हमला किया। इसके बाद इस प्लांट में से लग गई। ईरान का दूसरा टारगेट सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको की रिफाइनरी रही है। यह मध्य पूर्व की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है, जिसकी क्षमता लगभग 730,000 बैरल प्रति दिन है। ईरान के मिसाइल हमलों से कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी में स्थित दुनिया के सबसे बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस केंद्र को भारी नुकसान पहुंचा है। है। कतर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी निर्यातक है, ऐसे में इस हमले का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी स्थित रुवैस रिफाइनरी पर भी ईरान ने ड्रोन हमले किए हैं। इसके बाद रुवैस रिफाइनरी ने एहतियात के तौर पर अपना कामकाज रोक दिया है। इसे संचालित करने वाली कंपनी एडनोक ने सीधे तौर पर किसी नुकसान की पुष्टि नहीं की है। वहीं सऊदी अरब के रास तनुरा रिफाइनरी पर भी ड्रोन हमले हुए, जिससे वहाँ आग लग गई और उसे आंशिक रूप से बंद करना पड़ा।

ईरान ने इन हमलों को अपने दक्षिण पार्स गैस क्षेत्र पर हुए हमलों का जवाब बताया है। इससे साफ है कि संघर्ष अब सीधे ऊर्जा अवसंरचना पर केंद्रित हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कतर के गैस प्रतिष्ठानों पर दोबारा हमला हुआ तो ‘भारी जवाब’ दिया जाएगा। कतर ने इस हमले को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा खतरा बताते हुए ईरानी सैन्य व सुरक्षा अधिकारियों को 24 घंटे में देश छोड़ने का आदेश दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन
एलएनजी सप्लाई में बाधा आने से दुनिया भर में गैस संकट गहरा सकता है और कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। इसका सबसे ज्यादा असर एशिया और यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ेगा। बहरहाल, खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा केंद्रों पर हमले यह संकेत दे रहे हैं कि यह युद्ध अब केवल सैन्य टकराव नहीं रहा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करने वाला संकट बन चुका है। अगर जल्द ही हालात नहीं संभले, तो इसका असर पूरी दुनिया में ईंधन, बिजली और उद्योगों पर गहराई से महसूस किया जा सकता है।
अमेरिका एफ35 विमान को निशाना बनाया ईरान ने
ईरान युद्ध के 20वें दिन एक अहम सैन्य घटनाक्रम सामने आया है। खबर है कि ईरान ने पहली बार अमेरिकी स्टील्थ फाइटर जेट एफ-35 को निशाना बनाया है, जिसके बाद अमेरिकी लड़ाकू विमान की आपात लैंडिंग करानी पड़ी है। मामले से जुड़े दो सूत्रों ने बताया कि कि एक एफ-35 लड़ाकू विमान को मिडिल ईस्ट में यूएस के एयर बेस पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी है। माना जा रहा है कि इस विमान पर ईरान की तरफ से हमला किया गया था।
ईरान ने भी दावा किया है कि उसने अमेरिकी फाइटर जेट को निशाना बनाया है। यूएस सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बताया कि पांचवीं पीढ़ी का यह स्टेल्थ जेट ईरान के ऊपर एक कॉम्बैट मिशन पर था, तभी उसे हिट किया गया। इसके बाद जेट की इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। हॉकिन्स ने कहा कि विमान सुरक्षित रूप से उतर गया और इस घटना की जांच की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि ईरानी गोलाबारी से एफ-35 को बड़ा नुकसान पहुँचा है। हॉकिन्स ने आगे कहा कि विमान सुरक्षित रूप से उतर गया और पायलट की हालत स्थिर है। इस घटना की जांच चल रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा पहली बार हुआ है, जब ईरान ने 28 फरवरी से छिड़े इस युद्ध में किसी अमेरिकी फाइटर जेट को निशाना बनाया है। इस विमान की कीमत 100 मिलियन डॉलर यानी 800 करोड़ रुपये से भी ज़्यादा है। (भाषा)
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