हरीश राव ने दी सिट अधिकारियों को धमकी

हैदराबाद, फोन टैपिंग मामले में पूछताछ कर रही स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (सिट) अधिकारियों को भारत राष्ट्र समिति (भारास) विधायक दल के उप नेता टी. हरीश राव ने चेतावनी देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के आदेशों पर संविधान व कानून का उल्लंघन करने वाले पुलिस अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे किसी बिल में जाकर छुप जाएँ या सात समुंदर पार चले जाएँ। बीआरएस के सत्ता में आने पर सभी की खबर ली जाएगी।

हरीश राव ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि सिंगरेणी कोयला ब्लॉक टेंडर घोटाले को सार्वजनिक किये जाने पर बदले की भावना से सरकार ने जनता का ध्यान हटाने के उद्देश्य से फोन टैपिंग मामले के बहाने नोटिस देकर पूछताछ के लिए पहले उन्हें (हरीश राव) और आज केटीआर को बुलाया है, परंतु बीआरएस डरने वालों में से नहीं है। हर सवाल का जवाब देगी। उन्होंने कहा कि सरकार के इशारों पर नियमों का उल्लंघन करके प्रताड़ित कर रहे पुलिस अधिकारियों को बीआरएस सरकार में आने के बाद बख्शेगी नहीं। उन्होंने कहा कि चाहे पुलिस अधिकारी रिटार्यड क्यों न हो जाएँ, सात समुंदर पार चले जाएँ, किसी बिल में छुप जाएँ, पकड़कर लाया जाएगा।

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बीआरएस सत्ता में आने पर भ्रष्ट अधिकारियों को नहीं बख्शेंगे

हरीश राव ने आगे कहा कि सत्ता में आने के बाद बीआरएस सरकार इन अधिकारियों को किसी प्रकार का सहयोग नहीं करेगी। केस लड़ने वकील का खर्चा तक इन अधिकारियों को खुद ही वहन करना पड़ेगा । उन्होंने कहा कि सरकार के इशारों पर काम कर रहे पुलिस अधिकारी काफी सोच-समझकर व्यवहार करें। उन्होंने कहा कि अर्जुन की आँख जिस प्रकार मछली पर टिकी हुई थी उसी प्रकार बीआरएस की आंखें भी रेवंत रेड्डी सरकार के घोटालों व भ्रष्टाचार पर टिकी हुई हैं। मुख्य विपक्षी दल होने के नाते सरकार के हर घोटाले को सार्वजनिक किया जाएगा।

पूर्व मंत्री ने कहा कि यूपीए सरकार के समय 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपये का कोयला घोटाला हुआ था, जो कांग्रेस के पतन का कारण बना। इसी प्रकार, सिंगरेणी कोल ब्लॉक टेंडर घोटाला रेवंत रेड्डी सरकार के पतन का कारण बन चुका है। उन्होंने कहा कि जब भी राज्य की रेवंत सरकार किसी संकट से घिर रही है, कोई न कोई आरोप लगाकर नोटिस देकर प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने एक और खुलासा करते हुए कहा कि टेंडर घोटाले के बाद अब रामागुंडम सोलार पॉवर स्कैम भी सामने आने लगा है।

मंत्री ने आरोप लगाया कि इस सरकार ने सोलार पॉवर में नियमों में फेरबदल करके एमएसएमई को टेंडर से बाहर करने के प्रयास किए हैं। इसमें भी साइट विजिट नियम लगाकर गुजरात से संबंधित कंपनी को टेंडर देने के प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि घोटाले में 500 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन हुआ है। उन्होंने केंद्रीय कोयला व खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से इस घोटाले की भी जाँच कराने की मांग की और कहा कि इस संबंध में केंद्रीय मंत्री को पत्र भी लिखा है।

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