तिथि मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख अमावस्या की तिथि 16 अप्रैल, गुरुवार की रात 8 बजकर 11 मिनट पर शुरु हो रही है, जो 17 अप्रैल, शुक्रवार की शाम 5 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगी।
हर माह अमावस्या तिथि आती है। इस तिथि पर पितरों का तर्पण, पिंडदान और पवित्र नदियों में स्नान एवं दान करने का विशेष महत्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह की अमावस्या को वैशाख अमावस्या कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही पितृ दोष दूर होता है।
पितृ तर्पण विधि
अमावस्या की सुबह स्नान करके एक लोटे में शुद्ध जल, गंगाजल, कच्चा दूध और काले तिल मिला लें। दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके जल को अंगूठे और तर्जनी उंगली के बीच के हिस्से से पितरों को अर्पित करें।
पितरों का ध्यान करें। इसके अलावा ॐ पितृभ्य: नम: या ॐ सर्व पितृ देवाय नम: मंत्र का जप कर सकते हैं। इसके बाद हाथ जोड़कर पितरों से प्रार्थना करें कि अगर कोई जाने-अनजाने में गलती हुई हो, तो मुझे क्षमा करें।
अचूक उपाय
नदी के किनारे या घर पर काले तिल मिलाकर जल से पितरों को तर्पण दें। इससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।
पीपल पूजा – इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उसकी परामा करें। मान्यता है कि पीपल में पितरों का वास होता है। इस तिथि पर पीपल के पेड़ की पूजा करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मछलियों को दाना – आटे की गोलियां बनाकर मछलियों को खिलाने से कालसर्प दोष और पितृ दोष के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।
अन्न दान – जरूरतमंद को सत्तू, घड़ा या मौसमी फलों का दान करना इस माह में महादान माना जाता है।
तर्पण करने के बाद मंदिर या गरीब लोगों में विशेष चीजों का दान जरूर करें। माना जाता है कि दान करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और व्यक्ति को जीवन में सभी सुख मिलते हैं।
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अमावस्या तिथि पर पूजा-अर्चना करके अपनी श्रद्धा अनुसार अन्न, वस्त्र, साबुत उड़द दाल और कंबल आदि का दान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन चीजों का दान करने से व्यक्ति पर पूर्वजों की कृपा बरसती है और जीवन में आ रहे दुःख दूर होते हैं। इसके साथ ही शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
