जीएचएमसी : इलेक्ट्रॉनिक और मेडिकल कचरे का शत प्रतिशत संग्रहण
हैदराबाद, जीएचएमसी आयुक्त आर.वी. कर्णन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ग्रेटर हैदराबाद क्षेत्र में ई-वेस्ट और बायो-मेडिकल वेस्ट का शत-प्रतिशत संग्रह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी परिस्थिति में बायो-मेडिकल कचरे को नगर निगम के ठोस अपशिष्ट के साथ मिश्रित नहीं किया जाना चाहिए। नियमों के उल्लंघन पर संबंधित लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जीएचएमसी मुख्यालय में सफाई एवं स्वच्छता से जुड़े हितधारकों के साथ आयोजित बैठक में आयुक्त कर्णन ने कहा कि वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन को सुदृढ़ करना 99 दिवसीय कार्ययोजना का हिस्सा है। यह योजना मल्काजगिरी और साइबराबाद नगर निगम परिधि में भी लागू की जा रही है। बैठक में ई-वेस्ट रीसाइक्लर्स, बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट सुविधा संचालक तथा सीएसआर भागीदार उपस्थित थे।
आयुक्त कर्णन ने कहा कि बायो-मेडिकल कचरे के संग्रह एवं निस्तारण में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्धारित नियमों के अनुसार कचरा नहीं उठाने वाली पंजीकृत संस्थाओं को नोटिस जारी कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि जीएचएमसी, सहायक चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर अस्पतालों एवं स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन नियमों तथा यूजर चार्ज मानकों का पालन सुनिश्चित करेगा। उन्होंने सभी हितधारकों से शहर को स्वच्छ एवं पर्यावरणीय रूप से सतत बनाए रखने में सहयोग की अपील की।
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सहभागी संस्थाएँ केंद्रों पर प्रतिनिधि तैनात कर समन्वय करेंगी
एमएमसी आयुक्त टी. विनय कृष्णा रेड्डी ने ई-वेस्ट संग्रहण की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रत्येक सर्कल में विशेष संग्रहण केंद्र स्थापित किए जाएँगे, ताकि नागरिक स्वेच्छा से ई-वेस्ट जमा कर सकें। क्योर सीमाओं के अंतर्गत आने वाले 300 वार्डों में प्रत्येक शनिवार और रविवार को वार्ड स्तर पर विशेष संग्रहण अभियान चलाए जाएँगे।उन्होंने सुझाव दिया कि सहभागी संस्थाएँ विशिष्ट सर्कल और वार्डों के साथ समन्वय कर संग्रहण केंद्रों पर प्रतिनिधि तैनात करें।
कंपनियों को जनभागीदारी बढ़ाने के लिए कूपन या प्रत्यक्ष भुगतान जैसे प्रोत्साहन देने के लिए प्रोत्साहित किया गया। जीएचएमसी अतिरिक्त आयुक्त रवि किरण ने स्पष्ट किया कि संग्रहण अभियानों के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएँ जैसे वार्ड कार्यालय और निर्धारित केंद्र जीएचएमसी द्वारा उपलब्ध कराई जाएँगे, किंतु मूल्य निर्धारण, भुगतान और प्रोत्साहन संबंधी निर्णय पूर्णत सहभागी कंपनियों द्वारा लिए जाएँगे। इनमें निगम का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
बैठक के दौरान कई संगठनों ने एकत्रित ई-वेस्ट के बदले यूपीआई या नकद के माध्यम से प्रत्यक्ष भुगतान करने पर सहमति व्यक्त की, जबकि कुछ अन्य ने सीएसआर पहल के अंतर्गत रिडीमेबल कूपन वितरित करने का आश्वासन दिया। यह भी प्रस्तावित किया गया कि खुदरा विक्रेता उन घरों की जानकारी साझा करें, जिनके पास ई-वेस्ट उपलब्ध है, ताकि समन्वित डोर स्टेप संग्रहण संभव हो सके। बैठक में जीएचएमसी अतिरिक्त आयुक्त प्रियंका अला, रघु प्रसाद, एसई सृजनाश्री, ई-वेस्ट रीसाइकिलिंग कंपनियों तथा बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
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