सरूरनगर झील में जलकुंभी को लेकर उच्च न्यायालय नाराज

हैदराबाद, तेलंगाना में जल निकायों की खराब स्थिति और अवैध विध्वंस कार्रवाई को लेकर उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। सरूरनगर झील में बढ़ती जलकुंभी और मच्छरों के खतरे पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने अधिकारियों को तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, आईलापुर तांडा में बिना नोटिस की गई बुलडोजर कार्रवाई पर भी कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी किया है।

उच्च न्यायालय ने जल निकायों में बढ़ती हुई हार्सटेल घांस (जलकुंभी) को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई में विफलता को लेकर गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त की। अदालत ने सरूरनगर झील में स्थिति बिगड़ने और मच्छरों की बढ़ती संख्या पर भी गहरी चिंता जताई। अदालत ने आश्चर्य जताया कि जन प्रतिनिधियों विशेषकर विधायक द्वारा कई बार इस मुद्दे को उठाने के बावजूद अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की है।

अदालत ने कहा कि अधिकारियों का यह रवैया पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस एन.वी. श्रवण कुमार ने जीएचएमसी, हैदराबाद नगर निगम और संबंधित विभागों को इस समस्या का तत्काल समाधान करने का आदेश दिया है, जो सीधे तौर पर जन-स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।

अदालत ने आदेश दिया कि सरूरनगर झील सहित जीएचएमसी की सीमा की परिधि में आने वाले सभी जल निकायों से हार्सटेल के पौधे हटाने के लिए उपाय किए जाएँ। इसी प्रकार अदालत ने मच्छरों के प्रसार को रोकने के लिए फॉगिंग, लार्वा रोधी उपाय, विशेष टीमों की नियुक्ति और निरंतर निरीक्षण करने का आदेश दिया।

मच्छरों के बढ़ते खतरे पर हाईकोर्ट सख्त, तुरंत कार्रवाई के निर्देश

अदालत ने कहा कि अधिकारियों को जन-स्वास्थ्य के मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए और कार्रवाई करनी चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने इस मामले के संबंध में की गई कार्रवाई पर एक रिपोर्ट पेश करने का भी आदेश देते हुए मामले की सुनवाई 16 अप्रैल तक स्थगित कर दी। सैदाबाद के व्यापारी डी. कीर्ति किरण द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की गई।

याचिकाकर्ता ने अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया कि झील के पानी में हार्सटेल जैसी खरपतवारों की अंधाधुंध वृद्धि के कारण मच्छरों की समस्या गंभीर हो गई है और आस-पास के इलाके निर्जन हो गए हैं। एल.बी. नगर के विधायक डी. सुधीर रेड्डी ने झील की तस्वीरें पेश करने के साथ-साथ विधानसभा में मच्छर की समस्या के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया।

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इन मुद्दों को ध्यान में रखते हुए उच्च न्यायालय ने सवाल किया कि आम जनता और जन-प्रतिनिधियों द्वारा मुद्दा उठाए जाने के बावजूद अधिकारियों ने कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी। अदालत ने कहा कि अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की कि देरी चिंता का विषय है और चेताया कि इससे बीमारियों का प्रसार हो सकता है। इसी प्रकार अदालत ने हैद्रा को आपदा निवारण में उसकी प्रमुख जिम्मेदारी की याद दिलाई। अदालत ने झील का निरीक्षण करने और तत्काल कार्रवाई करने के आदेश जारी किए।

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