किशोरचन्द चौरडिया आई सेंटर सेवा साधना के 25वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है
कहते हैं कि निस्वार्थ सेवा करते हुए जैसे-जैसे समय बीतता है, वही सेवा साधना में परिवर्तित होती जाती है। यह बात एल. चिमनलाल परिवार पर सटीक बैठती है। इसी परिवार द्वारा स्थापित किशोरचंद चौरडिया आई सेंटर, जो एलवी प्रसाद आई इंस्टीट्यूट से जुड़ा है, का उद्घाटन 14 अप्रैल, 2002 को स्व. श्री किशोर चंद चौरडिया की नेक सोच के ज़रिए श्रीमती सायरबाई चौरडिया के मार्गदर्शन में आरंभ किया गया था।
आज यह सेंटर सेवा के सफलतम 24 वर्ष पूर्ण कर 25वें वर्ष में प्रवेश करने जा रहा है। संस्कृत के इस सूत्र सर्वेन्द्रियाणां नयनं प्रधानम् यानी सभी इंद्रियों में आँख सबसे श्रेष्ठ है, में विश्वास रखने वाले किशोरचंद चौरडिया अक्सर पत्नी श्रीमती सायरबाई चौरडिया से कहा करते थे कि अगर भगवान ने उन्हें सक्षम बनाया तो वे नगरद्वय के पुराने शहर के बेगमबाजार में सभी सुविधाओं एवं आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित नेत्र चिकित्सालय खोलेंगे, जहाँ अत्यंत न्यूनतम दरों पर सभी को उच्चकोटि का इलाज प्राप्त हो और जो लोग यह भी देने में असक्षम हों, उन्हें निशुल्क सेवा प्राप्त हो।

श्री चौरडिया के स्वर्गवास के पश्चात श्रीमती सायरदेवी ने अपने पुत्र सुरेन्द्रचंद, महेन्द्रचंद, गौतमचंद, नेमीचंद, धर्मचंद एवं प्रकाशचंद को प्रेरित करके इस चिकित्सालय की स्थापना की। चौरडिया परिवार के सभी सदस्यों की उदारता और समर्पण की सराहना की जाती है कि उन्होंने अपनी माता के आदेश व पिता के स्वप्न को पूरा करने का बीड़ा उठाया और 2002 में 6000 वर्ग फुट की एक स्थायी इमारत और उपकरणों की सुविधा तैयार की।
नई इमारत और अत्याधुनिक उपकरणों से अस्पताल का विस्तार
2025 में 15000 वर्ग फुट की एक और विशाल नई इमारत बनाकर इस प्रोजेक्ट का विस्तार किया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की ज़रूरतों को पूरा करने और उनकी विशेषज्ञता को विकसित करने के लिए विदेश से अत्याधुनिक उपकरण भी उपलब्ध कराए। ग्लूकोमा, रेटिना, कॉर्निया और रिफ्रैक्टिव सर्जरी जैसी विशेषज्ञताएँ विकसित की गई हैं। इन सभी विशेषज्ञताओं से जुड़ी जाँचें बहुत ही कम कीमत पर की जाती हैं।
यहाँ मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, लॉसिक और आईपीसीएल सर्जरी सेवाओं के साथ-साथ मेडिकल रेटिना के लिए विशिष्ठ इंजेक्शन की सुविधा भी उपलब्ध है। ग्लूकोमा की जाँच के लिए नए उपकरणों में एचवीएफ 850 (हमफरी विश्यूल फील्ड एनलाईजर), एन.डी. वीश्यूल याग लेजर और एन.सी.टी. (नॉन कांटेक्ट टोनोमीटर) शामिल हैं।
मेडिकल रेटिना के लिए ओसीटी सायरस एंगियो, फण्डस कैमेरा और बी-स्केन अल्ट्रासाउंड उपलब्ध हैं, जबकि मोतियाबिंद की सर्जरी में इंट्राओक्यूलर लेन्स के मूल्यांकन के लिए आईओएल मास्टर 700 का उपयोग किया जाता है। चौरडिया परिवार के महेन्द्रचंद चौरडिया के अनुसार, देव गुरु धर्म की हम पर कृपा है कि विगत 24 वर्षों में हमने किसी से भी इस अस्पताल हेतु सहयोग अथवा चंदा नहीं लिया, केवल हमारे परिवार द्वारा ही खर्च वहन किया जा रहा है।
लाखों को मिली जीवनदायिनी सेवा
एल.वी. प्रसाद आई इंस्टीट्यूट के मार्गदर्शन में यहाँ अनगिनत मरीज़ों ने मुफ़्त और रियायती दरों पर क्लिनिकल और सर्जिकल सेवाओं का लाभ उठाया है। ये सेवाएँ बिना किसी समझौते के, उच्चतम मानकों और प्रोटोकॉल का पालन करते हुए प्रदान की जाती हैं। यह बात स़ाफ रही है कि हमारी सेवाएँ बिना किसी प्रचार-प्रसार के दी जाती हैं, जो सबसे वंचित समुदायों तक पहुँच रही हैं, जिससे सभी के लिए समान और व्यापक नेत्र देखभाल सुनिश्चित हो रही है।
आज, यह नेत्र पेंद्र करुणा, उदारता और सेवा का एक जीता-जागता प्रमाण है। यह परोपकार की एक दुर्लभ भावना का प्रतीक है, जहाँ एक परिवार का दिल से दिया गया उपहार एक ऐसी नेक विरासत को आगे बढ़ाता है, जो लोगों की आँखों की रोशनी लौटाती है, अनगिनत लोगों के जीवन को बदल देती है और उन लोगों के लिए नए क्षितिज खोलती है, जो इलाज योग्य अंधेपन से प्रभावित हैं।
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पूरी तरह से सेवा और परोपकार की भावना पर निर्मित, यह नेत्र पेंद्र उनके पिता के उस सपने को एक जीवित श्रद्धांजलि है, जो कहता है कि बेहतर दृष्टि के माध्यम से जीवन को बेहतर बनाना। आरंभ से लेकर आज तक 6,57,196 रोगियों को चिकित्सा सेवाएँ प्रदान की गईं, जिनमें 4,90,379 रोगियों (80 प्रतिशत) को निशुल्क सेवाएँ प्रदान की गईं। कुल 65,094 ऑपरेशन किये गये, जिसमें 57,142 रोगियों (88 प्रतिशत) के निशुल्क ऑपरेशन किये गये।
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