परमात्मा हमेशा हमारे साथ हैं

हम सब अपने जीवन में कभी न कभी यह महसूस करते हैं कि इस दुनिया में हम अकेले हैं। यह अकेलापन इसलिए मससूस होता है, क्योंकि जीवन में आई तकलीफों से हम घबरा जाते हैं और उस समय हमें लगता है कि हमारी कोई मदद नहीं कर रहा है। ऐसी अवस्था में हमें पिता-परमेश्वर की याद आती है और हमारा ध्यान उनकी ओर जाता है। कई बार हम कोई ऐसा कार्य करने की कोशिश करते हैं, जिसमें सफलता नहीं मिलने की उम्मीद होती है, किंतु हम पाते हैं कि प्रभु की दिव्य-शक्ति रहस्यमय तरीके से हमारी सहायता कर रही है और हम उस कार्य में सफल हो जाते हैं।

यदि हम सोचें कि हमने अपने दैनिक जीवन में कितनी बार ऐसे कार्यों में सफल होने का प्रयास किया है तो हम देखेंगे कि उस स्थिति में अक्सर हमारा मन हार मान लेता है क्योंकि हमें लगता है कि हमारे पास इसे करने की ताकत ही नहीं है, लेकिन प्रभु की दयामेहर से सब कुछ ठीक-ठाक हो जाता है। हम अक्सर यह सोचते हैं कि जीवन की चुनौतियों का सामना अकेले ही करना होगा। लेकिन यह नहीं जानते कि कैसे पिता-परमेश्वर की दिव्य-शक्ति हमेशा हमारे साथ रहती है।

जीवन की कठिनाइयों में पिता-परमेश्वर की शक्ति का साथ

जब हमें लगता है कि हमारे जीवन में सब गलत हो रहा है तो उसी समय पिता-परमेश्वर की वह शक्ति हमारी मदद करती है और हम जीवन की चुनौतियों का सामना बड़ी आसानी से कर लेते हैं। हमें हर समय यह याद रखना चाहिए कि परमात्मा हमेशा जीवन के हर मोड़ पर हमारे साथ हैं। अगली बार जब भी हम अपने आपको असहाय और अकेला महसूस करें, तब हमें यह याद रखना चाहिए कि पिता-परमेष्वर हमेशा हमारे साथ है और हर पल व हर क्षण हमसे न सिर्फ प्यार करते हैं बल्कि हमारी रक्षा भी करते हैं।

इसके अलावा किसी भी कार्य में तमाम कोशिशों के बावजूद भी सफलता नहीं मिल रही हो तो उस अवस्था में भी हमें यह समझना चाहिए कि पिता-परमेश्वर नहीं चाहते कि हमें वह चीज़ मिले। उस समय के लिए तो हम उदास हो जाते हैं कि पिता-परमेश्वर ने हमारी प्रार्थना नहीं सुनी, लेकिन कुछ सालों बाद यह अहसास होता है कि अच्छा हुआ कि पिता-परमेश्वर ने हमें वह चीज़ नहीं दी, नहीं तो हम और दुःखी व परेशान हो जाते।

संत राजिन्दर सिंह महाराज

इसलिए हर अवस्था में हमें पिता-परमेश्वर द्वारा दी गई सहायता और मार्गदर्शन के लिए उनका आभार प्रकट करना चाहिए और इसका सबसे अच्छा तरीका ध्यान-अभ्यास है, जिसमें हम मौन अवस्था में बैठकर पिता-परमेश्वर का नाम लेते या उन्हें याद करते हैं। इससे हम अपने अंतकरण से प्रभु की शक्ति से जुड़ जाते हैं और तब हमें अहसास होता है कि हम इस दुनिया में अकेले नहीं हैं और पिता-परमेश्वर हमेशा हमारे साथ हैं।

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