संपत्ति कर वसूली में लक्ष्य से पिछड़ गया हैदराबाद

हैदराबाद, हैदराबाद महानगर का विस्तार और विभाजन हाल के दिनों का सबसे चर्चित मुद्दा रहा है। एक ओर सरकार इसको शहर के भावी विकास की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण बताती रही, तो दूसरी ओर विपक्ष इस निर्णय को लेकर लगातार हमलावर रहा। ऐसे में वर्ष 2025-26 के संपत्तिकर वसूली के परिणामों को जीएचएमसी प्रशासन बड़ी सफलता बता रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि क्योर (कोर अर्बन रीजन) प्रशासन संपत्ति कर के लक्ष्य तक पहुंचने में सफल नहीं हो पाया। पूरे 300 वार्डों में संपत्ति कर वसूली की तुलना यदि पिछले वर्ष से की जाए तो यह स्पष्ट है कि राजस्व वसूली में चिंताजनक गिरावट आई है।

ग्रेटर हैदराबाद हालाँकि तीन शहरी स्थानीय निकायों में विभाजित किया गया है, लेकिन अब भी इसको विभिन्न मामलों में क्योर प्रांत के रूप में प्रशासित किया जा रहा है। जहाँ तक राजस्व वसूली की बात है, जीएचएमसी द्वारा (सीएमसी और एमएमसी को मिलाकर) घोषित संपत्तिकर वसूली के आंकड़े बता रहे हैं कि निगम की वित्तीय स्थिति चिंताजनक है। वर्ष 2025-26 में निगम ने कुल 2501 करोड़ रुपये का संपत्ति कर संग्रहित किया है। यह वसूली 300 वार्डों से की गई है। यह पिछले वर्ष की तुलना में कुछ कम है।

जीएचएमसी ने अपनी पूर्व सीमाओं के 150 वार्डों से वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए 2,038.42 करोड़ का रिकॉर्ड तोड़ संपत्ति कर संग्रह किया था, जो पहली बार 2,000 करोड़ के आंकड़े को पार कर गया था। यह शानदार प्रदर्शन वन-टाइम सेटलमेंट योजना के कारण संभव हो पाया था, जिससे 8 मार्च से 31 मार्च 2025 के बीच 465.07 करोड़ प्राप्त हुए थे। शेरीलिंगमपल्ली और खैरताबाद जैसे क्षेत्रों में कर भुगतान के प्रति उच्च अनुपालन इसकी सफलता का प्रमुख हिस्सा रहा था। उससे पिछले वर्ष यानी वर्ष 2023-24 में जीएचएमसी की संपत्तिकर वसूली 1917 करोड़ रुपये रही थी।

जीएचएमसी में विस्तार के बाद वार्डों की संख्या 300 हुई

अब जबकि जीएचएमसी में विस्तार के रूप में नये इलाके शामिल किये गये और वार्डों की संख्या बढ़ाकर 300 कर दी गयी और उन्हें फिर तीन निगमों में विभाजित कर फिर से जीएचएमसी को 150, सीएमसी को 76 और एमएमसी क 74 वार्डों में विभाजित किया गया। जब जीएचएमसी का विस्तार हुआ तो नगर प्रशासन को उम्मीद थी कि पूरे 300 वार्डों का संपत्तिकर कलेक्शन 3000 करोड़ तक पहुंच सकता है।

इसलिए कि पूर्व जीएचएमसी क्षेत्र में 2038 करोड़ रुपये से 2500 करोड़ तक तथा विस्तारित (विलय किये गये) क्षेत्र से 500 करोड़ रुपये प्राप्त करने की उम्मीद थी, लेकिन सफलता नहीं मिल पायी। इसके बावजूद कि इस वर्ष ओटीएस के माध्यम से 548 करोड़ रुपये संपत्तिकर वसूल गया, फिर भी विस्तार और विभाजन की प्रक्रिया के दौरान संपत्तिकर वसूली का लक्ष्य कहीं पीछे छूट गया।

जीएचएमसी के एक सेवानिवृत्त अधिकारी के अनुसार, कर संग्रह में ढील, कई क्षेत्रों में संपत्ति कर की वसूली समय पर नहीं हो पाना, महंगाई का दबाव, नए वार्डों में कर संग्रह व्यवस्था पूरी तरह मजबूत न होना जैसे कई मुद्दे हैं, जिसके कारण संपत्तिकर वसूली अधिक उत्साहजनक नहीं हो पायी है। इस पूरी व्यवस्था में एक बात बड़ी दिलचस्प सामने आयी है। 150 वार्डों के जीएचएमसी की तुलना में 76 वार्डों का सीएमसी (साइबराबाद नगर निगम) जीएचएमसी से बाज़ी ले गया है।

यह भी पढ़ें… ग्रेटर हैदराबाद में 2,500 करोड़ संपत्ति कर संग्रह

सीएमसी ने संपत्ति कर वसूली में जीएचएमसी को पीछे छोड़ा

जीएचएमसी में जहाँ 961 करोड़ रुपये का संपत्तिकर वसूला गया है, वहीं सीएमसी में 986 करोड़ रुपये संपत्तिकर वसूला गया है। चूँकि जीएचएमसी से शेरीलिंगमपल्ली और कुकटपल्ली जैसे महत्वपूर्ण व राजस्व वसूली क्षेत्र सीएमसी का हिस्सा बन गये हैं, इसलिए जारी वर्ष जीएचएमसी को अपने पुराने रिकॉर्ड तक पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।जीएचएमसी के लिए यह गिरावट कई मायनों में चिंता का विषय है। संपत्ति कर नगर निगम की आय का प्रमुख स्रोत होता है, जिससे शहर के विकास कार्य जैसे सड़क निर्माण, सफाई व्यवस्था, वर्षा जल निकासी और अन्य बुनियादी सेवाएं चलती हैं।

कम वसूली का सीधा असर इन परियोजनाओं पर पड़ सकता है। यदि राजस्व में सुधार नहीं हुआ, तो विकास कार्यों की गति धीमी पड़ने की आशंका है। निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि निगम अब राजस्व बढ़ाने के लिए नई रणनीतियों पर विचार कर रहा है। विशेष रूप से सरकार द्वारा जारी अर्ली बर्ड योजना का अधिक प्रचार, डिजिटल माध्यम से कर भुगतान को बढ़ावा देना, बकाया करदाताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई, जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को समय पर कर भुगतान के लिए प्रेरित करना तथा कर प्रणाली में पारदर्शिता व निगरानी बढ़ाना जैसे कदम शामिल होंगे।

हालांकि कुल संग्रह 2500 करोड़ रुपये से अधिक है, लेकिन बढ़े हुए वार्डों के मुकाबले यह प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं माना जा रहा है। अधिकारी का मानना है कि जीएचएमसी को अपनी कर वसूली प्रणाली को और मजबूत करना होगा, ताकि शहर के विकास कार्यों पर कोई असर न पड़े। (एफ एम सलीम)

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