प्राकृतिक आपदा विभाग को मजबूत करने के लिए उच्च स्तरीय समिति
हैदराबाद, राजस्व, आवास, सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने अधिकारियों को इस वर्ष राज्य में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना संबंधी मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर गोदावरी और कृष्णा नदी घाटियों में जान-माल और वित्तीय नुकसान को रोकने के लिए अभी से कदम उठाने के निर्देश दिए।
उन्होंने आज सचिवालय में गोदावरी और कृष्णा नदी बहाव वाले क्षेत्रों में बाढ़ प्रबंधन पर संबंधित जिलाधीशों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने सुझाव दिया कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण नुकसान होने के बाद राहत कार्य शुरू करने के बजाय नुकसान को रोकने के लिए निवारक उपाय किए जाने चाहिए। हैदराबाद की तर्ज पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में उठाए जाने वाले कदमों और आपदा प्रबंधन विभाग को मजबूत करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर आवश्यक सुझाव देने हेतु राज्य स्तर पर उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है।
समिति में हैद्रा आयुक्त, अग्निशमन महानिदेशक, आपदा प्रबंधन आयुक्त, कमांड कंट्रोल सेंटर निदेशक, सिंचाई, आरएंडबी और स्वास्थ्य विभाग के आयुक्तों को सदस्य नियुक्त किये गये हैं। यह समिति एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। रिपोर्ट के अनुसार अगले कदम उठाये जाएँगे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष बारिश का मौसम अपेक्षा से 15 दिन पहले आ गया है। इसे ध्यान में रखते हुए जिलाधीशों को सतर्क रहना चाहिए।
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बाढ़ पूर्व तैयारियों के निर्देश और समन्वय पर जोर
सभी विभागों को समन्वय से काम करते हुए प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को यथासंभव कम करने के लिए कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि गोदावरी और कृष्णा नदी क्षेत्रों में जुलाई, अगस्त और सितंबर के महीनों में अचानक बाढ़ आ रही है। पिछले अनुभवों को ध्यान में रखते हुए एहतियाती कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जलग्रहण क्षेत्रों के निवासियों की पहचान कर उन्हें वहाँ से स्थायी रूप से स्थानांतरित करने और उनके लिए इंदिरम्मा घर बनाने के लिए कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष गोदावरी जलग्रहण क्षेत्रों में अल्प अवधि में भारी वर्षा के कारण नुकसान अधिक हुआ था।

यदि इस बार भी ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो नुकसान को कम करने के लिए पहले से ही प्रबंध किए जाएँ। उन्होंने सुझाव दिया की राजस्व आपदा प्रबंधन विभाग बदलती परिस्थितियों के अनुरूप आधुनिक तकनीक का उपयोग कर सभी विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करे। उन्होंने जिलाधीशों को पिछले अनुभवों और अपने जिलों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए 30 जून तक बाढ़ कार्य-योजना तैयार करने के निर्देश दिए।
साथ ही कहा कि बाढ़ नियंत्रण तटबंधों, छोटी व मध्यम नहरों, बरसाती नालों आदि का निरीक्षण कर मरम्मत कार्य कराया जाए। आपातकालीन समय में बाढ़ सुरक्षा के लिए बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जनता को जागरूक किया जाए। मोबाइल मेडिकल टीम, आवश्यक दवाएँ, जल शुद्धिकरण टैबलेट, स्वच्छता किट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई जाए। बैठक में राजस्व प्रधान सचिव नवीन मित्तल, राज्य आपदा प्रबंधन आयुक्त हरीश, अग्निशमन महानिदेशक नागी रेड्डी, हैद्रा आयुक्त रंगनाथ, आईएमडी अधिकारी नागरत्नम, आदिलाबाद, भद्राद्री कोत्तागुडेम, जोगुलंबा गदवाल, मुलुगु, निर्मल और वनपर्ती जिलाधीशों ने भाग लिया।
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