हाईकोर्ट में ग्रुप-1 परीक्षा को बताया गया अनियमितताओं का पुलिंदा
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय में ग्रुप-1 परीक्षा को लेकर याचिकाओं पर सुनवाई आज भी जारी रही। आज सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस नामवरपु राजेश्वर राव ने स्पष्ट किया कि ग्रुप-1 की मुख्य परीक्षा का संचालन अनियमितताओं से भरा हुआ है। प्रारंभ में निर्धारित 2 परीक्षा केन्द्रां के लिए चुने गए उम्मीदवारों ने परीक्षा लिखी और इन दो केन्द्रां में परीक्षा लिखने वाले 500 उम्मीदवारें में से 10 प्रतिशत ने योग्यता हासिल की।
इससे स्पष्ट हो रहा है कि परीक्षा के आयोजन में अनियमितता बरती गई। ग्रुप-1 के मूल्यांकन में भी अनियमितता होने का हवाला देते हुए दायर 4 याचिकाओं पर आज न्यायाधीश ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रचना रेड्डी ने कहा कि हैदराबाद कोठी स्थित महिला कॉलेज में 18 और 19 नंबर के सेंटर में 563 उम्मीदवारों ने परीक्षा लिखी और क्रमश: 5.41 व 4.12 प्रतिशत की दर से कुल 9.53 प्रतिशत उम्मीदवारों ने ग्रुप-1 योग्यता हासिल की, यह जानकर आश्चर्य हो रहा है।
महिला परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा केन्द्रों में भेदभाव
इसकी जानकारी स्वयं टीजीपीएससी द्वारा दी गई। इन दोनों परीक्षा केन्द्रां में महिलाओं ने परीक्षा लिखी और अन्य केन्द्रां में एक भी महिला ने योग्यता हासिल नहीं की। इस बारे में टीजीपीएससी के पास कोई जवाब नहीं है। इन दोनों केन्द्रां से 563 परीक्षार्थियों ने परीक्षा लिखी और 10 प्रतिशत सफलता हासिल की, जबकि 30 से 40 केन्द्रां में एक भी परीक्षार्थी को सफलता नहीं मिली।
कोठी स्थिति आईलम्मा महिला विद्या संस्था होने के कारण वहाँ केवल महिलाओं के लिए अनुमति दी गई, लेकिन यह नियम बेगमपेट समेत अन्य 8 महिलाओं कॉलेजों के लिए क्यों अमल में नहीं लाया गया। पहले 45 केन्द्रां में परीक्षा संचालित करने की जानकारी दी गई। बाद में केन्द्रां की संख्या बढ़ाकर 46 कर दी गई। इस बारे में कोई जानकारी दी गई और यह भी नहीं बताया गया कि कितने परीक्षा केन्द्रां में महिला व पुरुषों ने परीक्षा लिखी।
केवल शौचालय के मामले को लेकर कोठी कॉलेज केन्द्र में महिला परीक्षार्थियों को ही परीक्षा लिखने की अनुमति दी गई। इस कारण केवल इसी केन्द्र से बड़े पैमाने पर महिलाओं के योग्यता हासिल करने पर संदेह किया जा रहा है। अपनी दलील जारी रखते हुए रचना रेड्डी ने कहा कि टीजीपीएससी ने परीक्षा के आयोजन से पूर्व परीक्षा केन्द्रां में बायो-मेट्रिक व्यवस्था को अमल में लाने की घोषणा की, लेकिन इसे अमल में नहीं लाया। इस कारण परीक्षार्थियों की संख्या में बदलाव देखने को मिला।
यह भी पढ़ें… ग्रुप वन की भर्तियों पर रोक
टीजीपीएससी परीक्षा में अनियमितताएं और हॉल टिकट बदलाव
परीक्षा होते ही बताया गया कि 21,075 परीक्षार्थियों ने भाग लिया। इसके पश्चात परीक्षा केन्द्रां से मिली जानकारी के आधार पर पुन: बताया गया कि परीक्षार्थियों की संख्या 21,085 है। इसके बाद पुन: एक बार टीजीपीएससी के वेब -नोट में परीक्षार्थियों की संख्या 20,161 बताई। इतने महत्वपूर्ण व उच्चस्तरीय ग्रुप-1 पदों के लिए आयोजित परीक्षा में कितने परीक्षार्थियों ने भाग लिया, इस बारे में टीजीपीएससी की ओर से स्पष्ट संख्या नहीं बताई गई।
इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि परीक्षा का आयोजन किस ढंग से किया गया। बायो-मेट्रिक व्यवस्था को अमल में लाने पर इस प्रकार की अनियमितता होने से रोका जा सकता है, लेकिन अनियमितता बरतने के उद्देश्य से ही बायो-मेट्रिक व्यवस्था को अमल में नहीं लाया गया, जबकि 21 हजार परीक्षार्थियों के लिए इस व्यवस्था को अमल में लाना कोई कठिन कार्य नहीं है। वास्तव में देखा जाए तो अधिसूचना में दिये गये दिशा-निर्देशों का परीक्षा के आयोजन में पालन किया जाना था, लेकिन नियमों का पालन नहीं किया गया।
इतना ही नहीं, प्रिलिम्स के लिए जारी हॉल टिकट को भी मुख्य परीक्षा के दौरान बदल दिया गया। इस प्रकार हॉल टिकट बदलने का उद्देश्य समझ से परे है। यूपीएससी द्वारा संचालित व इस प्रकार की अन्य परीक्षाओं के आयोजन में प्रिलिम्स और मुख्य परीक्षा का आयोजन एक ही हॉल टिकट के जरिये किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से ही परीक्षा केन्द्र, मूल्यांकन और हॉल टिकट को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गई।
टीजीपीएससी की अधिसूचना रद्दीकरण और मूल्यांकन में धांधली
उन्होंने बताया कि कुल 503 रिक्त पदों के लिए परीक्षा के आयोजन की घोषणा की गई, लेकिन 60-60 अन्य रिक्त पदों को जोड़ते हुए टीजीपीएससी ने इससे पूर्व जारी अधिसूचना को रद्द कर दिया। वास्तव में देखा जाए तो सरकार की अनुमति के बिना अधिसूचना रद्द कर नई अधिसूचना जारी करने का टीजीपीएससी को अधिकार नहीं है। अंक सूची को आधिकारिक रूप से वेबसाइट पर अपलोड करने का नियम है, लेकिन इसका भी पालन नहीं किया गया।
व्यक्तिगत स्तर पर उम्मीदवार द्वारा लॉग इन करने पर ही उस उम्मीदवार मात्र को ही उसके अंक पता चलते हैं, जबकि सभी उम्मीदवारों के अंक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से अपलोड किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन को भी लेकर धांधली की गई है। एक पेपर का एक या दो बार मूल्यांकन किया जा सकता है।
इस मूल्यांकन के दौरान 15 प्रतिशत का अंतर आता है, तो तीसरी बार भी मूल्यांकन करने का नियम है। इस बारे में उम्मीदवार के पूछने पर उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की धमकी दी जा रही है। इसके अलावा अंकों की गणना ओएमआर (ऑप्टिकल मिशन रीडर) के जरिये करने के नियम को भी टीजीपीएससी द्वारा अमल में नहीं लाया गया। इस मामले पर शुक्रवार को भी सुनवाई होगी।
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



