सनातन परंपरा में नवरात्रि पर्व आत्मा को भीतर से जगाने का समय माना जाता है। गुप्त नवरात्रि मन की गहराइयों में साधना का अवसर देती है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा की 10 महाविद्याओं की उपासना की जाती है, जिनका संबंध तंत्र, मंत्र, योग और आत्मिक उन्नति से है।
गुप्त नवरात्रि सामान्य नवरात्रि से बिल्कुल अलग होती है। इसमें बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि मन, विचार और कर्म की शुद्धता सबसे अधिक मायने रखती है। यही कारण है कि इस दौरान कुछ ऐसे कार्य होते हैं, जिन्हें करने से साधना का फल अधूरा रह सकता है और वह इस प्रकार हैं।
साधना को गुप्त रखें
इस पर्व के नाम गुप्त नवरात्रि से ही सिद्ध होता है कि इस पूजा की सबसे पहली शर्त गोपनीयता है। यदि आप कोई विशेष मंत्र जप या अनुष्ठान कर रहे हैं, तो इसके बारे में किसी बाहरी व्यक्ति को न बताएं। अपनी पूजा और संकल्प को जितना गुप्त रखेंगे, उतनी ही आध्यात्मिक शक्ति बढ़ेगी। शोर मचाने से साधना का प्रभाव कम हो जाता है।
वाणी नियंत्रण औरा क्रोध का त्याग
मां दुर्गा शक्ति का स्वरूप हैं। गुप्त नवरात्रि के दौरान अपने मन को शांत रखें। किसी को अपशब्द न बोलें और न ही घर में क्लेश करें।
तामसिक भोजन का त्याग
इन नौ दिनों में सात्विकता का पालन करना अनिवार्य है। व्रत नहीं भी रखे हों, तब भी घर में प्याज, लहसुन, मांस या मदिरा का प्रवेश वर्जित होना चाहिए। पहले दिन ही रसोईघर को शुद्ध कर लें। याद रखें, जैसा अन्न वैसा मन। अशुद्ध भोजन आपके विचारों को भी दूषित कर देता है जिससे ध्यान नहीं लग पाता।
ब्रह्मचर्य का पालन और आलस्य का त्याग
गुप्त नवरात्रि आत्मिक उन्नति का समय है। इन नौ दिनों में शारीरिक और मानसिक ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इसके अलावा, दिन के समय सोने से बचना चाहिए। शास्त्रों में पर्व के दौरान दिन में सोना वर्जित माना गया है।
बाल और नाखून काटने से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान बाल, नाखून काटना या दाढ़ी बनवाना निषेध माना गया है।
