राष्ट्रीय एकता का प्रभावी सेतु है हिन्दी : बंडी संजय
हैदराबाद, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री एवं करीमनगर के सांसद बंडी संजय ने कहा कि मातृभाषा में प्राप्त ज्ञान अधिक गहरा और स्थाई होता है। साथ ही अन्य भाषाएं हमें वैश्विक मंच से जोड़ती हैं इसलिए सभी भारतीय भाषाओं का सम्मान और समन्वय आवश्यक है, वहीं हिन्दी राष्ट्रीय एकता का प्रभावी सेतु बनकर स्थापित हुई है।
त्रिपुरा के अगरतला स्थित इंटरनेश्नल इंडोर एक्जीबिशन सेंटर में पूर्व पूर्वोत्तर एवं उत्तरी क्षेत्रों के संयुक्त क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन को हिन्दी में संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री बंडी संजय ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में हिन्दी और भारतीय भाषाओं को नई दिशा मिली है और प्रयास है कि भाषा बाधा नहीं, बल्कि सेतु बने। उन्होंने त्रिपुरा को भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य बताते हुए कहा कि यहां अनेक संस्कृतियों, परंपराओं और भाषाओं का सुंदर संगम है।
हिन्दी से बढ़ता है समावेशन और संवाद : बंडी संजय
बंडी संजय ने कहा कि त्रिपुरा जैसे राज्य में जहां अनेक भाषाएं और बोलियां स्वाभाविक रूप से सह अस्तित्व में हैं, वहां हिन्दी का प्रयोग समावेशन, सहभागिता और संवाद को और सुदृढ़ बनाता है। उन्होंने कहा कि राजभाषा हिन्दी ने सदा ही देश के सभी क्षेत्रों को एकता सूत्र में जोड़ने का काम किया है। हिन्दी राष्ट्रीय एकता का प्रभावी सेतु बनकर स्थापित हुई है। उन्होंने कहा कि हिन्दी भिन्नता में एकता के भारतीय आदर्श को स्थापित करने का सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर जैसे बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक क्षेत्र में भी हिन्दी भाषा बोलचाल और राष्ट्रीय एकता का प्रभावी सेतु बनकर स्थापित हुई है।
बंडी संजय ने कहा कि हिन्दी यहां भिन्नता में एकता के भारतीय आदर्श को साकार करने का सशक्त माध्यम भी बनी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व में शासन की भाषा को सरल बनाने में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह प्रयास है कि प्रशासन की भाषा आम जन के लिए समझने में आसान हो और सरकारी कामकाज में ऐसी भाषा के उपयोग को बढ़ाया जा सके, जो स्पष्ट और सहज हो। इसी दिशा में केंद्रीय गृह मंत्रालय का राजभाषा विभाग निरंतर कार्य कर रहा है।
बंडी संजय ने कहा कि राजभाषा विभाग कोई औपचारिक विभाग नहीं है, बल्कि नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि राजभाषा विभाग ने हिन्दी शब्द सिंधू, भारतीय भाषा अनुभाग और भारतीय बहुभाषी अनुवाद सारथी जैसे आधुनिक उपकरण विकसित किए हैं। इनसे प्रशासन सरल व पारदर्शी और जनमुख बन रहा है। उन्होंने कहा कि हिन्दी विश्व मंच पर सशक्त रूप से उपस्थित हुई है। शिक्षा, मीडिया, सिनेमा और डिजिटल माध्यमों ने इसकी पहुंच बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि देश और विदेशों में करोड़ों लोग हिन्दी से जुड़े हैं।
सभी भाषाओं के सम्मान व संरक्षण पर दिया जोर
यह हमारी सांस्कृतिक शक्ति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि हिन्दी किसी भी भाषा का प्रतिस्थापन नहीं है, यह परस्पर सहयोग व समझ का माध्यम है। उन्होंने कहा कि हिन्दी सभी भाषाओं का सम्मान और संरक्षण की भावना के साथ आगे बढने का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि इस सम्मेलन में प्रस्तुत विचार – विमर्श, अनुभव और सुझाव राजभाषा के क्रियान्वयन को नई उर्जा और नई दिशा प्रदान करेंगे।
बंडी संजय ने कहा कि यह आयोजन पूर्वोत्तर भारत में हिन्दी के स्वाभाविक सकारात्मक रचनात्मक विचार को और सशक्त बनाएगा। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में हिन्दी भिन्नता में एकता के भारतीय आदर्श को साकार करने का सशक्त माध्यम बनी है। उन्होंने कहा कि वे सम्मेलन को बताना चाहते हैं कि वे एक तेलुगु भाषी हैं और हिन्दी सीखने की प्रेरणा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिली है।
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बंडी संजय ने आगे कहा कि कार्यालय के सभी काम हिन्दी में आसानी से कर लेते हैं जिसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री शाह को धन्यवाद है। उन्होंने त्रिपुरा सरकार, केंद्रीय गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग और आयोजन से जुड़े सभी अधिकारियों व कर्मचारियों के सफल एवं सार्थक सम्मेलन के लिए हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं। अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा, सांसद राजीव भट्टाचार्य, बिप्लव कुमार देव, महारानी कृति सिंह देव बर्मन आदि उपस्थित थे।
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