स्व-श्रवण से सह-श्रवण तक

हममें से अधिकांश लोग पैदाईशी अच्छे श्रोता नहीं होते हैं, क्योंकि किसी की बात सुनना एक अधिग्रहीत कौशल है जिसके लिए हमें अथक प्रयास एवं ध्यान देने की आवश्यकता होती है। इसके लिए सर्वप्रथम हमें कम बोलने की आदत डालनी चाहिए ताकि हम दूसरों की बात सुन व समझ सकें। वास्तविक जीवन में क्या होता है, यह हम नहीं जानते हैं। अधिकतर लोग सामने वाले की बात सुनने के बजाय निरंतर अपनी बकबक में ही रुचि रखते हैं। हम कोई बात कहने लगते हैं, तो इस इंतजार में रहते हैं कि कब यह अपनी बात पूरी करे और मैं अपना शुरू करूँ।
कुछ लोगों को बातचीत के दौरान बीच में बोलने की आदत होती है, जिससे सामने वाला अपनी बात पूरी कर ही नहीं पाता है और खुद को अपमानित महसूस करके अपने मन की बात मन में ही दबा लेता है। इसलिए व्यक्तिगत बातचीत के दौरान द्वै-संचार के बजाय सरलीकृत संचार प्रतिक्रया का अनुसरण करने में समझदारी होती है ताकि सामने वाला अपनी बात शांति से कह सके और सुनने वाला बिना किसी रुकावट के उसकी बात सुनकर उसके आत्मविश्वास के स्तर को बढ़ाए।
यदि दोनों ही व्यक्ति एक समय ही अपनी बात रखेंगे तो दोनों में से किसी को कुछ समझ में नहीं आएगा और बेवजह एक गलतफहमी का माहौल पैदा हो जाएगा। अक्सर यह देखा गया है कि अधिकांश लोग अतीत में किसी व्यक्ति के साथ हुए बुरे अनुभव को याद करके भविष्य में उससे वही पूर्वाग्रह ग्रस्त मन से व्यवहार करते हैं जिसका खामियाजा दोनों ही तरफ से उन दोनों को ही भुगतना पड़ता है। ऐसी परिस्थिति में भूल जाओ और म़ाफ करो वाला मंत्र काफी मददगार सिद्ध हो सकता है, किन्तु क्या यह इतना आसान है?
एकांत में आत्मचिंतन से शांति, प्रेम और सकारात्मकता
आध्यात्मिक सिद्धांतों के अनुसार, यदि हम स्व-श्रवण की अनूठी कला सीख लें, तो कई लोगों का दिल जीत सकते हैं। इसके लिए हमें प्रतिदिन कुछ समय एकांत में बैठकर स्वयं को माथे के मध्य स्थित चेतन आत्मा के रूप में देखना व महसूस करना होगा। शांति, प्रेम और खुशी के मूल गुणों को अनुभव करना होगा। इस तकनीक का प्रतिदिन अभ्यास करने से हमारे जीवन में आमूलचूल परिवर्तन आएगा।

हमें अपने भीतरी विचारों को सुनने का अवसर प्राप्त होगा, जिससे हम अपनी नकारात्मक प्रवृत्तियों को दूर कर सकेंगे। यदि इस कला को सिख लें तो स्वाभाविक रूप से हर किसी की बात को धैर्य से सुन सकेंगे और उन्हें उपयुक्त समाधान दे सकेंगे, तो चलिए, आज से ही स्व-श्रवण करना शुरू करें और हर एक के प्रति शुभ-भाव रखते हुए उन्हें मदद करने की भावना रखें।
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