सिकंदराबाद संघ में तप त्याग से मनाया गया गणेशलालजी म.सा. का जन्मोत्सव

हैदराबाद, श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, सिकंदराबाद द्वारा साध्वी डॉ. सुमंगलप्रभाजी म.सा. आदि ठाणा के सान्निध्य में कर्नाटक गजकेसरी गणेशलालजी म.सा. का 146वाँ जन्मोत्सव तप त्याग के साथ मनाया गया। सिकंदराबाद मारुति विधि जैन स्थानक में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. सुमंगलप्रभाजी म.सा. ने कहा कि गणेशलालजी म.सा. का 146वाँ जन्मोत्सव उत्साह के साथ मनाया गया। गुरुदेव का व्यक्तित्व-कृतित्व बहुत ही महान था।

वह बड़े भाग्यशाली हैं, जिन्होंने उनके दर्शन कर आत्मा को पवित्र पावन किया। गणेशलालजी म.सा. उच्च कोटि के साधक थे। वह कठोर संयमी जीवन को जीने वाले थे, परंतु भीतर से अत्यंत दयालु, कृपालु और करुणाशील थे। आपके जीवन में सरलता, सहजता, सहिष्णुता संयम की कठोरता साकार रूप से जीवंत थी। भक्तिपूर्वक जो भी उनके चरणों में पहुँचता, उसके बिना मांगे हर बात को समझ जाते थे। गुरुदेव ने अपनी मुस्कान से मानवता को जीवंत किया और कई गुमराहों को सही मार्ग दिखाया।

म.सा. ने कहा कि संसार में दो प्रकार के बाग होते हैं। इनमें एक भौतिक और दूसरा आध्यात्मिक बाग है। भौतिक बाग में व्यक्ति परिवार के साथ घूमता-फिरता और आनंदित होता है और वापस घर लौट आता है। इसी तरह आध्यात्म के बाग में चार सद्गुरु होते हैं, जहाँ व्यक्ति अपने धर्ममयी जीवन की शुरुआत करता है। जीवन को कैसे बनाना है और कैसे जीना है, इसका मार्गदर्शन प्राप्त करता है।

गुरुदेव गणेशलालजी की तप और करुणा की प्रेरणा

ऐसी विरल विभूतियों की श्रीचरणों में जो भव्य आत्मा श्रद्धालु पहुँच गया, वह कभी खाली लौटकर नहीं आया। गुरुदेव की साधना बड़ी अजब-गजब थी। ऐसे तपोयोगी गणेशलालजी की ज्ञान की प्रचंड अग्नि से अज्ञान के अधंकार को मिटाने का भरसक प्रयास किया था। उसी के साथ उनके भीतर में ऐसी तप की ज्वाला थी, जो आस-पास में फैली हुई कलुषता, हिंसा, विलासिता को भस्म कर करुणा, दया, प्रेम, सदाचार, त्याग, वैराग्य की ज्योति को जगाकर लोगों के जीवन को रौशन करती थी।

म.सा. ने कहा कि गणेशलालजी म.सा. को खादी से मोह था, इसलिए खादी को आदर्श मानते थे। गौशाला का निर्माण करवाया, जीव दया के लिए ऐसा अनुष्ठान चलाया कि जीव दया का प्रतीक कहे गये। अपनी दया और करुणा से मूक प्राणियों को कत्ल होते हुए बचाने का कार्य किया। मूक प्राणियों के लिए गौशालाएँ खोली। म.सा. ने कहा कि आज ज्ञान पंचमी है, जिसे लाभ पंचमी, श्रुत पंचमी भी कहा जाता है।

ऐसे तो माह में दो पंचमी आती हैं, लेकिन इनमें नाग पंचमी, ऋषि पंचमी और बसंत पंचमी और आज ज्ञान पंचमी, लाभ पंचमी व श्रुत की पंचमी है। इस पंचमी के दिन 527 साधकों ने एक साथ संयम जीवन अंगीकार किया था। म.सा. ने कहा कि मनोहरकंवरजी का 64वाँ दीक्षा दिवस है। गुरु माता ने जीवन को निखराकर स्वाध्याय से ओत प्रोत किया। वह संयम साधिका थीं। संयम के प्रति सजग सावधान रहने वाली थीं। गुरुवर्या को कोटि-कोटि वंदन।

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ज्ञान पंचमी पर सरस्वती जाप और प्रभावना आयोजन

सभा का संचालन करते हुए महामंत्री सुरेन्द्र कटारिया ने बताया कि धर्म सभा में चेन्नई, बेंगलुरू, मेड़ता, अजमेर, गुड़गांव, नागौर, रायपुर से दर्शनार्थी पधारे, जिनका संघ की ओर से अभिनंदन और स्वागत किया गया। पूनम बोहरा, संतोष गुगलिया ने गीतिका प्रस्तुत की। विमल पितलिया ने गुरुदेव के प्रति भाव व्यक्त किए। संघपति संपतराज कोठारी ने बताया कि गणेशलालजी म.सा. की 146वीं जन्म जयंती एवं गुरुमाता मनोहरकंवरजी म.सा. का 64वाँ दीक्षा दिवस सामायिक का तेला दिवस, गुणगान एवं एकासना से मनाया गया।

गुरुदेव की प्रेरणा से प्रति अमावस को पॉट मार्केट का बाजार बंद रहता है। भोनगिरि में पावन धाम का जब निर्माण हुआ, तब जालना से रज लाकर धाम में समाधि स्थल पर रखा गया। उसकी ऊर्जा से कई श्रद्धालुओं को लाभ मिल रहा है। अवसर पर एकासना की व्यवस्था और गौतम प्रसादी का आयोजन संघ की ओर से किया गया। तेले तप करने वालों को प्रभावना लाभार्थी मिश्रीलाल गौतमचंद नवरतन प्रवेश श्रवण गुगलिया परिवार की ओर से दी गई। बत्तीस आगम पर एक संदेश के रूप में नमो विहार सेवा ग्रुप ने प्रस्तुति दी।

अध्यक्ष गौतमचंद गुगलिया ने बताया कि आज ज्ञान पंचमी पर सरस्वती जाप का आयोजन आयोजक नमो विहार सेवा ग्रुप द्वारा किया गया। इसमें लाभार्थी गणपतराज, विनोद कुमार, अशोक सिंघवी परिवार, श्री अंबेश गुरु मेवाड़ संघ/महिला मंडल तथा श्री मांगीलाल सुरेन्द्र कुमार मखाना परिवार की ओर से प्रभावना दी गई।

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