हरीश ने रेवंत सरकार पर लगाया हजारों करोड़ों का कर्ज लेने का आरोप

हैदराबाद, भारास के विधायक व पूर्व मंत्री टी. हरीश राव ने कांचा गच्ची बावली के 400 एकड़ भूमि विवाद का उल्लेख करते हुए खुलासा किया कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी सरकार ने 22 अत्तूबर, 2024 को मॉर्टगेज करके भूमि पर मुंबई के एक ब्रोकर को माध्यम बनाकर बैंक से 10 हजार करोड़ रुपये कर्ज लिया है। कर्ज दिलाने वाले ब्रोकर को ब्रोकरेज के तौर पर 169 करोड़ 83 लाख रुपये फीस भी अदा की।

मामले में पर्यावरण विध्वंस आदि अन्य विवादों पर सुप्रीम कोर्ट की गठित कमेटी के समक्ष अपना पक्ष रखने के बाद भारास मुख्यालय तेलंगाना भवन में मीडिया को संबोधित करते हुए टी. हरीश राव ने स्पष्ट किया कि यह आरोप वह अपनी ओर से नहीं लगा रहे, बल्कि विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित जवाब में सरकार ने खुद इसकी जानकारी दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने आम ब्याज से अधिक पर यह कर्ज लिया है। इतना ही नहीं एचएमडीए से संबंधित भूमि पर भी कर्ज लेने के प्रयास किए जा रहे हैं।

गच्ची बावली में पर्यावरण विध्वंस पर सवाल उठे

उन्होंने बताया कि कमेटी के समक्ष 11 पन्नों के ज्ञापन के साथ 200 पन्नों के दस्तावेज भी रखे गए और कमेटी ने सकारात्मक रवैया व्यक्त किया है। अन्य शिकायतों या दस्तावेजों के लिए ई-मेल भी दिया। उन्होंने कहा कि कमेटी ने बीआरएस का पक्ष सुना और कुछ प्रश्न भी किए, जिनका जवाब दिया गया।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कांचा गच्ची बावली की भूमि पर कोई गतिविधि नहीं करने के आदेश दिए हैं, लेकिन आदेशों का उल्लंघन करके सरकार ने गच्ची बावली की भूमि को टीजीआईआईसी की भूमि है कहकर बोर्ड लगा दिया है। अब मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को सुप्रीम कोर्ट का भी डर नहीं रहा। हरीश राव ने कहा कि गच्ची बावली स्थित जो 400 एकड भूमि है, वह हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (एचसीयू) की ही है।

उस पर मुख्यमंत्री रेवंत सरकार ने कई कानूनों का उल्लंघन किया है, लेकिन उन पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। न राजस्व विभाग और न ही वन विभाग द्वारा कोई कदम उठाया गया। उन्होंने कहा कि 400 एकड़ पर पर्यावरण विध्वंस हुआ है, कई जीव-जंतुओं को बेघर कर दिया गया। हिरण लोगों के घरों में जा बैठे। करीब 3 हिरण मारे गए।

यह सबने सोशल मीडिया व मीडिया के माध्यम से देखा, लेकिन पुलिस डीजीपी को नहीं दिखाई दिया। उन्होंने डीजीपी से प्रश्न किया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के प्रति यदि सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट कर दे, तो रातों रात उसे हिरासत में ले लिया जाता है। गच्ची बावली की भूमि पर सरकार ने कानूनों का उल्लंघन कर कई पेड़ काट डाले, हिरण मारे गए, लेकिन क्यों केस दर्ज नहीं किए जा रहे है।

यह भी पढ़ें… कांचा गच्ची बावली में पेड़ों की कटाई पर रोक

रेवंत सरकार पर सात कानूनों के उल्लंघन का आरोप

उन्होंने आईपीएस, आईएएस व आईएफएस अधिकारियों को सतर्क करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के हर निर्णय में बिना सोचे समझे कानूनों का उल्लंघन कर साथ न दें, वरना कानूनी पचड़े में पड़ सकते हैं। सरकार शास्वत नहीं रहेगी, भविष्य में अपने लिए समस्याएँ न खड़ी करें। सरकार बदली तो कानून अपना काम खुद करेगा। उन्होंने कहा कि सबने मिलकर अपराध किया है। अपराध होता देख मौन रहने वाला भी उतना ही अपराधी होता है।

उन्होंने कहा कि गच्ची बावली भूमि पर 1967 स्टेट फारेस्ट एक्ट का उल्लंघन, 1980 गोदा वर्मा निर्णय का उल्लंघन, 2002 वाल्टा एक्ट के अंतर्गत यदि पेड़ काटना हो तो अनुमति लेना अनिवार्य है, तो सरकार ने अनुमति नहीं ली, वर्ष 2017 जीओ नंबर 23 के अनुसार पेड़ काटना हो तो ऑनलाइन आवेदन करना होता है, वन विभाग की अनुमति लेना अनिवार्य है, लेकिन वहाँ भी उल्लंघन किया गया है। उन्होंने कहा कि गरीब किसान द्वारा उसी के खेत में इमली, नीम का पेड़ काटने पर पुलिस व एमआरओ जाकर लाखों का जुर्माना ठोक डालते हैं।

लेकिन सरकार ने कई पेड़ काट डाले और अनुमति के लिए एक आवेदन तक नहीं किया, फिर भी कोई केस दर्ज नहीं किया गया। वास्तव में वन भूमि ही नहीं, खुद के घर में भी पेड़ काटा गया, तो अनुमति जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि एचसीयू भूमि में जो पेड़ काटे गए हैं, उसमें मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने 7 कानूनों का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि एचसीयू की भूमि विश्वविद्यालय को ही मिले, यह आग्रह कमेटी से किया गया है । अवसर पर आर.एस. प्रवीण कुमार, डॉ. दासोजू श्रवण, कालेरू वेंकटेश व अन्य उपस्थित थे।

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