जीआई ऑन व्हील्स- राज्य की कलाओं का प्रचार करेंगी आरटीसी बसें
हैदराबाद, तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों पर राज्य की कुछ प्रमुख कलाओं के प्रचार के लिए शुरू किये गये कार्यक्रम जीआई ऑन व्हील्स का उद्घाटन शुक्रवार को राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने किया। महात्मा गांधी बस स्टेशन (एमजीबीएस) में आयोजित कार्यक्रम में परिवहन व बीसी कल्याण मंत्री पोन्नम प्रभाकर, टीजीएसआरटीसी के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नागीरेड्डी तथा हैदराबाद जिला कलेक्टर हरि चंदना दासरी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए जिष्णुदेव वर्मा ने कहा कि युवा राज्य के रूप में तेलंगाना को अपनी सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करना चाहिए। संस्कृति को समाज की आत्मा बताते हुए उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक जागरूकता के बिना सतत विकास संभव नहीं है। जीआई ऑन व्हील्स पहल का मुख्य उद्देश्य भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्राप्त कला रूपों के प्रति जनता में जागरूकता बढ़ाना और उनका व्यापक प्रचार-प्रसार करना है। ऐसे कार्यक्रम युवाओं को पारंपरिक कलाओं की ओर प्रेरित करेंगे तथा शिल्पकारों को अधिक पहचान दिलाएँगे।
जीआई टैग उत्पादों के संवर्धन और विपणन पर जोर
मंत्री पोनम प्रभाकर ने कहा कि यह कार्यक्रम राज्यपाल की दूरदर्शी पहल का परिणाम है। सरकार जीआई टैग युक्त उत्पादों के संवर्धन, विपणन और विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इस तरह के प्रयास ग्रामीण कारीगरों के लिए आजीविका के अवसर सृजित करेंगे और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाएँगे। साथ ही उन्होंने इस पहल को राज्य में विस्तारित करने में टीजीएसआरटीसी की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम के अंतर्गत तेलंगाना के छह प्रमुख जीआई-टैग हस्तशिल्पों को बसों पर कलात्मक रूप से प्रदर्शित किया गया है, जिनमें पोचमपल्ली इकत, वरंगल दरी (कार्पेट), करीमनगर सिल्वर फिलिग्री, नारायणपेट साड़ियाँ, चेरियाल क्रॉल और निर्मल पेंटिंग्स शामिल हैं। तेलंगाना के शिल्पकारों की कौशल कारीगरी का प्रतिनिधित्व करने वाली यह कला रूप अब सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से शहरों और गाँवों तक व्यापक पहचान प्राप्त करेंगी।
मंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रचार के लिए रचनात्मक मंच में परिवर्तित करना है। टीजीएसआरटीसी के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नागीरेड्डी ने कहा कि यह पहल तेलंगाना की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हुए राज्यपाल की परिकल्पना से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि बसों पर जीआई कला का प्रदर्शन संस्कृति को आम जनता के और निकट लाएगा तथा शिल्पकारों को प्रोत्साहित करेगा। बसों पर प्रदर्शित डिज़ाइन जवाहरलाल नेहरू आर्किटेक्चर एंड फाइन आर्ट्स यूनिवर्सिटी (जेएनएएफएयू) के विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए हैं।
विद्यार्थियों को प्रदान किए गए नकद पुरस्कार और स्मृति चिह्न
अवसर पर विद्यार्थियों को नकद पुरस्कार व स्मृति चिह्न प्रदान किए गए। जीआई मान्यता प्राप्त कराने में योगदान देने वाले शुभजीत साहा को सम्मानित किया गया। साथ ही छह जीआई शिल्पों का प्रतिनिधित्व करने वाले कारीगरों का सम्मान किया गया। राज्यपाल, मंत्री, जिला कलेक्टर और टीजीएसआरटीसी अधिकारियों ने संयुक्त रूप से जीआई हस्तशिल्पों से सुसज्जित विशेष बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
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कार्यक्रम में टीजीएसआरटीसी के कार्यकारी निदेशक राजशेखर, खुसरो शाह खान, क्षेत्रीय प्रबंधक श्रीलता, सुधा परिमला, जेएनएएफएयू के प्रतिनिधि, कारीगर तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे। भौगोलिक संकेत (जीआई) सामूहिक बौद्धिक संपदा अधिकार है, जो किसी उत्पाद को उसके विशिष्ट क्षेत्र से उत्पन्न होने और उसकी विशेषताओं, कौशल तथा परंपराओं से जोड़कर पहचान प्रदान करता है। वर्तमान में तेलंगाना के पास 18 जीआई-टैग उत्पाद हैं। जीआई मान्यता पारंपरिक कला एवं विरासत के संरक्षण, ऩकल की रोकथाम, शिल्पकारों को पहचान दिलाने तथा सतत आजीविका सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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