जयपुर में हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग

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जयपुर, राजधानी के मुहाना इलाके में साइबर क्राइम और संगठित अपराध का खतरनाक मेल सामने आया है, जहाँ अज्ञात 6-7 नकाबपोश बदमाशों ने आईटी कंपनी के दो संचालकों का फिल्मी अंदाज में अपहरण कर लिया। आरोपियों ने डिजिटल करेंसी में निवेश का झांसा देकर दोनों को बुलाया और फिर कार में जबरन बैठाकर किडनैप कर लिया। इसके बाद बदमाशों ने पीड़ितों के ही मोबाइल फोन से उनके परिजनों को कॉल कर 1 करोड़ रुपए की फिरौती की मांग की।

पुलिस जांच में सामने आया है कि जगतपुरा निवासी राहुल और दिनेश मुहाना स्थित इस्कॉन मंदिर के पास आईटी कंपनी संचालित करते हैं। शाम करीब 6 बजे दोनों को एक कॉल आया, जिसमें खुद को निवेशक बताकर यूएसडीटी में मोटा मुनाफा दिलाने का लालच दिया गया। साइबर निवेश के इस जाल में फंसकर दोनों शाम करीब 7 बजे तय स्थान पर पहुंचे।

यहीं से अपराधियों ने अपनी साजिश को अंजाम दिया। जैसे ही दोनों मौके पर पहुंचे, पहले से घात लगाए बैठे नकाबपोश बदमाशों ने उन्हें जबरन कार में बैठाया और वहां से फरार हो गए। अपहरण के तुरंत बाद बदमाशों ने पीड़ितों के मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए उनके परिजनों को कॉल किया। आरोपियों ने 1 करोड़ रुपए की फिरौती मांगते हुए पैसे लेकर गोनेर पहुंचने को कहा।

जीपीएस ट्रैकिंग से पुलिस ने बदमाशों का पीछा तेज किया

परिजनों ने घबराने के बजाय तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने पूरे शहर में अलर्ट जारी कर दिया गया। मुहाना थाना पुलिस ने एसीपी मानसरोवर आईपीएस आदित्य काकड़े और थानाधिकारी गुर भूपेंद्र सिंह के नेतृत्व में तुरंत कार्रवाई शुरू की। जाँच के दौरान सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिनमें संदिग्ध कार का नंबर मिला। यह कार मानसरोवर की एक रेंटल कंपनी से ली गई थी।

कार में लगे जीपीएस सिस्टम ने पुलिस के लिए गेम चेंजर का काम किया। इसके साथ ही बदमाशों द्वारा मोबाइल फोन बंद न किए जाने की बड़ी चूक ने पुलिस को लगातार लोकेशन ट्रैक करने का मौका दे दिया। पुलिस के अनुसार, बदमाश लगातार लोकेशन बदलते रहे ताकि ट्रैकिंग से बचा जा सके।

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आरोपियों ने गोनेर से शुरुआत कर हिंगोनिया गौशाला, इंदिरा गांधी नगर, खो नागोरियान, कानोता होते हुए बस्सी तक का रास्ता तय किया। इसके बाद वे नायला और जामडोली के जंगलों में घूमते रहे। करीब 10 से 11 घंटे के भीतर बदमाशों ने 13 से ज्यादा लोकेशन बदलीं, लेकिन पुलिस टीम लगातार उनका पीछा करती रही। तकनीकी निगरानी और फील्ड टीम के तालमेल ने इस ऑपरेशन को सफल बनाया।

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