भगवान सकाम नहीं, निष्काम भक्ति को करते हैं स्वीकार : यति किशोरीजी
हैदराबाद, भगवान सकाम नहीं, बल्कि निष्काम भक्त को स्वीकार करते हैं। जीवन में यदि भक्ति करनी है, तो नरसी मेहता जैसी करो, जिन्होंने निष्काम भाव से भक्ति की और पूर्ण रूप से सांवरिया सेठ के चरणों पर समर्पित हो गये, जिससे उनके हर कार्य पूर्ण हुए।

उक्त उद्गार सीतारामबाग स्थित द्रौपदी गार्डन में भाग्यनगर मारवाड़ी युवा मंच द्वारा आयोजित नानी बाई रो मायरो के प्रथम दिवस कथा की महत्ता बताते हुए कथावाचक यति किशोरीजी ने व्यक्त किये। किशोरीजी ने कहा कि संसार के व्यक्ति की यही कामना रहती है कि मैं और पूरा परिवार अच्छा है, लेकिन यदि मन अच्छा नहीं, तो परिवार अच्छा होने का भी कोई फायदा नहीं। संसार का सारा खेल मन के ऊपर है।
मन कहेगा तो सभी कार्य करेंगे, नहीं तो कुछ भी नहीं। आज के युग में मनुष्य का मन बिगड़ा हुआ है, तो वह सोचता है भले ही मेरी एक टांग टूट जाए, पर दुश्मन की दोनों टूटी हो। ऐसा सोचते हैं, तो मन खराब है। तीन दिन की नरसी मेहता की कथा सुनेंगे, तो ठाकुरजी बिगड़ा मन भी सही कर देंगे। धरती के लोगों की मानसिकता रहती है कि अच्छे कर्म कर स्वर्ग में जाएँ, लेकिन स्वर्ग में जाकर क्या करेंगे, वहाँ भी तब तक ही रहेंगे जब तक पुण्य है।
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पुण्य समाप्ति पर 84 लाख योनियों से पुनर्जन्म का सिद्धांत
पुण्य समाप्त होते ही 84 लाख योनियों से भटककर संसार में आना पड़ेगा। स्वर्ग में केवल भगवान का धाम ही ऐसा है, जहाँ यदि एक बार व्यक्ति चला गया, तो संसार में वापस नहीं आना पड़ता। व्यक्ति को वहाँ जाने के लिए केवल भगवान की भक्ति करनी होगी। भगवान की भक्ति से ही भगवान का धाम मिलेगा। भगवान के बड़े-बड़े भक्त हुए मीरा बाई, नरसीजी, कर्मा बाई। कर्मा बाई भगवान को खिचड़ा खिलाती थी। कर्माबाई भी निष्काम भक्त थी।
माता शबरी ने श्रीराम को प्रेम, श्रद्धा और सेवा की दृष्टि से देखा। किशोरजी ने कहा कि जब हम भक्ति करते हैं, तो भगवान परीक्षा लेने के लिए प्रतिकूलता, दुख देते हैं और जो उस घड़ी में भी भगवान का साथ नहीं छोड़ता, केवल भगवान पर भरोसा करता है, वह परीक्षा में पास हो जाता है। शबरी ने सालों तक श्रीराम का इंतजार किया। जब श्रीराम आये तो प्रेम भरे बेर अर्पित किये। श्रीराम ने केवल शबरी का प्रेम देखा न कि यह बेर कैसे थे देखा। जीवन में यदि उद्देश्य गलत हो, तो भगवान सामने होने पर भी प्राप्ति नहीं होती है। जिस प्रकार सूर्पनखा ने प्रभु को वासना एवं काम की दृष्टि से देखा, तो सामने भगवान रहते हुए भी नहीं दिखे।
किशोरीजी ने कहा कि भक्ति करनी है, तो नरसी मेहता जैसी निष्काम भक्ति करें। नरसीजी कभी भी भगवान से कुछ नहीं मांगते। हम तो फिर भी कुछ ने कुछ शर्तों के आधार पर प्रभु से माँग लेते हैं। भगवान मन्नत पूरी करें, तो ही प्रसाद चढ़ाते हैं। नरसीजी ने कहा कि वैष्णव जन वही है, जो दूसरे की पीड़ा को अपनी समझे। हिन्दू वही है, जिसके हृदय में हिंसा को देखकर पीड़ा होती है। किशोरजी ने कहा कि नरसी का जन्म गुजरात के छोटे गांव तडाजा में हुआ।
नानी बाई रो मायरो कार्यक्रम में प्रमुख यजमान और सहयोगियों की भागीदारी
नरसीजी का परिवार व्यवसाय-कामकाज के सिलसिले में जूनागढ़ आ गया। पिताजी का श्रीकृष्ण दामोदरदास मेहता व माँ का नाम लक्ष्मी गौरी था। गुजरात में महामारी के कारण नरसीजी का माता-पिता का देहांत हुआ। नरसीजी जन्म से गूंगे और बहरे थे, न बोल सकते थे, न सुन सकते थे। दादीजी संतों, मंदिरों के चक्कर लगाती थीं कि नरसी मेहता पर प्रभु की कृपा हो जाए, लेकिन शिवरात्रि के दिन एक संत की कृपा से गूंगे नरसीजी को सबसे पहले राधे कृष्ण बोलना सिखाया। इस प्रकार नरसीजी मेहता राधा कृष्ण के परम भक्त बने।
अवसर पर मुख्य यजमान राजाराम कमल काबरा, परामर्शदाता नरेन्द्र कुमार गोयल, यजमान शिरीष सुनील भट्टड़, श्याम कुमार गुप्ता, श्यामसुन्दर रामेश्वर डालिया, दैनिक प्रसादी यजमान ठाकुर भगत सिंह, रजनी प्रदीप माथुर, अमित मूंदड़ा, विष्णुकांत अंकित राठी, बृजगोपाल भूतड़ा, बालाजी महेश मिठाई भंडार, गोपीलाल लक्ष्मीनारायण बजाज, किशनगोपाल जगदीश मणियार, प्रधान संयोजक भरत चांडा, कार्यकारिणी सदस्य सुनील भट्टड़, संजय चांडक, सीएस नितिन बजाज, सुनील तिवारी, विनोद बंग, धीरज धूत, राहुल मर्दा, कृष्णा मालानी, अनूप तोतला, सीए लक्ष्मीनारायण धूत, कन्हैया बियानी, कृष्णा तिवारी, कन्हैया बजाज, सीए जगदीश मणियार, सौरभ राठी, सीए लक्ष्मीकांत भूतड़ा, अंकित राठी, दिनेश तोतला, रामेश्वर डालिया, हरदीप खट्टोड़, श्रीकांत बजाज, सीए नवनीत दरक, एडवोकेट अक्षय मंत्री, रौनक सोनी, रमेश राठी, श्रीगोपाल भट्टड़, गोपाल तापड़िया, सीएस शिव झँवर, रमन लोया, राहुल फोफलिया, विष्णु भांगड़िया, अजय तिवारी, सागर मालू, एडवोकेट सिद्धार्थ गिल्डा सहित अन्य ने सहयोग दिया।
कथा में कैलाश नारायण भांगड़िया, रामकिशोर सोनी, रामनिवास जाजू, लक्ष्मीनारायण काबरा, बालाप्रदास लड्डा, विजय राठी, सुरेश गांधी, बद्री विशाल मालानी, पवन परतानी, मुख्य यजमान राजाराम कमल काबरा, दैनिक यजमान रजनी प्रदीप माथुर, गोपीलाल लक्ष्मीनारायण काबरा, श्याम कुमार गुप्ता, गोवर्धन, द्वारकाप्रसाद काबरा आदि का सम्मान किया गया।
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