युद्धस्तर पर धान खरीदे सरकार : चिंतला
हैदराबाद, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश उपाध्यक्ष व पूर्व विधायक चिंतला रामचंद्रा रेड्डी ने चिंता जताते हुए कहा कि किसान द्वारा मेहनत से उगाया गया 30 लाख मीट्रिक टन धान अकाल वर्षा के कारण भीग चुका है, लेकिन राज्य सरकार धान खरीद केंद्र में पड़े धान को खरीदने में लापरवाही बरत रही है। इसके चलते किसान आत्महत्या करके जान देने पर मजबूर हो रहा है।
भाजपा मुख्यालय श्यामाप्रसाद मुखर्जी भवन में मीडिया से बात करते हुए चिंतला रामचंद्रा रेड्डी ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सरकार से किसानों का धान युद्धस्तर पर खरीदने की मांग करते हुए कहा कि मानसून पहले ही आने वाला है इसकी चेतावनी मौसम विभाग ने पहले ही दे दी है इसलिए धान खरीद में देरी न की जाए। धान के भीगने के कारण हुए नुकसान के चलते 3 किसानों ने जान दे दी।
कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद अब तक 442 किसानों ने आत्महत्या की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव सरकार ने भी किसानों की उपेक्षा की, अब कांग्रेस सरकार भी किसानों के प्रति लापरवाह है। केंद्र सरकार धान पर न्युनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2,320 रुपये प्रति क्विंटल देकर खरीदने के लिए तैयार है राज्य सरकार को केवल व्यवस्थाओं का उपयोग करके धान खरीदकर मिलिंग के बाद चावल देना है।
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धान खरीद और योजनाओं में लापरवाही पर सवाल
चिंतला ने कहा कि केंद्र सरकार राज्य सरकार को धान खरीद के पैसे के अलावा बोरे, सुई, सुतली, परिवहन सुविधा व ब्याज भी देने तैयार है लेकिन कांग्रेस सरकार अपना कर्तव्य निभाकर किसानों से धान खरीदने में लापरवाही बरत रही है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना में अच्छे कृषि अधिकारी हैं उनका उपयोग करने में कदम पीछे करके कांग्रेस सरकार किसानों के जीवन से खेल रही है।
चिंतला ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार इस बीमा योजना को अमल करके फसलों का बीमा करवाती तो किसानों को नुकसान नहीं उठाना पड़ता लेकिन यह सरकार केंद्र की किसी योजना का लाभ लेने की जरूरत ही नहीं समझ रही है। उन्होंने केंद्र सरकार की कुसुम योजना का नाम लेते हुए कहा कि किसानों को इस योजना का लाभ पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में दिया जा रहा है लेकिन तेलंगाना में किसानों को सोलार सिस्टम का लाभ कांग्रेस सरकार नहीं दे रही है।
चिंतला ने कहा कि कुसुम योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार सोलार सिस्टम स्थापित करने के लिए 30 प्रतिशत रियायत (सब्सिडी) दे रही है इसमें राज्य सरकार को 30 प्रतिशत भागीदारी अदा करनी होती है शेष किसान को देना होता है। उन्होंने कहा कि यदि किसानों को सोलार सिस्टम की व्यवस्था का लाभ दिया गया तो उन्हें बिजली फ्री में उपलब्ध होगी, लेकिन यह काम भी कांग्रेस सरकार नहीं कर पा रही है।
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