ऑनलाइन विज्ञापन मामले में गूगल को झटका
सिडनी, प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी गूगल को अमेरिका में एक और कानूनी झटका लगा है, उसे एक ऐतिहासिक प्रतिस्पर्धा-विरोधी मुकदमे में हार का सामना पड़ा है। यह घटना पिछले वर्ष कंपनी को इसी प्रकार के एक मामले में हुई हानि के बाद हुई है। सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मेटा भी वर्तमान में अमेरिका में एक ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई में उलझा हुई है, जो न केवल इसके संचालन के तरीके को बदल सकती है, बल्कि दुनिया भर में लाखों लोग किस प्रकार संवाद करते हैं यह भी तय करने की ताकत रखती है।
मेटा मामले की सुनवाई इस सप्ताह के प्रारंभ में वाशिंगटन डीसी की एक अदालत में शुरू हुई, जब मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मार्क जुकरबर्ग 45 करोड़ अमेरिकी डॉलर में मामला निपटाने में असफल रहे। अमेरिकी संघीय व्यापार आयोग (एफटीसी) की ओर से दायर इस मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि मेटा ने प्रतिस्पर्धा विरोधी कानूनों को तोड़ा है और अवैध रूप से सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर एकाधिकार हासिल किया है। गूगल और मेटा के साथ-साथ अमेजन और एप्पल भी वर्तमान में अमेरिका में गंभीर प्रतिस्पर्धा विरोधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्वाचन के परिणामस्वरूप एफटीसी और अमेरिकी न्याय विभाग दोनों में बड़े बदलावों के बावजूद ये सभी कार्रवाइयां जारी हैं। सामूहिक रूप से, ये मामले बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों की बाजार शक्ति की जांच करने और संभावित रूप से उस पर अंकुश लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण विनियामक प्रयास का प्रतिनिधित्व करते हैं।
गूगल के खिलाफ मामले—
गूगल ने जो मामला हारा वह ऑनलाइन विज्ञापन से संबंधित था। अमेरिकी न्याय विभाग ने आरोप लगाया है कि गूगल ने जटिल डिजिटल विज्ञापन प्रौद्योगिकी बाजार पर एकाधिकार करने के लिए प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहार किया है। यह बाजार ऑनलाइन विज्ञापनों की खरीद-बिक्री की सुविधा प्रदान करता है।
अमेरिकी जिला न्यायाधीश लियोनी ब्रिंकमा ने इस बात पर सहमति जताई कि ऑनलाइन प्रकाशकों द्वारा विज्ञापन स्थान उपलब्ध कराने के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरणों तथा ऑनलाइन प्रकाशकों और विज्ञापनदाताओं के बीच लेन-देन को सुगम बनाने वाले सॉफ्टवेयर पर गूगल का एकाधिकार है।
अपने फैसले में न्यायाधीश ब्रिंकमा ने कहा कि गूगल ने “जानबूझकर प्रतिस्पर्धा-विरोधी कृत्यों की एक श्रृंखला में भाग लिया” जिसके परिणामस्वरूप अंततः उसे “ओपन-वेब डिस्प्ले प्रकाशक विज्ञापन सर्वर बाजार में एकाधिकार शक्ति” प्राप्त हुई।
गूगल ने कहा है कि वह इस फैसले के खिलाफ अपील करेगा। न्याय विभाग अदालत से अनुरोध करेगा कि जब इस महीने के अंत में इस मुकदमे का उपचार चरण शुरू होगा, तो गूगल को अपने विज्ञापन तकनीक व्यवसाय के कुछ हिस्से को बेचने के लिए बाध्य किया जाए। गूगल से जुड़ा दूसरा मामला इंटरनेट सर्च से संबंधित है।
न्याय विभाग ने तर्क दिया कि गूगल ने अपने प्रतिस्पर्धियों को बाजार से बाहर रखने के लिए बहिष्कार समझौतों का प्रयोग किया, जैसे कि आईफोन पर डिफॉल्ट सर्च इंजन होने के लिए एप्पल को प्रतिवर्ष अरबों डॉलर का भुगतान करना। अगस्त 2024 में एक संघीय न्यायाधीश ने फैसला सुनाया कि गूगल ने अपनी ‘सर्च’ एकाधिकार को बनाए रखने के लिए अवैध रूप से काम किया है। यह मामला अब उपचार चरण में पहुंच गया है। अगले सप्ताह एक महत्वपूर्ण उपचार परीक्षण शुरू होने वाला है। इस दौरान, अदालत इस बात पर बहस सुनेगी कि गूगल के खिलाफ क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।
संभावित उपाय महत्वपूर्ण हो सकते हैं, क्योंकि विनियामकों ने पहले भी गूगल के एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर प्रतिबंध लगाने या यहां तक कि इसके क्रोम ब्राउज़र की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने जैसे उपायों का सुझाव दिया है। गूगल ने इस निर्णय के विरुद्ध अपील करने की अपनी मंशा भी व्यक्त की है।
मेटा के खिलाफ मामला—
मेटा के खिलाफ एफटीसी के मामले में आरोप लगाया गया है कि प्रौद्योगिकी दिग्गज कंपनी ने ‘व्यक्तिगत सामाजिक नेटवर्किंग सेवाओं’ के बाजार में अवैध रूप से एकाधिकार बनाए रखा है। एफटीसी के तर्क का मूल यह है कि मेटा ने प्रतिस्पर्धी खतरों को खत्म करने के लिए ‘खरीदो या दफनाओ’ की रणनीति अपनाई।( भाषा इनपुट के साथ)
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