जीवन में ज्ञान प्राप्ति के लिए विनय आवश्यक : विनयश्रीजी
हैदराबाद, जीवन में विनय आना जरूरी है। विनय नहीं है तो जीवन कुछ काम का नहीं है। ज्ञान सीखना है तो विनय चाहिए। व्यापार, घर परिवार, समाज चलाना है तो विनय चाहिए और मोक्ष प्राप्त करना है तो भी विनय चाहिए। उक्त उद्गार सिख छावनी स्थित श्री आनंद भवन में श्री जैन श्रावक संघ कोरा (छावनी) के तत्वावधान में आयोजित चातुर्मासिक धर्म सभा को संबोधित करते हुए महासती श्री राजमतीजी म.सा मंडल की पूज्य विनयश्रीजी म.सा. ने दिये।
यहां मंत्री अनिल तातेड द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पूज्य विनयश्रीजी म.सा. ने कहा कि प्रभु के समवशरण में प्रभु महावीर देशना दे रहे थे उनको सुनने के लिए पूरे पावापुरी के लोग उपस्थित थे। उनके साथ साथ दीपावली महापर्व आने लगे 18 देश के राजा प्रभु तेले रखकर महावीर की देशना सुनते हैं। सभी देशना सुन रहे थे। उसी समय उन लोगों को वाणी के प्रति श्रद्धा थी जो अपना राज्य वैभव को छोड़कर प्रभु की देशना सुनने के लिए जाते हैं। प्रभु व वाणी के प्रति बहुत श्रद्धा थी लेकिन आज वह श्रद्धा किसी के दिल में नहीं रही। केवल प्रवचन सुनने आना है क्योंकि महाराज को बुलाया है, तो सुनना जरूरी है। पूर्व के लोगों को धर्म चाहिए था आज वाले को धन चाहिए।
म.सा. ने कहा कि पहला अध्ययन है विनय श्रुत। समाज में जो विनयवान होता है उसका सम्मान होता है। अविनयी जीवन में कुछ प्राप्त नहीं कर सकता है। जिसमें विनय है वह व्यक्ति हर चीज को प्राप्त कर सकता है। महावीर की वाणी ने कहा कि पहले मानव विनय को धारण करे। शिष्य विनयवान है तो गुरु का ज्ञान प्राप्त करता है। प्रभु महावीर का पहला शिष्य गोशालक था। उसे तीर्थंकर जैसे गुरु मिले जिनमें ज्ञान की कमी नहीं थी, लेकिन गोशालक अविनीत ही रहा।
उत्तराध्ययन सूत्र व साध्वी विनयश्रीजी जन्मदिन समारोह
प्रभु ने सोचा इसे ज्ञान दूंगा तो भी दुख दायी और नहीं दूंगा तो भी दुखदायी है। वहीं प्रभु का दूसरे शिष्य गौतम थे जो विनय की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने 14 पूर्व का ज्ञान सीखा। अनंत लब्धि के धारी बन गये पर इतना ज्ञान होने के बाद भी अहंकार नहीं किया। छोटी छोटी समस्या का समाधान अपने गुरु से ही प्राप्त करते थे। गौतम विनीत थे। जो नमता है वह प्रभु को गमता है। मंच संचालन महामंत्री गौतमचंद मुथा ने किया। जिनवाणी सुनने पधारे हुए महानुभावों का स्वागत अभिनंदन करते हुए उन्होंने कहा कि नवकार महामंत्र का जाप निरंतर गतिमान है।
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उत्तराध्ययन सूत्र भगवान महावीर की अंतिम देशना का वाचन विनयश्रीजी ने किया। मंगलवार 22 अक्तूबर तक उत्तराध्ययन सूत्र का वाचन सुबह 8.30 से 9.30 बजे तक रहेगा। तत्पश्चात अल्पाहार की व्यवस्था रखी गई है। आज साध्वी विनयश्री जी महाराज साहब का 38वां जन्मदिन मनाया गया। श्री संघ की तरफ से महामंत्री गौतमचंद मुथा ने साध्वी श्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। अल्पाहार के लाभार्थी मंगलचंद महावीर चंद अरुण कुमार गौतम चंद कटारिया एवं मोहन लाल सूर्य प्रकाश मनोज कुमार नाबरिया परिवार हैं। साध्वी श्री के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में गौतम चंद प्रसन्न राज हेमन्त विकास मुथा परिवार की तरफ से प्रभावना प्रदान की गई।
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