विनय गुण धर्म का मार्ग और मुक्ति का द्वार : जयश्री म.सा.

हैदराबाद, विनय कोई साधारण गुण नहीं, बल्कि इसका बड़ा भारी महत्व है। जीवन को उज्ज्वल बनाने में विनय गुण का ही सर्वश्रेष्ठ महत्व होता है। विनय के अभाव में जीव अशुभ कर्मों का संचय कर लेता है। विनय गुण के द्वारा व्यक्ति आत्मा को अशुभ कर्मों से भारी बनने से बचा लेता है।

उक्त उद्गार श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ ग्रेटर हैदराबाद के तत्वावधान में काचीगुड़ा स्थित श्री पूनम चंद गांधी जैन स्थानक में चातुर्मासिक धर्म सभा को संबोधित करते हुए साध्वी जयश्रीजी म.सा आदि ठाणा-3 ने व्यक्त किये।संघ के कार्याध्यक्ष विनोद कीमती द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, साध्वी जयश्री म.सा. ने कहा कि इसीलिए सभी धर्मों में महापुरुषों ने गुरु भगवंतों ने विनय की महिमा का बखान कर जन सामान्य को, श्रावक-श्राविकाओं को जागरूक किया। व्यक्ति में जितना अधिक विनय होगा, वह उतना ही जल्दी ही मोक्ष मंजिल की और बढ़ता चला जाता है। जीवन को सुखमय बनाने के लिए विनय गुण धर्म को अपनाना होगा, क्योंकि यह धर्म का मार्ग है और मुक्ति का द्वार है।

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साध्वी राजश्री म.सा. ने भगवान की अंतिम वाणी उत्तराध्ययन सूत्र की गाथाओं के मूल पाठ का वाचन कर जीवन में परिषय, मानव जीवन की चार विशेषताओं और असंस्कृत जीवन की भूमिका पर कथानक के माध्यम से प्रकाश डाला। साध्वी समीक्षाश्री म.सा. ने गीतिका के माध्यम से विनय गुण की महिमा का बखान किया। धर्म सभा का संचालन संघ के कोषाध्यक्ष धर्मीचंद भंडारी ने किया।

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